सेंसेक्स 1,456 अंक टूटा, 74,559 पर बंद; ईरान-अमेरिका तनाव से निवेशकों को ₹11.2 लाख करोड़ का नुकसान
सारांश
मुख्य बातें
बीएसई सेंसेक्स मंगलवार, 12 मई को 1,456.04 अंक यानी 1.92 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ 74,559.24 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी50 436.30 अंक (1.83 प्रतिशत) गिरकर 23,379.55 पर आ गया। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर तीखे बयान के बाद नकारात्मक वैश्विक संकेतों ने लगातार दूसरे कारोबारी दिन भारतीय बाजार को बुरी तरह झकझोर दिया।
मुख्य घटनाक्रम
सेंसेक्स दिन की शुरुआत 75,688.39 पर खुलकर गिरते-गिरते 74,449.50 के दिन के निचले स्तर तक पहुँच गया। इसी तरह निफ्टी50 23,722.60 पर खुलकर दिन के दौरान 23,348.40 तक लुढ़क गया। व्यापक बाजारों में नुकसान और भी गहरा रहा — निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 3.17 प्रतिशत और निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 2.54 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
सेक्टरवार असर
निफ्टी आईटी और निफ्टी रियल्टी सबसे बुरी तरह प्रभावित रहे, जिनमें 3 से 4 प्रतिशत तक की गिरावट आई। निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और निफ्टी मीडिया में भी 2 प्रतिशत से अधिक की कमजोरी देखी गई। दूसरी तरफ, निफ्टी मेटल और निफ्टी ऑयल एंड गैस अन्य सेक्टरों की तुलना में अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में रहे।
निफ्टी50 पैक में केवल 4 शेयर हरे निशान में बंद हुए — ओएनजीसी सबसे आगे रहा जिसमें 4.70 प्रतिशत की बढ़त रही, इसके बाद हिंडाल्को (1.86 प्रतिशत), एसबीआई (0.26 प्रतिशत) और भारती एयरटेल (0.17 प्रतिशत) का स्थान रहा। टॉप लूजर्स में श्रीराम फाइनेंस, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज, टीसीएस और टाइटन शामिल रहे, जिनमें 3 से 4 प्रतिशत तक की गिरावट आई।
निवेशकों को भारी नुकसान
बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण पिछले सत्र के ₹467.5 लाख करोड़ से घटकर ₹456.3 लाख करोड़ रह गया। इस प्रकार एक ही कारोबारी सत्र में निवेशकों की संपत्ति में करीब ₹11.2 लाख करोड़ की भारी कमी आई।
गिरावट की वजह
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस गिरावट की मुख्य वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह बयान रहा जिसमें उन्होंने कहा कि ईरान के साथ करीब एक महीने से चल रहा युद्धविराम 'बहुत नाजुक स्थिति' में है, क्योंकि ईरान ने एक 'अस्वीकार्य' प्रस्ताव पेश किया है। रिपोर्टों के अनुसार, युद्धविराम की स्थिति अभी भी कमजोर बनी हुई है, जिससे निवेशकों के बीच जोखिम से बचने की प्रवृत्ति हावी हो गई और बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ गया। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाजार पहले से ही अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऊँची तेल कीमतें और डॉलर की मजबूती आने वाले समय में वैश्विक महंगाई को और बढ़ा सकती हैं, जो उभरते बाजारों के लिए अतिरिक्त दबाव का कारण बन सकती है।
आगे की राह
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले दिनों में बाजार की दिशा मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिका-ईरान तनाव और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) के रुख पर निर्भर करेगी। यदि वैश्विक तनाव में कमी आती है और तेल की कीमतें नरम पड़ती हैं, तो भारतीय बाजार में फिर से तेजी लौट सकती है।