भारतीय शेयर बाजार में एफआईआई निकासी के बावजूद दिख रहा है 'संरचनात्मक लचीलापन'

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भारतीय शेयर बाजार में एफआईआई निकासी के बावजूद दिख रहा है 'संरचनात्मक लचीलापन'

सारांश

विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार वैश्विक दबावों के बावजूद 'संरचनात्मक मजबूती' का प्रदर्शन कर रहा है। एफआईआई की निकासी और रुपया दबाव में हैं, फिर भी घरेलू निवेशकों ने बाजार को सहारा दिया है।

Key Takeaways

  • भारतीय शेयर बाजार में संरचनात्मक मजबूती है।
  • एफआईआई की साप्ताहिक निकासी 29,718.9 करोड़ रुपये रही।
  • घरेलू निवेशकों ने 30,269.23 करोड़ रुपये की खरीद की।
  • भू-राजनीतिक तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित किया।
  • निवेशकों को चयनात्मक रणनीति अपनाने की आवश्यकता है।

नई दिल्ली, 22 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार वैश्विक आर्थिक दबावों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की निकासी के बावजूद “संरचनात्मक मजबूती” का प्रदर्शन कर रहा है।

20 मार्च को समाप्त सप्ताह में, एफआईआई के बीच एक निरंतर ‘रिस्क-ऑफ’ भावना देखी गई, जिसमें साप्ताहिक शुद्ध निकासी 29,718.9 करोड़ रुपये रही।

इस बड़े पैमाने पर निकासी के कारण और अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में वृद्धि के चलते भारतीय रुपया दबाव में आया और यह अस्थायी रूप से 93.71 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया।

वेंचुरा के रिसर्च प्रमुख विनीत बोलिंजकर ने कहा, “दिलचस्प बात यह है कि निफ्टी ने अपनी मजबूती बनाए रखी और 23,114.50 (+0.49 प्रतिशत) पर बंद हुआ, क्योंकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 30,269.23 करोड़ रुपये की साप्ताहिक शुद्ध खरीद के साथ एक सशक्त संतुलनकारी भूमिका निभाई।”

बाजार सप्ताह के अंत में लगभग सपाट रुख के साथ नकारात्मक झुकाव में बंद हुआ, जो निवेशकों में सतर्कता का संकेत है। पहले तीन सत्रों में सकारात्मक रुख रहा, लेकिन गुरुवार को हुई तेज गिरावट ने इस बढ़त को खत्म कर दिया, जिसके बाद अंतिम सत्र में उतार-चढ़ाव देखा गया।

निफ्टी 0.16 प्रतिशत गिरकर 23,114.50 पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स 0.04 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 74,532.96 पर आया।

प्रारंभिक सत्रों में होरमुज़ जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही आंशिक रूप से बहाल होने से बाजार की भावना को सहारा मिला।

रिलायंस ब्रोकिंग लिमिटेड के रिसर्च एसवीपी अजीत मिश्रा ने कहा, “हालांकि, इज़राइल द्वारा ईरान के ऊर्जा ढांचे पर किए गए हमले के कारण बढ़े भू-राजनीतिक तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को लगभग 119 डॉलर प्रति बैरल के हालिया उच्च स्तर के करीब पहुंचा दिया। हालांकि बाद में कीमतों में थोड़ी नरमी आई, लेकिन वे अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।”

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की लगातार कमजोरी और अमेरिका से आने वाले कमजोर वैश्विक संकेतों ने भी दबाव बढ़ाया।

यह एफआईआई की लगातार निकासी के सप्ताह भर दिखा।

कमजोर निवेशक भावना, एफआईआई की निरंतर निकासी और वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए निवेशकों को सतर्क और चयनात्मक रणनीति अपनानी चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि निवेश का झुकाव मजबूत मूलभूत आधार वाले लार्ज-कैप शेयरों और स्थिर आय वाले क्षेत्रों की ओर होना चाहिए।

पश्चिम एशिया में तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड लगभग 107 डॉलर प्रति बैरल के आसपास उतार-चढ़ाव में बना हुआ है, जबकि इंडिया वीआईएक्स का 22.81 पर स्थिर रहना यह संकेत देता है कि बाजार में एक आधार बन रहा है।

बाजार विशेषज्ञों ने कहा, “हम 22,800 से 23,300 के बीच सीमित दायरे में बाजार रहने की उम्मीद करते हैं, जिसमें सकारात्मक रुख तभी संभव है जब वैश्विक ऊर्जा कीमतों में स्थिरता आए और मुद्रा में उतार-चढ़ाव कम हो।”

Point of View

इस समय भारतीय शेयर बाजार में सुधार की संभावनाएँ बनी हुई हैं, हालाँकि विदेशी निवेशकों की निकासी ने बाजार को प्रभावित किया है। घरेलू निवेशकों की सक्रियता ने स्थिति को संभाला है, और भविष्य में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद है।
NationPress
23/03/2026

Frequently Asked Questions

एफआईआई निकासी का भारतीय शेयर बाजार पर क्या प्रभाव है?
एफआईआई की निकासी से बाजार में अस्थिरता आती है, लेकिन घरेलू निवेशकों की सक्रियता से स्थिति को संभाला जा सकता है।
क्या भारतीय रुपया कमजोर हो रहा है?
जी हाँ, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में लगातार कमजोरी देखी जा रही है।
भविष्य में भारतीय शेयर बाजार का क्या संभावित रुख है?
विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार 22,800 से 23,300 के बीच सीमित दायरे में रह सकता है।
क्या भू-राजनीतिक तनाव का असर बाजार पर पड़ रहा है?
जी हाँ, इज़राइल और ईरान के बीच तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित किया है, जो बाजार के लिए चिंता का विषय है।
सुरक्षित निवेश के लिए क्या सलाह है?
विश्लेषकों का सुझाव है कि निवेशकों को मजबूत मूलभूत आधार वाले लार्ज-कैप शेयरों में निवेश करने पर ध्यान देना चाहिए।
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