ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: PM मोदी ने 10 सुधारों का रोडमैप प्रस्तावित किया, ग्लोबल साउथ को निर्णय केंद्रों में हिस्सेदारी की माँग
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के 'समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत करना' विषयक सत्र में 10 वैश्विक शासन सुधारों का एक ठोस रोडमैप तैयार करने का प्रस्ताव रखा। उनका मुख्य आग्रह यह था कि ग्लोबल साउथ के देशों को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में वह भूमिका मिले, जो वर्तमान में उन्हें नहीं मिल पाई है।
वैश्विक व्यवस्था में असंतुलन का मुद्दा
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मौजूदा वैश्विक शासन व्यवस्था एक 'पिरामिड' की तरह है, जिसमें शक्ति और निर्णय लेने की क्षमता शीर्ष पर सिमटी हुई है। उन्होंने कहा, "वर्तमान वैश्विक शासन व्यवस्था एक पिरामिड जैसी है, जिसमें शक्ति और निर्णय लेने की क्षमता शीर्ष पर केंद्रित है, जबकि निचले स्तर पर वे देश हैं, जो इन फैसलों से प्रभावित होते हैं, लेकिन उन्हें आकार देने में सक्षम नहीं हैं।"
मोदी ने रेखांकित किया कि ग्लोबल साउथ खुद को वैश्विक संकटों के केंद्र में पाता है, लेकिन निर्णय केंद्रों से बाहर रहता है। यह असंतुलन, उनके अनुसार, टिकाऊ वैश्विक सहयोग की सबसे बड़ी बाधा है।
ब्रिक्स सुधार रोडमैप का प्रस्ताव
प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस शिखर सम्मेलन में सभी सदस्य देश मिलकर 10 वैश्विक शासन सुधारों का मसौदा तैयार करें और अगले शिखर सम्मेलन तक उन्हें 'ब्रिक्स सुधार रोडमैप' का औपचारिक रूप दें। उन्होंने कहा, "यदि हमारा भविष्य साझा है, तो उस भविष्य को आकार देने का अधिकार भी साझा होना चाहिए। आवाज से प्रभाव तक, विशेषाधिकार से साझेदारी तक, यही इस समय ब्रिक्स का मार्गदर्शक संकल्प होना चाहिए।"
यह ऐसे समय में आया है जब ब्रिक्स समूह विस्तार के बाद अपनी नई पहचान बनाने की कोशिश कर रहा है और पश्चिमी देशों की बहुपक्षीय संस्थाओं के एकाधिकार को चुनौती देने का प्रयास कर रहा है।
तीन प्रमुख स्तंभ: प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और नियम निर्माण
मोदी ने रोडमैप के लिए तीन केंद्रीय पहलू गिनाए। प्रतिनिधित्व के तहत उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार की माँग दोहराई और कहा कि इस पर बातचीत को "निश्चित समयसीमा और स्पष्ट परिणामों" से जोड़ना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि वित्तीय संस्थानों में मतदान का अधिकार, नेतृत्व के पद और नीतिगत प्राथमिकताएं आज की आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप होनी चाहिए।
जवाबदेही के स्तंभ पर उन्होंने एक नए 'सीफेयर्स इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क' के गठन की वकालत की, जो संकट के समय सामूहिक प्रतिक्रिया की गति और पहुँच को मजबूत करे।
नियम निर्माण पर मोदी ने जोर दिया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबरस्पेस, बाहरी अंतरिक्ष, जैव प्रौद्योगिकी और अन्य महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों से संबंधित वैश्विक नियमों के निर्माण में सभी देशों की समान भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए।
भारत की अध्यक्षता में संदेश
गौरतलब है कि यह ब्रिक्स शिखर सम्मेलन भारत की अध्यक्षता में आयोजित हो रहा है, और मोदी ने इसे वैश्विक दक्षिण की आकांक्षाओं का प्रतीक बनाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि "विशेषाधिकारों के पिरामिड को साझेदारी के मंच में बदलना होगा।" यह वक्तव्य पश्चिमी देशों के नेतृत्व वाली वैश्विक संस्थाओं — विशेषकर IMF, विश्व बैंक और UNSC — पर परोक्ष टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है।
UNSC सुधार के मुद्दे पर भारत दशकों से स्थायी सदस्यता की माँग करता रहा है, और ब्रिक्स मंच से इसे पुनः उठाना नई दिल्ली की बहुपक्षीय कूटनीति का अहम कदम है।
आगे क्या होगा
मोदी के प्रस्ताव के अनुसार, अगले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन तक 10 वैश्विक शासन सुधारों का रोडमैप तैयार किया जाना है। सभी सदस्य देशों की सहमति और क्रियान्वयन की दिशा में बातचीत की प्रक्रिया अब शुरू होने की उम्मीद है। यह देखना बाकी है कि रोडमैप को लेकर ब्रिक्स के नए और पुराने सदस्यों के बीच कितना समन्वय बन पाता है।