27 जून 2026
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ईरान से तेल आयात फिर शुरू होगा, पूर्व राजदूत जेके त्रिपाठी बोले — भारत की ऊर्जा निर्भरता घटेगी

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ईरान से तेल आयात फिर शुरू होगा, पूर्व राजदूत जेके त्रिपाठी बोले — भारत की ऊर्जा निर्भरता घटेगी

सारांश

ईरान पर प्रतिबंध हटने के बाद भारत की ऊर्जा रणनीति नई करवट ले रही है। पूर्व राजदूत जेके त्रिपाठी के अनुसार, ईरान और नाइजीरिया से सस्ते तेल का आयात और अंडमान में संभावित विशाल तेल भंडार मिलकर भारत की विदेशी ऊर्जा निर्भरता को उल्लेखनीय रूप से घटा सकते हैं।

मुख्य बातें

पूर्व राजदूत जेके त्रिपाठी ने 27 जून 2026 को कहा कि भारत जल्द ईरान और नाइजीरिया से सस्ता कच्चा तेल आयात शुरू करेगा।
ईरान पर से प्रतिबंध हटने के बाद ईरानी तेल भारत के लिए किफायती विकल्प बन गया है।
वेनेजुएला का तेल 25-30 एपीआई डिग्री से कम घनत्व वाला भारी तेल है, जिसे रिफाइन करने में अधिक लागत आती है।
अंडमान की खाड़ी में कथित तौर पर लगभग 2 लाख करोड़ बैरल के नए तेल भंडार की सरकारी घोषणा हुई है।
इन कदमों से भारत की विदेशी ऊर्जा निर्भरता धीरे-धीरे कम होने की उम्मीद है।

भारत जल्द ही ईरान और नाइजीरिया से सस्ते कच्चे तेल का आयात फिर शुरू कर सकता है — यह बात पूर्व राजदूत जेके त्रिपाठी ने 27 जून 2026 को नई दिल्ली में कही। बदलते वैश्विक समीकरणों और ईरान पर से प्रतिबंध हटने के बाद भारत की ऊर्जा रणनीति में विविधता लाने की कोशिशें तेज़ हो गई हैं।

वेनेजुएला के तेल की सीमाएँ

त्रिपाठी ने बताया कि फिलहाल वेनेजुएला से आने वाला कच्चा तेल जामनगर रिफाइनरी और कुछ नायरा रिफाइनरियों में प्रसंस्कृत हो रहा है। समस्या यह है कि वेनेजुएला का तेल 'भारी' किस्म का होता है — इसकी घनत्व (डेंसिटी) 25-30 एपीआई डिग्री से भी कम है। इसे रिफाइन करने में सक्षम रिफाइनरियाँ मुख्यतः पश्चिमी तट पर हैं और उनकी संख्या दो-तीन तक सीमित है। अन्य रिफाइनरियाँ इस तेल को प्रोसेस कर सकती हैं, लेकिन इसमें काफी अधिक लागत आती है।

ईरान और नाइजीरिया से आयात की राह

त्रिपाठी के अनुसार, ईरान पर से प्रतिबंध हट जाने के बाद ईरानी कच्चा तेल भारत के लिए एक किफायती विकल्प बन गया है। इसी तरह नाइजीरियाई तेल भी तुलनात्मक रूप से सस्ता है। उन्होंने कहा कि भारत अब वेनेजुएला के साथ-साथ इन दोनों देशों से भी तेल खरीदना शुरू करेगा, जिससे आयात स्रोतों में विविधता आएगी और मूल्य-दबाव कम होगा।

अंडमान में नए तेल भंडार की संभावना

त्रिपाठी ने घरेलू ऊर्जा उत्पादन पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने घोषणा की है कि अंडमान की खाड़ी में एक नए तेल भंडार का पता चला है। कथित तौर पर इस भंडार में लगभग 2 लाख करोड़ बैरल तेल होने की संभावना है — यदि यह अनुमान सही साबित होता है, तो यह भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।

ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बदलाव

पूर्व राजदूत ने कहा कि इन सभी कदमों से भारत की विदेशी ऊर्जा निर्भरता धीरे-धीरे कम होगी। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब भारत-अमेरिका संबंध नए वैश्विक दबावों से गुज़र रहे हैं और ऊर्जा सुरक्षा एक रणनीतिक प्राथमिकता बन चुकी है। गौरतलब है कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का आयातक है और आयात स्रोतों में विविधता उसकी दीर्घकालिक ऊर्जा नीति की धुरी रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें जोखिम भी हैं — अमेरिका के साथ संबंधों की नाज़ुकता को देखते हुए यह कदम सावधानी माँगता है। अंडमान में '2 लाख करोड़ बैरल' का अनुमान अभी प्रारंभिक है और इसे स्वतंत्र भूवैज्ञानिक सत्यापन की दरकार है — ऐसे आँकड़े अक्सर शुरुआती अन्वेषण में बढ़े-चढ़े होते हैं। असली परीक्षा यह है कि भारत ईरानी तेल की भू-राजनीतिक संवेदनशीलता को संभालते हुए अपनी ऊर्जा विविधता की रणनीति को कितनी तेज़ी से व्यावहारिक धरातल पर उतार पाता है।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत ईरान से तेल आयात क्यों फिर शुरू करना चाहता है?
ईरान पर से अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हटने के बाद ईरानी कच्चा तेल भारत के लिए एक सस्ता और सुलभ विकल्प बन गया है। पूर्व राजदूत जेके त्रिपाठी के अनुसार, यह कदम भारत की आयात लागत घटाने और स्रोतों में विविधता लाने की रणनीति का हिस्सा है।
वेनेजुएला के तेल में क्या समस्या है?
वेनेजुएला का कच्चा तेल 'भारी' किस्म का होता है जिसकी घनत्व 25-30 एपीआई डिग्री से भी कम है। इसे रिफाइन करने में सक्षम रिफाइनरियाँ भारत में केवल दो-तीन हैं, जो पश्चिमी तट पर स्थित हैं, और अन्य रिफाइनरियों में इसे प्रोसेस करना बहुत महँगा पड़ता है।
अंडमान में मिले नए तेल भंडार से भारत को क्या फायदा होगा?
भारत सरकार ने घोषणा की है कि अंडमान की खाड़ी में कथित तौर पर लगभग 2 लाख करोड़ बैरल के तेल भंडार का पता चला है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है, तो यह भारत की घरेलू ऊर्जा उत्पादन क्षमता को बड़ा बढ़ावा देगा और विदेशी निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आएगी।
भारत की ऊर्जा विविधता रणनीति में नाइजीरिया की क्या भूमिका है?
नाइजीरियाई कच्चा तेल अपेक्षाकृत सस्ता है और भारतीय रिफाइनरियों के अनुकूल माना जाता है। पूर्व राजदूत त्रिपाठी के अनुसार, भारत वेनेजुएला के साथ-साथ नाइजीरिया से भी तेल खरीदना शुरू करेगा, जिससे किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता कम होगी।
भारत-अमेरिका संबंधों का भारत की ऊर्जा नीति पर क्या असर है?
बदलते वैश्विक समीकरणों में भारत-अमेरिका संबंध ऊर्जा नीति को प्रभावित करते हैं, खासकर ईरान जैसे देशों से तेल खरीद के मामले में। भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखते हुए आयात स्रोतों में विविधता लाने की कोशिश कर रहा है, ताकि ऊर्जा सुरक्षा किसी एकल कूटनीतिक संबंध पर निर्भर न रहे।
राष्ट्र प्रेस
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