25 जुलाई 2026
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महानदी ऑफशोर बेसिन में पहले डीपवॉटर अप्रेजल वेल की ड्रिलिंग शुरू, हरदीप पुरी बोले — ऊर्जा आत्मनिर्भरता का नया अध्याय

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महानदी ऑफशोर बेसिन में पहले डीपवॉटर अप्रेजल वेल की ड्रिलिंग शुरू, हरदीप पुरी बोले — ऊर्जा आत्मनिर्भरता का नया अध्याय

सारांश

महानदी ऑफशोर बेसिन में पहले डीपवॉटर अप्रेजल वेल की ड्रिलिंग शुरू होना महज एक तकनीकी कदम नहीं — यह दशकभर के नीतिगत सुधारों की परीक्षा है। 172 ब्लॉक, 4.3 अरब डॉलर के निवेश और 81% एकरेज आवंटन के साथ भारत अपनी ऊर्जा आयात निर्भरता तोड़ने की सबसे बड़ी कोशिश कर रहा है।

मुख्य बातें

25 जुलाई 2026 को महानदी ऑफशोर बेसिन में पहले अप्रेजल वेल 'एमएन-डीडब्ल्यूएन18-1-एचडी' की ड्रिलिंग शुरू हुई।
यह चार प्रस्तावित डीपवॉटर वेल में से पहला है; शेष तीन का आकलन क्रमशः किया जाएगा।
OALP के तहत 172 एक्सप्लोरेशन ब्लॉक , 3.8 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में आवंटित; 4.3 अरब डॉलर से अधिक निवेश प्रतिबद्ध।
वित्त वर्ष 2025-26 में 674 वेल की ड्रिलिंग, 5 नई खोजें और 7 खोजों का व्यावसायिक दोहन।
2014 के बाद कुल सक्रिय एक्सप्लोरेशन एकरेज का 81% आवंटित; 99% 'नो-गो' ऑफशोर क्षेत्र अन्वेषण के लिए खोले गए।

केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 25 जुलाई 2026 को घोषणा की कि महानदी अपतटीय (ऑफशोर) बेसिन में पहले अप्रेजल वेल की ड्रिलिंग आधिकारिक रूप से शुरू हो गई है — जिसे उन्होंने भारत की ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में 'एक नए अध्याय की शुरुआत' बताया। यह ड्रिलिंग देश के सबसे संभावनाशील अपतटीय बेसिनों में से एक में नए हाइड्रोकार्बन संसाधनों की खोज की कोशिश का हिस्सा है।

मुख्य घटनाक्रम

महानदी ऑफशोर बेसिन में शुरू किया गया 'एमएन-डीडब्ल्यूएन18-1-एचडी' अप्रेजल वेल, चार प्रस्तावित डीपवॉटर वेल में से पहला है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, इस ड्रिलिंग कार्यक्रम में विश्वस्तरीय डीपवॉटर ड्रिलिंग तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिससे घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने और आयात पर निर्भरता घटाने में सहायता मिलेगी। इन चारों कुओं के ज़रिए इस बेसिन का चरणबद्ध तरीके से आकलन किया जाएगा।

सरकार की प्रतिक्रिया और मंत्री का बयान

मंत्री हरदीप पुरी ने कहा, "आज जब हम इस पहले वेल की ड्रिलिंग शुरू कर रहे हैं, तो हम केवल समुद्र की तलहटी में ड्रिलिंग नहीं कर रहे, बल्कि भारत की भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा की नींव मजबूत कर रहे हैं। ड्रिलिंग का हर मीटर हमें आयात पर निर्भरता कम करने, आत्मनिर्भरता बढ़ाने और विकसित भारत के विजन को साकार करने के और करीब ले जाएगा।" उन्होंने ओएनजीसी, ऑयल इंडिया लिमिटेड, डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हाइड्रोकार्बन्स और तकनीकी साझेदारों को बधाई दी।

एक दशक के सुधारों का परिणाम

पुरी के अनुसार, यह ड्रिलिंग पिछले दस वर्षों में किए गए दूरदर्शी नीतिगत और नियामकीय सुधारों का प्रत्यक्ष परिणाम है। प्रमुख सुधारों में हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन एंड लाइसेंसिंग पॉलिसी (HELP) की शुरुआत, नामांकन-आधारित व्यवस्था की जगह ओपन एकरेज लाइसेंसिंग प्रोग्राम (OALP) लागू करना, पारदर्शी रेवेन्यू शेयरिंग व्यवस्था अपनाना और पहले प्रतिबंधित रहे लगभग 99 प्रतिशत ऑफशोर 'नो-गो' क्षेत्रों को एक्सप्लोरेशन के लिए खोलना शामिल हैं। मंत्रालय के अनुसार, 2014 के बाद भारत के कुल सक्रिय एक्सप्लोरेशन एकरेज का लगभग 81 प्रतिशत आवंटित किया जा चुका है।

