कर आधार और निवेशक भरोसे में संतुलन जरूरी: वरिष्ठ आयकर आयुक्त मोनिका भाटिया
सारांश
मुख्य बातें
आयकर विभाग की प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त (अंतरराष्ट्रीय कर) मोनिका भाटिया ने 19 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में स्पष्ट किया कि भारत की अंतरराष्ट्रीय कर व्यवस्था एक निर्णायक मोड़ पर है — जहाँ देश को अपने कर आधार की रक्षा और वैश्विक निवेशकों को स्थिर, पारदर्शी तथा पूर्वानुमानित नीतिगत माहौल देने के बीच सटीक संतुलन साधना होगा। एसोचैम द्वारा आयोजित 23वें अंतरराष्ट्रीय कर सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही।
मुख्य घटनाक्रम
भाटिया ने रेखांकित किया कि टाइगर ग्लोबल मामले में सर्वोच्च न्यायालय का फैसला, नया आयकर अधिनियम, विकसित होते विवाद निपटान तंत्र और तेज़ी से बढ़ती प्रौद्योगिकी — ये सभी मिलकर अंतरराष्ट्रीय कराधान के परिदृश्य को तेज़ी से बदल रहे हैं। उन्होंने कहा, 'नीतिगत स्थिरता निवेशकों के विश्वास का आधार है।'
उन्होंने बताया कि टाइगर ग्लोबल फैसले के बाद सरकार ने वास्तविक और दीर्घकालिक निवेशकों को अधिक स्पष्टता तथा भरोसा देने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं।
एपीए में भारत की उपलब्धियाँ
भाटिया ने अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौते (APA) के क्षेत्र में भारत की प्रगति का उल्लेख करते हुए बताया कि देश अब तक 1,000 से अधिक एपीए समझौते संपन्न कर चुका है, जिनमें 220 से अधिक द्विपक्षीय समझौते शामिल हैं। उनके अनुसार, इससे बहुराष्ट्रीय कंपनियों को कर संबंधी अनिश्चितताओं को काफी हद तक कम करने में सहायता मिली है। गौरतलब है कि एपीए की यह संख्या भारत को एशिया-प्रशांत क्षेत्र के सबसे सक्रिय एपीए कार्यक्रमों में से एक बनाती है।
एआई और कर प्रशासन की नई चुनौतियाँ
भाटिया ने चेताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) न केवल कारोबारी मॉडल बदल रही है, बल्कि कर प्रशासन को भी नई दिशा दे रही है। इससे स्थायी प्रतिष्ठान, लाभ के आवंटन और मूल्य सृजन के वास्तविक स्थान जैसे मुद्दों पर नए प्रश्न खड़े हो रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि तकनीक जिस गति से विकसित हो रही है, उसकी तुलना में मौजूदा कर नियम अपेक्षाकृत धीमी गति से बदलते हैं — और इसीलिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग व वैश्विक सहमति आधारित नियमों का महत्व लगातार बढ़ता जाएगा।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
एसोचैम की अंतरराष्ट्रीय कर कार्यबल के अध्यक्ष राकेश नांगिया ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कराधान अब केवल तेज़ी से बदलने वाले दौर में नहीं, बल्कि एक व्यापक संरचनात्मक परिवर्तन के युग में प्रवेश कर चुका है। उनके अनुसार टाइगर ग्लोबल फैसला, नया आयकर कानून, वैश्विक न्यूनतम कर व्यवस्था और एआई मिलकर आने वाले समय की कर व्यवस्था को आकार देंगे।
एसोचैम की राष्ट्रीय प्रत्यक्ष कर परिषद के अध्यक्ष संदीप चौफला ने कहा कि सरकारें अपने कर आधार को सुरक्षित रखना चाहती हैं, जबकि करदाता स्पष्टता और निश्चितता की अपेक्षा रखते हैं। उन्होंने कहा, 'विधायी ढाँचे और उसके प्रभावी क्रियान्वयन के बीच संतुलन बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।'
सम्मेलन के प्रमुख विषय
इस सम्मेलन में टाइगर ग्लोबल फैसले के बाद का कर परिदृश्य, एआई और अंतरराष्ट्रीय कर नीति, बीईपीएस 2.0, कर संधियों का विकास, नया आयकर अधिनियम, अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौते, सुरक्षित कर प्रावधान तथा सीमापार कर विवाद निपटान जैसे अहम विषयों पर गहन चर्चा हुई। यह सम्मेलन ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक निवेश आकर्षित करने और घरेलू राजस्व संरक्षण — दोनों मोर्चों पर एक साथ काम कर रहा है।