सेंसेक्स 1,124 अंक धराशायी, निफ्टी 22,780 पर बंद; ट्रम्प-ईरान तनाव और कच्चे तेल की मार
सारांश
मुख्य बातें
बीएसई सेंसेक्स सोमवार, 28 सितंबर को 1,124.02 अंक यानी 1.52 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ 72,771.72 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी50 360.25 अंक यानी 1.56 प्रतिशत लुढ़ककर 22,780.25 पर आ गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान के शांति प्रस्ताव को ठुकराने और ब्रेंट क्रूड के $106.6 प्रति बैरल तक पहुँचने के बाद वैश्विक बाज़ारों में घबराहट फैल गई, जिसका सबसे तीखा असर भारतीय शेयर बाज़ार पर पड़ा।
कारोबार का पूरा हाल
दिन की शुरुआत में सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर 73,895.74 से 160.91 अंक गिरकर 73,734.83 पर खुला। कारोबार के दौरान एक समय यह 1,179.51 अंक टूटकर 72,716.23 के दिन के निचले स्तर तक पहुँच गया। निफ्टी50 ने भी अपने पिछले बंद 23,140.50 से 0.32 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,064.90 पर कारोबार शुरू किया और इंट्राडे में 22,762.20 के निचले स्तर को छुआ।
व्यापक बाज़ार में भी दबाव स्पष्ट था। निफ्टी मिडकैप 100 1.63 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 1.85 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए, जो यह दर्शाता है कि बिकवाली सिर्फ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं थी।
सेक्टरवार प्रदर्शन
सेक्टरों में निफ्टी पीएसयू बैंक सबसे अधिक प्रभावित रहा। निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी बैंक का प्रदर्शन भी निराशाजनक रहा। इसके विपरीत, निफ्टी आईटी सेगमेंट ने अपेक्षाकृत कम गिरावट दर्ज कर बेहतर प्रतिरोध दिखाया।
निफ्टी50 के घटकों में डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, इंफोसिस और एचडीएफसी लाइफ को छोड़कर लगभग सभी शेयर लाल निशान में बंद हुए। सबसे अधिक गिरावट टीएमपीवी, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज, पावरग्रिड और एलएंडटी के शेयरों में दर्ज की गई।
बाज़ार पूंजीकरण पर असर
बीएसई में सूचीबद्ध सभी कंपनियों का कुल बाज़ार पूंजीकरण शुक्रवार के करीब ₹482 लाख करोड़ से घटकर ₹474 लाख करोड़ रह गया — यानी एक ही दिन में निवेशकों की संपत्ति में करीब ₹8 लाख करोड़ की कमी आई। यह राशि कई छोटे देशों की वार्षिक GDP से भी अधिक है।
वैश्विक कारण: ट्रम्प-ईरान गतिरोध
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और युद्धविराम के ईरान के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। ईरान ने इसके जवाब में कहा कि केवल कूटनीति ही अमेरिका और इज़राइल के साथ चल रहे संघर्ष का समाधान कर सकती है। इस गतिरोध के चलते आपूर्ति संबंधी चिंताएँ गहरी हो गईं और ब्रेंट क्रूड वायदा 2.2 प्रतिशत उछलकर $106.6 प्रति बैरल पर जा पहुँचा, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड 1.45 प्रतिशत बढ़कर $93.76 प्रति बैरल हो गया।
गौरतलब है कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है, इसलिए कच्चे तेल की ऊँची कीमतें देश में मुद्रास्फीति और चालू खाता घाटे को और बढ़ा सकती हैं। एशियाई बाज़ारों में भी दबाव रहा — दक्षिण कोरिया का सूचकांक 2 प्रतिशत और जापान का निक्केई 0.10 प्रतिशत गिरा, जबकि चीनी बाज़ार 1 प्रतिशत से अधिक नीचे रहे।
आगे क्या देखें
तेल की ऊँची कीमतों और बढ़ती मुद्रास्फीति की आशंकाओं के बीच वैश्विक बॉन्ड बाज़ारों में भी बिकवाली देखी गई, जिसने इक्विटी पर दबाव और बढ़ाया। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) पहले से ही मुद्रास्फीति और विकास के बीच संतुलन बनाने की चुनौती का सामना कर रहा है। पश्चिम एशिया में तनाव कम न हुआ तो इस सप्ताह बाज़ार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।