निवेश और उपलब्धियाँ

OALP के तहत अब तक लगभग 3.8 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले 172 एक्सप्लोरेशन ब्लॉक आवंटित किए जा चुके हैं, जिनमें 4.3 अरब डॉलर से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धता प्राप्त हुई है। केवल वित्त वर्ष 2025-26 में ही लगभग 674 वेल की ड्रिलिंग की गई, 5 नई खोजें हुईं और 7 खोजों का व्यावसायिक दोहन शुरू किया गया।

आगे की राह

गौरतलब है कि महानदी ऑफशोर बेसिन को भारत के सर्वाधिक संभावनाशील अन्वेषण क्षेत्रों में गिना जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी ऊर्जा आयात निर्भरता घटाने और 'विकसित भारत' के लक्ष्य के तहत घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर ज़ोर दे रहा है। शेष तीन डीपवॉटर वेल की ड्रिलिंग भी क्रमशः आगे बढ़ने की उम्मीद है, जो देश के ऑफशोर एक्सप्लोरेशन परिदृश्य को नया आयाम दे सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह खोज व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य साबित होगी। भारत का ऑफशोर एक्सप्लोरेशन इतिहास बताता है कि बड़े ऐलान और वास्तविक उत्पादन के बीच की खाई अक्सर गहरी रही है — कृष्णा-गोदावरी बेसिन इसका सबसे ताज़ा उदाहरण है। 4.3 अरब डॉलर की निवेश प्रतिबद्धता और 172 ब्लॉक आवंटन प्रभावशाली आँकड़े हैं, पर घरेलू कच्चे तेल का उत्पादन पिछले कई वर्षों से स्थिर या गिरावट पर है। जब तक ड्रिलिंग के नतीजे सामने न आएँ और व्यावसायिक दोहन की समयसीमा स्पष्ट न हो, तब तक इसे ऊर्जा आत्मनिर्भरता की 'नींव' कहना समयपूर्व होगा।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महानदी ऑफशोर बेसिन में शुरू हुई ड्रिलिंग क्या है?
यह महानदी अपतटीय बेसिन में चार प्रस्तावित डीपवॉटर वेल में से पहले अप्रेजल वेल 'एमएन-डीडब्ल्यूएन18-1-एचडी' की ड्रिलिंग है, जो 25 जुलाई 2026 को शुरू हुई। इसका उद्देश्य इस बेसिन में मौजूद संभावित हाइड्रोकार्बन संसाधनों का आकलन करना और भारत की घरेलू ऊर्जा उत्पादन क्षमता बढ़ाना है।
अप्रेजल वेल और एक्सप्लोरेशन वेल में क्या फर्क है?
एक्सप्लोरेशन वेल किसी नए क्षेत्र में हाइड्रोकार्बन की प्रारंभिक खोज के लिए ड्रिल किया जाता है, जबकि अप्रेजल वेल पहले से पहचाने गए भंडार की सीमा, मात्रा और व्यावसायिक व्यवहार्यता का मूल्यांकन करता है। महानदी बेसिन में यह अप्रेजल वेल पहले की खोजों के आधार पर संसाधनों का विस्तृत आकलन करेगा।
OALP क्या है और इसने एक्सप्लोरेशन को कैसे बदला?
ओपन एकरेज लाइसेंसिंग प्रोग्राम (OALP) पुरानी नामांकन-आधारित व्यवस्था की जगह लाई गई पारदर्शी नीति है, जिसके तहत कंपनियाँ अपनी पसंद के ब्लॉक के लिए सीधे आवेदन कर सकती हैं। इसके तहत अब तक 172 ब्लॉक , 3.8 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में आवंटित किए गए हैं और 4.3 अरब डॉलर से अधिक का निवेश आकर्षित हुआ है।
इस ड्रिलिंग से भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर क्या असर होगा?
यदि महानदी बेसिन में व्यावसायिक रूप से दोहन योग्य हाइड्रोकार्बन भंडार मिलते हैं, तो इससे भारत की कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के आयात पर निर्भरता कम हो सकती है। हालाँकि, अप्रेजल से उत्पादन तक का सफर कई वर्षों का होता है, इसलिए तत्काल प्रभाव सीमित रहेगा।
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के एक्सप्लोरेशन क्षेत्र का प्रदर्शन कैसा रहा?
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में 674 वेल की ड्रिलिंग हुई, 5 नई खोजें हुईं और 7 खोजों का व्यावसायिक दोहन शुरू किया गया। यह आँकड़े पिछले कुछ वर्षों की तुलना में एक्सप्लोरेशन गतिविधियों में उल्लेखनीय तेज़ी का संकेत देते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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