13 सितंबर 2026
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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: PM मोदी ने 10 सुधारों का रोडमैप प्रस्तावित किया, ग्लोबल साउथ को निर्णय केंद्रों में हिस्सेदारी की माँग

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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: PM मोदी ने 10 सुधारों का रोडमैप प्रस्तावित किया, ग्लोबल साउथ को निर्णय केंद्रों में हिस्सेदारी की माँग

सारांश

नई दिल्ली में ब्रिक्स की कमान संभाले भारत ने इस बार सिर्फ मेज़बानी नहीं की — मोदी ने 10 वैश्विक शासन सुधारों का ब्लूप्रिंट पेश कर दिया। UNSC सुधार से लेकर AI नियम निर्माण तक, यह प्रस्ताव ग्लोबल साउथ को पश्चिमी संस्थाओं के एकाधिकार से बाहर निकालने की सबसे ठोस कोशिश है।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 12 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में ब्रिक्स सत्र में 10 वैश्विक शासन सुधारों का रोडमैप प्रस्तावित किया।
प्रस्ताव के तीन मुख्य स्तंभ: प्रतिनिधित्व , जवाबदेही और नियम निर्माण ।
मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) सुधार को 'निश्चित समयसीमा' से जोड़ने की माँग की।
ग्लोबल साउथ के लिए वित्तीय संस्थाओं में मतदान अधिकार और नेतृत्व पदों पर न्यायसंगत भागीदारी की वकालत की गई।
AI, साइबरस्पेस, बाहरी अंतरिक्ष और जैव प्रौद्योगिकी के वैश्विक नियमों में सभी देशों की समान भागीदारी का आह्वान।
'सीफेयर्स इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क' बनाने का प्रस्ताव, अगले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन तक रोडमैप को अंतिम रूप देने का लक्ष्य।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के 'समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत करना' विषयक सत्र में 10 वैश्विक शासन सुधारों का एक ठोस रोडमैप तैयार करने का प्रस्ताव रखा। उनका मुख्य आग्रह यह था कि ग्लोबल साउथ के देशों को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में वह भूमिका मिले, जो वर्तमान में उन्हें नहीं मिल पाई है।

वैश्विक व्यवस्था में असंतुलन का मुद्दा

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मौजूदा वैश्विक शासन व्यवस्था एक 'पिरामिड' की तरह है, जिसमें शक्ति और निर्णय लेने की क्षमता शीर्ष पर सिमटी हुई है। उन्होंने कहा, "वर्तमान वैश्विक शासन व्यवस्था एक पिरामिड जैसी है, जिसमें शक्ति और निर्णय लेने की क्षमता शीर्ष पर केंद्रित है, जबकि निचले स्तर पर वे देश हैं, जो इन फैसलों से प्रभावित होते हैं, लेकिन उन्हें आकार देने में सक्षम नहीं हैं।"

मोदी ने रेखांकित किया कि ग्लोबल साउथ खुद को वैश्विक संकटों के केंद्र में पाता है, लेकिन निर्णय केंद्रों से बाहर रहता है। यह असंतुलन, उनके अनुसार, टिकाऊ वैश्विक सहयोग की सबसे बड़ी बाधा है।

ब्रिक्स सुधार रोडमैप का प्रस्ताव

प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस शिखर सम्मेलन में सभी सदस्य देश मिलकर 10 वैश्विक शासन सुधारों का मसौदा तैयार करें और अगले शिखर सम्मेलन तक उन्हें 'ब्रिक्स सुधार रोडमैप' का औपचारिक रूप दें। उन्होंने कहा, "यदि हमारा भविष्य साझा है, तो उस भविष्य को आकार देने का अधिकार भी साझा होना चाहिए। आवाज से प्रभाव तक, विशेषाधिकार से साझेदारी तक, यही इस समय ब्रिक्स का मार्गदर्शक संकल्प होना चाहिए।"

यह ऐसे समय में आया है जब ब्रिक्स समूह विस्तार के बाद अपनी नई पहचान बनाने की कोशिश कर रहा है और पश्चिमी देशों की बहुपक्षीय संस्थाओं के एकाधिकार को चुनौती देने का प्रयास कर रहा है।

