भारत-इजरायल ऊर्जा सहयोग: सोलर-विंड तकनीक से आयातित ईंधन निर्भरता घटाना संभव — डॉ. अमित मोर
सारांश
मुख्य बातें
इजरायली इको एनर्जी फाइनेंशियल एंड स्ट्रेटेजिक कंसल्टिंग लिमिटेड के सीईओ डॉ. अमित मोर ने कहा है कि इजरायल, रिसर्च एवं डेवलपमेंट और नवीकरणीय ऊर्जा — सोलर, विंड, जियोथर्मल तथा हाइड्रोपावर — में सहयोग के ज़रिए भारत के ऊर्जा मिश्रण को विविध बनाने और आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उनके अनुसार, यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों को मज़बूत करेगा।
डॉ. मोर का मुख्य बयान
डॉ. अमित मोर ने कहा, 'मेरा मानना है कि रिसर्च और डेवलपमेंट में सहयोग, साथ ही सौर, पवन, भूतापीय और जलविद्युत जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के विस्तार से भारत के ऊर्जा मिश्रण में विविधता लाई जा सकती है और बिजली उत्पादन के लिए आयातित गैस तथा परिवहन के लिए आयातित तेल पर निर्भरता कम की जा सकती है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि इससे भारत का लचीलापन, ऊर्जा स्वतंत्रता और ऊर्जा सुरक्षा बढ़ेगी, जो राष्ट्रीय सुरक्षा का एक अहम घटक है।
एग्री-वोल्टेइक तकनीक: खेत भी, बिजली भी
डॉ. मोर ने इजरायल में विकसित एग्री-वोल्टेइक तकनीक को एक ठोस उदाहरण के रूप में पेश किया। इस तकनीक में खेतों और पौधों को सोलर पैनलों से ढककर एक साथ सौर ऊर्जा उत्पादन और फसल की पैदावार बढ़ाने का लक्ष्य रखा जाता है। उनके अनुसार यह 'सबके लिए फायदेमंद स्थिति' है — ऊर्जा सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा दोनों एक साथ।
भारत-इजरायल संबंध: छह मूल्यों की नींव
भारत में इजरायल के राजदूत रियूवेन अजार ने हाल ही में दोनों देशों के बीच के संबंधों को 'खास और अनोखा' बताते हुए कहा था कि यह साझेदारी छह मुख्य मूल्यों पर टिकी है — सभ्यतागत लचीलापन, आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई, लोकतांत्रिक मूल्य, इनोवेशन, धार्मिक सहनशीलता और समावेशी विकास।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए एक वीडियो संदेश में अजार ने कहा, 'इजरायल और भारत के बीच का संबंध बहुत खास और अनोखा है। जब मैंने इसके बारे में सोचा, तो मैं इस नतीजे पर पहुँचा कि हमारे इतने शानदार संबंध का कारण यही छह मुख्य मूल्य हैं।'
आम जनता और अर्थव्यवस्था पर असर
गौरतलब है कि भारत अपनी कच्चे तेल की ज़रूरत का 85% से अधिक आयात करता है, जो विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी दबाव डालता है। यदि इजरायली तकनीक के सहयोग से नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में विस्तार होता है, तो न केवल आयात बिल घटेगा बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।
आगे की राह
डॉ. मोर के बयान ऐसे समय में आए हैं जब भारत और इजरायल के बीच द्विपक्षीय सहयोग कई मोर्चों पर गहरा हो रहा है। ऊर्जा क्षेत्र में साझेदारी को औपचारिक रूप देने के लिए दोनों देशों के बीच नीतिगत संवाद जारी है, और विशेषज्ञों का मानना है कि एग्री-वोल्टेइक जैसी तकनीकों का भारत के कृषि-प्रधान राज्यों में व्यापक अनुप्रयोग संभव है।