सेंसेक्स 460 अंक टूटा, 73,249 पर बंद; लगातार तीसरे दिन गिरावट, कच्चे तेल और भू-राजनीतिक तनाव से बाजार पस्त
सारांश
मुख्य बातें
BSE सेंसेक्स गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को 460.30 अंक यानी 0.62 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,249.39 पर बंद हुआ, जबकि NSE निफ्टी 50 123.70 अंक यानी 0.54 प्रतिशत लुढ़ककर 22,687.65 पर आ गया। यह भारतीय शेयर बाजार की लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट है, जिसके पीछे कच्चे तेल की ऊँची कीमतें और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव को प्रमुख कारण बताया जा रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
बाजार निचले स्तर पर खुला और पूरे सत्र में उतार-चढ़ाव जारी रहा। बीच-बीच में निचले स्तरों पर खरीदारी से कुछ राहत मिली, लेकिन बिकवाली का दबाव हावी रहा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 501.90 अंक यानी 0.87 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 57,063.95 पर और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 211.40 अंक यानी 1.14 प्रतिशत की गिरावट के साथ 18,275.90 पर बंद हुआ।
लार्जकैप के मुकाबले मिडकैप और स्मॉलकैप में गिरावट अधिक तीव्र रही, जो दर्शाता है कि निवेशकों का जोखिम भूख तेज़ी से घट रही है।
सेक्टर-वार दबाव
सेक्टोरल मोर्चे पर बिकवाली व्यापक रही। निफ्टी मीडिया में 2.35 प्रतिशत, निफ्टी एफएमसीजी में 1.41 प्रतिशत, निफ्टी इंडिया डिफेंस में 1.21 प्रतिशत, निफ्टी एनर्जी में 1.05 प्रतिशत, निफ्टी आईटी में 1.05 प्रतिशत और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 0.96 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई।
हालाँकि, राहत की बात यह रही कि निफ्टी फार्मा, निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी हेल्थकेयर हरे निशान में बंद हुए, जो संकट में भी रक्षात्मक क्षेत्रों की मज़बूती को उजागर करता है।
विजेता और पिछड़े शेयर
सेंसेक्स पैक में बजाज फाइनेंस, अल्ट्राटेक सीमेंट, ICICI बैंक, Sun Pharma, SBI, भारती एयरटेल, अदाणी पोर्ट्स, टाटा स्टील, कोटक महिंद्रा, HCL Tech और बजाज फिनसर्व बढ़त के साथ बंद हुए।
दूसरी ओर, Eternal, HDFC बैंक, Power Grid, Trent, Infosys, Asian Paints, ITC, BSE, M&M, TCS, L&T, HUL, मारुति सुजुकी, Tech Mahindra, Titan, IndiGo, NTPC और Axis बैंक नुकसान में रहे।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
बाजार जानकारों के अनुसार, कच्चे तेल की ऊँची कीमतें और वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव निवेशकों के मनोबल पर लगातार दबाव बना रहे हैं। उनका कहना है कि एफएमसीजी, आईटी और एनर्जी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में व्यापक बिकवाली यह दर्शाती है कि बाजार में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति अभी भी हावी है।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाजारों में भी अनिश्चितता बनी हुई है और घरेलू कॉर्पोरेट नतीजों का सत्र शुरू हो चुका है। गौरतलब है कि मिडकैप और स्मॉलकैप में लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट यह संकेत देती है कि दबाव केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं, बल्कि बाजार के हर हिस्से में फैला हुआ है।
आगे की संभावना
बाजार विश्लेषकों की नज़र अब वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर टिकी है। घरेलू स्तर पर आगामी तिमाही नतीजों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की गतिविधियाँ बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।