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भारत-इजरायल ऊर्जा सहयोग: सोलर-विंड तकनीक से आयातित ईंधन निर्भरता घटाना संभव — डॉ. अमित मोर

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भारत-इजरायल ऊर्जा सहयोग: सोलर-विंड तकनीक से आयातित ईंधन निर्भरता घटाना संभव — डॉ. अमित मोर

सारांश

इजरायली ऊर्जा विशेषज्ञ डॉ. अमित मोर का कहना है कि सोलर, विंड, जियोथर्मल और हाइड्रोपावर में R&D सहयोग से भारत आयातित तेल-गैस पर अपनी निर्भरता घटा सकता है। एग्री-वोल्टेइक जैसी इजरायली तकनीक ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा एक साथ देने में सक्षम है।

मुख्य बातें

अमित मोर ( इजरायली इको एनर्जी के CEO) ने कहा कि इजरायल, R&D और नवीकरणीय ऊर्जा सहयोग से भारत की आयातित ईंधन निर्भरता घटा सकता है।
सोलर, विंड, जियोथर्मल और हाइड्रोपावर को भारत के ऊर्जा मिश्रण में विविधता लाने के प्रमुख साधन बताया गया।
इजरायल की एग्री-वोल्टेइक तकनीक एक साथ सौर ऊर्जा उत्पादन और फसल पैदावार बढ़ाने में सक्षम है।
इजरायल के राजदूत रियूवेन अजार ने भारत-इजरायल साझेदारी को छह मूल्यों — लोकतंत्र, इनोवेशन, आतंकवाद-विरोध, धार्मिक सहनशीलता, सभ्यतागत लचीलापन और समावेशी विकास — पर आधारित बताया।
भारत अपनी कच्चे तेल की ज़रूरत का 85% से अधिक आयात करता है, जो ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती है।

इजरायली इको एनर्जी फाइनेंशियल एंड स्ट्रेटेजिक कंसल्टिंग लिमिटेड के सीईओ डॉ. अमित मोर ने कहा है कि इजरायल, रिसर्च एवं डेवलपमेंट और नवीकरणीय ऊर्जा — सोलर, विंड, जियोथर्मल तथा हाइड्रोपावर — में सहयोग के ज़रिए भारत के ऊर्जा मिश्रण को विविध बनाने और आयातित ईंधन पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उनके अनुसार, यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों को मज़बूत करेगा।

डॉ. मोर का मुख्य बयान

डॉ. अमित मोर ने कहा, 'मेरा मानना है कि रिसर्च और डेवलपमेंट में सहयोग, साथ ही सौर, पवन, भूतापीय और जलविद्युत जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के विस्तार से भारत के ऊर्जा मिश्रण में विविधता लाई जा सकती है और बिजली उत्पादन के लिए आयातित गैस तथा परिवहन के लिए आयातित तेल पर निर्भरता कम की जा सकती है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि इससे भारत का लचीलापन, ऊर्जा स्वतंत्रता और ऊर्जा सुरक्षा बढ़ेगी, जो राष्ट्रीय सुरक्षा का एक अहम घटक है।

एग्री-वोल्टेइक तकनीक: खेत भी, बिजली भी

डॉ. मोर ने इजरायल में विकसित एग्री-वोल्टेइक तकनीक को एक ठोस उदाहरण के रूप में पेश किया। इस तकनीक में खेतों और पौधों को सोलर पैनलों से ढककर एक साथ सौर ऊर्जा उत्पादन और फसल की पैदावार बढ़ाने का लक्ष्य रखा जाता है। उनके अनुसार यह 'सबके लिए फायदेमंद स्थिति' है — ऊर्जा सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा दोनों एक साथ।

भारत-इजरायल संबंध: छह मूल्यों की नींव

भारत में इजरायल के राजदूत रियूवेन अजार ने हाल ही में दोनों देशों के बीच के संबंधों को 'खास और अनोखा' बताते हुए कहा था कि यह साझेदारी छह मुख्य मूल्यों पर टिकी है — सभ्यतागत लचीलापन, आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई, लोकतांत्रिक मूल्य, इनोवेशन, धार्मिक सहनशीलता और समावेशी विकास।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए एक वीडियो संदेश में अजार ने कहा, 'इजरायल और भारत के बीच का संबंध बहुत खास और अनोखा है। जब मैंने इसके बारे में सोचा, तो मैं इस नतीजे पर पहुँचा कि हमारे इतने शानदार संबंध का कारण यही छह मुख्य मूल्य हैं।'

