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एलआरएस के तहत अगस्त 2026 में विदेशी बाज़ारों में भारतीयों का निवेश 111% उछला, $321.53 मिलियन पर पहुँचा

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एलआरएस के तहत अगस्त 2026 में विदेशी बाज़ारों में भारतीयों का निवेश 111% उछला, $321.53 मिलियन पर पहुँचा

सारांश

भारतीय निवेशक अब वैश्विक इक्विटी और डेट बाज़ारों की ओर तेज़ी से रुख कर रहे हैं — अगस्त 2026 में एलआरएस के तहत यह निवेश एक साल में दोगुना होकर $321.53 मिलियन पहुँच गया। कुल प्रेषण में इसकी हिस्सेदारी 5.8% से बढ़कर 11.7% हो गई — एक ऐसा बदलाव जो भारतीय वित्तीय व्यवहार में गहरे संरचनात्मक परिवर्तन का संकेत देता है।

मुख्य बातें

RBI के अक्टूबर 2026 बुलेटिन के अनुसार, अगस्त 2026 में एलआरएस के तहत विदेशी इक्विटी व डेट में निवेश 111% उछलकर 321.53 मिलियन डॉलर हुआ।
यह निवेश कुल एलआरएस प्रेषण का 11.7% रहा, जो एक वर्ष पहले केवल 5.8% था।
जून 2026 में विदेशी इक्विटी-डेट निवेश 460 मिलियन डॉलर के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर था।
कुल एलआरएस प्रेषण अगस्त 2026 में 2.74 अरब डॉलर , जो सालाना आधार पर 3.6% अधिक।
यात्रा पर 1.63 अरब डॉलर (कुल का ~59%); कारोबारी यात्रा खर्च में पाँच गुना उछाल।
चिकित्सा उपचार के लिए प्रेषण 21.3% बढ़कर 4.84 मिलियन डॉलर पहुँचा।

उदारीकृत प्रेषण योजना (एलआरएस) के तहत अगस्त 2026 में भारतीय निवेशकों ने विदेशी इक्विटी और डेट बाज़ारों में 321.53 मिलियन डॉलर का निवेश किया — जो अगस्त 2025 के 152.18 मिलियन डॉलर की तुलना में सालाना आधार पर 111 प्रतिशत की वृद्धि है। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के अक्टूबर 2026 बुलेटिन में जारी यह आँकड़ा वैश्विक वित्तीय बाज़ारों में भारतीय निवेशकों की बढ़ती सक्रियता को रेखांकित करता है।

मुख्य आँकड़े और रुझान

RBI के आँकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 में विदेशी इक्विटी और डेट निवेश कुल एलआरएस प्रेषण का 11.7 प्रतिशत रहा, जबकि एक वर्ष पहले यह हिस्सेदारी मात्र 5.8 प्रतिशत थी। यह अनुपात में दोगुनी से अधिक वृद्धि दर्शाता है — अर्थात् भारतीय न केवल अधिक पैसा विदेश भेज रहे हैं, बल्कि उसका एक बड़ा हिस्सा अब निवेश में जा रहा है।

हालाँकि मासिक आधार पर इस श्रेणी में 7 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्ज हुई। गौरतलब है कि जून 2026 में विदेशी इक्विटी और डेट निवेश 460 मिलियन डॉलर के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुँचा था।

कुल एलआरएस प्रेषण में समग्र वृद्धि

कुल एलआरएस प्रेषण अगस्त 2026 में बढ़कर 2.74 अरब डॉलर हो गया — अगस्त 2025 के 2.64 अरब डॉलर से 3.6 प्रतिशत अधिक और जुलाई 2026 के 2.58 अरब डॉलर की तुलना में लगभग 6 प्रतिशत ज़्यादा। वित्त वर्ष 2025-26 में एलआरएस के तहत कुल बाहरी प्रेषण 28.98 अरब डॉलर रहा।

यात्रा सबसे बड़ी श्रेणी, कारोबारी यात्रा में पाँच गुना उछाल

यात्रा अब भी एलआरएस के अंतर्गत सबसे बड़ा व्यय क्षेत्र बना हुआ है। अगस्त 2026 में विदेश यात्रा पर भारतीयों का खर्च 1.63 अरब डॉलर रहा — कुल प्रेषण का लगभग 59 प्रतिशत — जो पिछले वर्ष की तुलना में 1 प्रतिशत और जुलाई की तुलना में 11.4 प्रतिशत अधिक है।

विशेष रूप से कारोबारी यात्रा पर होने वाला खर्च जुलाई 2026 के 10.9 मिलियन डॉलर से उछलकर अगस्त 2026 में 51 मिलियन डॉलर पहुँच गया — यानी लगभग पाँच गुना की वृद्धि।

