आरबीआई एमपीसी फैसले से पहले सेंसेक्स 150 अंक चढ़ा, निफ्टी 23,449 पर; मीडिया-रियल्टी शेयरों में तेजी
सारांश
मुख्य बातें
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स शुक्रवार, 5 जून 2026 को भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) के बहुप्रतीक्षित फैसले से पहले हरे निशान में खुला। सुबह करीब 9 बजकर 38 मिनट पर सेंसेक्स 150.64 अंक यानी 0.20 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,510.65 पर कारोबार कर रहा था, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 50 32.75 अंक यानी 0.14 प्रतिशत की तेजी के साथ 23,449.30 पर था।
बाज़ार का शुरुआती कारोबार
सेंसेक्स ने अपने पिछले बंद स्तर 74,360.01 से 269.93 अंक की छलांग लगाते हुए 74,629.94 पर कारोबार शुरू किया। वहीं निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 23,416.55 से 62.4 अंक ऊपर 23,478.95 पर खुला। ब्रॉडर मार्केट में भी सकारात्मक रुख बना रहा — निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.44 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.23 प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे।
सेक्टोरल प्रदर्शन
सेक्टोरल मोर्चे पर निफ्टी मीडिया और निफ्टी रियल्टी में सबसे अधिक तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज और निफ्टी ऑटो भी हरे निशान में रहे। दूसरी ओर, निफ्टी मेटल, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी आईटी और निफ्टी एफएमसीजी में कमज़ोरी देखी गई।
निफ्टी 50 के शीर्ष लाभार्थियों में एचडीएफसी लाइफ, बजाज फाइनेंस, अदाणी इंटरप्राइजेज, एसबीआई लाइफ और टेक महिंद्रा रहे। वहीं विप्रो, हिंडाल्को, टाटा स्टील और ट्रेंट के शेयरों में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई।
आरबीआई एमपीसी से क्या उम्मीदें
निवेशकों की नज़रें आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा के बयान पर टिकी हैं, जिससे महंगाई और आर्थिक वृद्धि की दिशा को लेकर अहम संकेत मिल सकते हैं। बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, केंद्रीय बैंक इस बार रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रख सकता है।
एक बाज़ार विशेषज्ञ के मुताबिक, ऊर्जा कीमतों में आए झटके और उनके व्यापक आर्थिक प्रभावों को देखते हुए आरबीआई वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी वृद्धि अनुमान में मामूली कटौती कर सकता है। साथ ही, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई के अनुमान को ऊपर की ओर संशोधित किए जाने की संभावना भी जताई जा रही है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
विशेषज्ञों के अनुसार, आरबीआई की सबसे संभावित रणनीति 'हॉकिश होल्ड' हो सकती है — यानी केंद्रीय बैंक फिलहाल ब्याज दरें यथावत रखेगा, लेकिन साथ ही यह संकेत देगा कि आने वाले महीनों में महंगाई बढ़ने की आशंका है और वर्ष के अंत तक दरों में बढ़ोतरी की ज़रूरत पड़ सकती है।
यदि आरबीआई 25 बेसिस पॉइंट (0.25 प्रतिशत) की दर वृद्धि का फैसला करता है, तो बैंकिंग शेयरों में तेज़ उछाल की संभावना है, क्योंकि बढ़ती ब्याज दरों से बैंकों की आय और मार्जिन को सीधा लाभ होता है। हालाँकि, ऑटोमोबाइल और रियल एस्टेट जैसे ब्याज-संवेदनशील क्षेत्रों पर इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है, क्योंकि ऊँची दरों से वाहन और आवास ऋण महंगे हो जाते हैं।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाज़ारों में अनिश्चितता बनी हुई है और घरेलू निवेशक केंद्रीय बैंक की भाषा में हर बारीकी को पढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। एमपीसी के फैसले के बाद बाज़ार की दिशा काफी हद तक गवर्नर मल्होत्रा के आगे के संकेतों पर निर्भर करेगी।