सेंसेक्स 473 अंक उछला, 72,382 पर बंद; 4 दिन की गिरावट का सिलसिला टूटा
सारांश
मुख्य बातें
बीएसई सेंसेक्स सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को 472.77 अंक यानी 0.66 प्रतिशत की बढ़त के साथ 72,382.47 पर बंद हुआ और निफ्टी 50 133.80 अंक यानी 0.60 प्रतिशत चढ़कर 22,555.75 पर बंद हुआ — इस तरह भारतीय शेयर बाजार ने लगातार चार कारोबारी सत्रों की गिरावट का सिलसिला तोड़ दिया। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में तेज बढ़ोतरी की आशंकाओं में कमी आने के बाद वैश्विक बाजारों में आई तेजी ने घरेलू बाजार को सहारा दिया।
मुख्य घटनाक्रम
निफ्टी50 में सबसे बड़े उछाल में आईटीसी के शेयरों में 5 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई। टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स (TMPV), श्रीराम फाइनेंस, बजाज फाइनेंस, भारती एयरटेल, इटरनल, एनटीपीसी और अदाणी पोर्ट्स के शेयरों में भी उल्लेखनीय तेजी आई।
दूसरी तरफ, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, मैक्स हेल्थ, एचडीएफसी बैंक, अपोलो हॉस्पिटल, एशियन पेंट्स, इन्फोसिस और सन फार्मा के शेयर दबाव में रहे।
व्यापक बाजार और सेक्टरवार प्रदर्शन
व्यापक बाजारों में निफ्टी मिडकैप में 0.67 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप में 0.47 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई। सेक्टर के नजरिए से देखें तो निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और निफ्टी एफएमसीजी ने अच्छा प्रदर्शन किया, जबकि निफ्टी हेल्थकेयर और निफ्टी फार्मा पिछड़े।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, यह रिकवरी लगातार आठ हफ्तों की गिरावट के बाद आई 'राहत की सांस' है। विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और अमेरिका के कमजोर रोजगार आंकड़ों ने फेडरल रिजर्व द्वारा आक्रामक दर वृद्धि की आशंका को कम किया, जिससे बाजार को बल मिला।
हालाँकि, विशेषज्ञों ने यह भी रेखांकित किया कि दिन के उच्चतम स्तर से आई गिरावट यह संकेत देती है कि निवेशक अभी भी सतर्क हैं — खासकर ऊँचे वैश्विक बॉन्ड यील्ड, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार निकासी और भू-राजनीतिक जोखिमों को देखते हुए।
आम निवेशकों पर असर
विशेषज्ञों की सलाह है कि निवेशकों को रिकवरी के पीछे भागने के बजाय गिरावट के समय चुनिंदा शेयर खरीदने की रणनीति अपनानी चाहिए। फाइनेंशियल, आईटी और कंज्यूमर सेक्टर के शेयर बाजार को सहारा दे रहे हैं, लेकिन कुछ आईटी और हेल्थकेयर शेयरों में कमजोरी व्यापक स्तर पर निवेशकों के भरोसे की कमी को उजागर करती है।
क्या होगा आगे
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाजार अमेरिकी मौद्रिक नीति की दिशा को लेकर अनिश्चितता में हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, आगे चलकर तिमाही कमाई के नतीजे और वैश्विक बॉन्ड यील्ड की चाल बाजार की अगली दिशा तय करेगी।