अन्य प्रमुख श्रेणियाँ

आँकड़ों के अनुसार, उपहार के रूप में भेजी गई राशि 215.72 मिलियन डॉलर रही, जबकि निकट संबंधियों के भरण-पोषण के लिए 275.43 मिलियन डॉलर भेजे गए। विदेशों में अचल संपत्ति खरीद के लिए 39.59 मिलियन डॉलर और विदेशी बैंकों में जमा के लिए 50.78 मिलियन डॉलर का प्रेषण दर्ज किया गया।

चिकित्सा उपचार के लिए विदेश भेजी गई राशि भी 21.3 प्रतिशत बढ़कर 4.84 मिलियन डॉलर पहुँच गई — जो बढ़ती वैश्विक चिकित्सा पर्यटन प्रवृत्ति का संकेत देती है।

व्यापक संदर्भ और आगे की दिशा

यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय शेयर बाज़ार भी उतार-चढ़ाव से गुज़र रहा है और वैश्विक बाज़ारों में विविधीकरण की माँग बढ़ रही है। एलआरएस में प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष 2,50,000 डॉलर की सीमा है। निवेश श्रेणी की हिस्सेदारी में तेज़ उछाल यह दर्शाता है कि भारतीय मध्यम और उच्च-मध्यम वर्ग वैश्विक पोर्टफोलियो बनाने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि क्या यह रुझान बना रहता है या जून 2026 के रिकॉर्ड के बाद से दिख रही मासिक अस्थिरता जारी रहती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उसे व्यापक वर्ग तक पहुँचा दिया है। हालाँकि यह भी ध्यान देने योग्य है कि जून 2026 के 460 मिलियन डॉलर के शिखर के बाद मासिक उतार-चढ़ाव बना हुआ है, जो दर्शाता है कि यह प्रवाह अभी स्थिर नहीं है। नीति-निर्माताओं के लिए असली सवाल यह है कि क्या यह पूँजी-बहिर्प्रवाह रुपये और घरेलू बाज़ार तरलता पर दीर्घकालिक दबाव बन सकता है।
RashtraPress
24 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एलआरएस क्या है और यह कैसे काम करता है?
उदारीकृत प्रेषण योजना (एलआरएस) भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा संचालित एक व्यवस्था है जिसके तहत कोई भी भारतीय निवासी प्रति वित्त वर्ष अधिकतम 2,50,000 डॉलर विदेश भेज सकता है। इस राशि का उपयोग विदेश यात्रा, शिक्षा, चिकित्सा, निवेश और निकट संबंधियों के भरण-पोषण जैसे उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।
अगस्त 2026 में एलआरएस के तहत विदेशी निवेश कितना बढ़ा?
RBI के अक्टूबर 2026 बुलेटिन के अनुसार, अगस्त 2026 में विदेशी इक्विटी और डेट बाज़ारों में भारतीयों का निवेश सालाना आधार पर 111 प्रतिशत बढ़कर 321.53 मिलियन डॉलर पहुँचा, जो अगस्त 2025 में 152.18 मिलियन डॉलर था। मासिक आधार पर हालाँकि 7 प्रतिशत की गिरावट भी दर्ज हुई।
एलआरएस के तहत अब तक का रिकॉर्ड निवेश कब और कितना था?
जून 2026 में विदेशी इक्विटी और डेट में निवेश 460 मिलियन डॉलर के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुँचा था। अगस्त 2026 का 321.53 मिलियन डॉलर उस शिखर से कम है, लेकिन सालाना आधार पर वृद्धि दर अभी भी 111 प्रतिशत की है।
एलआरएस के तहत भारतीय सबसे ज़्यादा किस पर खर्च करते हैं?
यात्रा अब भी एलआरएस के तहत सबसे बड़ी श्रेणी है। अगस्त 2026 में विदेश यात्रा पर 1.63 अरब डॉलर खर्च हुए, जो कुल प्रेषण का लगभग 59 प्रतिशत था। निकट संबंधियों के भरण-पोषण पर 275.43 मिलियन डॉलर और उपहार भेजने पर 215.72 मिलियन डॉलर खर्च किए गए।
विदेशी निवेश में इस वृद्धि का भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या असर हो सकता है?
विदेशी बाज़ारों में बढ़ते निवेश से पूँजी-बहिर्प्रवाह में वृद्धि होती है, जो दीर्घकाल में रुपये की विनिमय दर और घरेलू बाज़ार की तरलता को प्रभावित कर सकता है। हालाँकि वित्त वर्ष 2025-26 में कुल एलआरएस प्रेषण 28.98 अरब डॉलर रहा, जो अभी भी RBI की निर्धारित सीमाओं के भीतर है।
राष्ट्र प्रेस
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