आम जनता और अर्थव्यवस्था पर असर

गौरतलब है कि भारत अपनी कच्चे तेल की ज़रूरत का 85% से अधिक आयात करता है, जो विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी दबाव डालता है। यदि इजरायली तकनीक के सहयोग से नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में विस्तार होता है, तो न केवल आयात बिल घटेगा बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।

आगे की राह

डॉ. मोर के बयान ऐसे समय में आए हैं जब भारत और इजरायल के बीच द्विपक्षीय सहयोग कई मोर्चों पर गहरा हो रहा है। ऊर्जा क्षेत्र में साझेदारी को औपचारिक रूप देने के लिए दोनों देशों के बीच नीतिगत संवाद जारी है, और विशेषज्ञों का मानना है कि एग्री-वोल्टेइक जैसी तकनीकों का भारत के कृषि-प्रधान राज्यों में व्यापक अनुप्रयोग संभव है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि भारत-इजरायल ऊर्जा सहयोग अब तक घोषणाओं से आगे क्यों नहीं बढ़ पाया। एग्री-वोल्टेइक तकनीक का भारत में पायलट स्तर पर प्रयोग हुआ है, पर बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए ज़मीन अधिग्रहण, किसानों की सहमति और ग्रिड एकीकरण की जटिलताएँ अभी भी अनसुलझी हैं। राजदूत अजार के 'छह मूल्यों' वाले कूटनीतिक बयान के बावजूद, ऊर्जा क्षेत्र में कोई बाध्यकारी द्विपक्षीय समझौता सार्वजनिक नहीं हुआ है। बिना ठोस नीतिगत ढाँचे और निवेश प्रतिबद्धता के, यह संवाद महज़ कूटनीतिक सद्भावना तक सीमित रह सकता है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डॉ. अमित मोर कौन हैं और उनका भारत से क्या संबंध है?
डॉ. अमित मोर इजरायली इको एनर्जी फाइनेंशियल एंड स्ट्रेटेजिक कंसल्टिंग लिमिटेड के सीईओ हैं। वे ऊर्जा नीति और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में इजरायल-भारत सहयोग के पक्षधर विशेषज्ञ हैं और भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर सक्रिय रूप से विचार साझा करते रहे हैं।
इजरायल की एग्री-वोल्टेइक तकनीक क्या है?
एग्री-वोल्टेइक तकनीक में खेतों और पौधों के ऊपर सोलर पैनल लगाकर एक साथ सौर ऊर्जा उत्पादन और कृषि उत्पादन किया जाता है। इजरायल में विकसित यह तकनीक सौर विकिरण का अधिकतम उपयोग करते हुए फसल पैदावार भी बढ़ाती है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा दोनों साधे जा सकते हैं।
भारत आयातित ईंधन पर कितना निर्भर है?
भारत अपनी कच्चे तेल की ज़रूरत का 85% से अधिक आयात करता है, जो विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी बोझ डालता है। नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार से इस निर्भरता को धीरे-धीरे कम किया जा सकता है।
भारत-इजरायल संबंध किन मूल्यों पर आधारित हैं?
इजरायल के राजदूत रियूवेन अजार के अनुसार, दोनों देशों की साझेदारी छह मूल्यों पर आधारित है — सभ्यतागत लचीलापन, आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई, लोकतांत्रिक मूल्य, इनोवेशन, धार्मिक सहनशीलता और समावेशी विकास।
इजरायल-भारत ऊर्जा सहयोग से भारत को क्या फायदा होगा?
डॉ. मोर के अनुसार, इस सहयोग से भारत का ऊर्जा मिश्रण विविध होगा, आयातित गैस और तेल पर निर्भरता घटेगी, और देश की ऊर्जा स्वतंत्रता एवं राष्ट्रीय सुरक्षा मज़बूत होगी। दीर्घकालिक रूप से यह भारत के विदेशी मुद्रा व्यय को भी कम कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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