तीन प्रमुख स्तंभ: प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और नियम निर्माण

मोदी ने रोडमैप के लिए तीन केंद्रीय पहलू गिनाए। प्रतिनिधित्व के तहत उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार की माँग दोहराई और कहा कि इस पर बातचीत को "निश्चित समयसीमा और स्पष्ट परिणामों" से जोड़ना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि वित्तीय संस्थानों में मतदान का अधिकार, नेतृत्व के पद और नीतिगत प्राथमिकताएं आज की आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप होनी चाहिए।

जवाबदेही के स्तंभ पर उन्होंने एक नए 'सीफेयर्स इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क' के गठन की वकालत की, जो संकट के समय सामूहिक प्रतिक्रिया की गति और पहुँच को मजबूत करे।

नियम निर्माण पर मोदी ने जोर दिया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबरस्पेस, बाहरी अंतरिक्ष, जैव प्रौद्योगिकी और अन्य महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों से संबंधित वैश्विक नियमों के निर्माण में सभी देशों की समान भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए।

भारत की अध्यक्षता में संदेश

गौरतलब है कि यह ब्रिक्स शिखर सम्मेलन भारत की अध्यक्षता में आयोजित हो रहा है, और मोदी ने इसे वैश्विक दक्षिण की आकांक्षाओं का प्रतीक बनाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि "विशेषाधिकारों के पिरामिड को साझेदारी के मंच में बदलना होगा।" यह वक्तव्य पश्चिमी देशों के नेतृत्व वाली वैश्विक संस्थाओं — विशेषकर IMF, विश्व बैंक और UNSC — पर परोक्ष टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है।

UNSC सुधार के मुद्दे पर भारत दशकों से स्थायी सदस्यता की माँग करता रहा है, और ब्रिक्स मंच से इसे पुनः उठाना नई दिल्ली की बहुपक्षीय कूटनीति का अहम कदम है।

आगे क्या होगा

मोदी के प्रस्ताव के अनुसार, अगले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन तक 10 वैश्विक शासन सुधारों का रोडमैप तैयार किया जाना है। सभी सदस्य देशों की सहमति और क्रियान्वयन की दिशा में बातचीत की प्रक्रिया अब शुरू होने की उम्मीद है। यह देखना बाकी है कि रोडमैप को लेकर ब्रिक्स के नए और पुराने सदस्यों के बीच कितना समन्वय बन पाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ब्रिक्स की अंदरूनी विविधता — चीन, रूस, दक्षिण अफ्रीका और नए सदस्यों के परस्पर विरोधी हित — इसे जमीन पर उतारने की सबसे बड़ी चुनौती है। UNSC सुधार की माँग भारत दशकों से उठाता रहा है, लेकिन अब तक ठोस परिणाम नहीं मिले; ब्रिक्स मंच से इसे दोहराना प्रतीकात्मक तो है, पर स्थायी परिवर्तन के लिए पश्चिमी वीटो शक्तियों की सहमति अनिवार्य है। AI और साइबरस्पेस के नियम निर्माण पर 'समान भागीदारी' की बात तब तक अधूरी है जब तक ब्रिक्स के भीतर ही डेटा संप्रभुता और तकनीकी मानकों पर आम सहमति न बने। असली परीक्षा यह है कि क्या यह रोडमैप अगले शिखर सम्मेलन तक किसी बाध्यकारी प्रतिबद्धता में बदलता है, या केवल एक और घोषणापत्र बनकर रह जाता है।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने ब्रिक्स में कौन सा रोडमैप प्रस्तावित किया?
PM मोदी ने 12 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में ब्रिक्स सत्र के दौरान 10 वैश्विक शासन सुधारों का एक रोडमैप तैयार करने का प्रस्ताव रखा। इसका उद्देश्य ग्लोबल साउथ को वैश्विक निर्णय केंद्रों में अधिक प्रभावी भूमिका दिलाना और अगले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन तक इसे औपचारिक रूप देना है।
ब्रिक्स सुधार रोडमैप के तीन मुख्य स्तंभ क्या हैं?
मोदी ने प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और नियम निर्माण को तीन प्रमुख स्तंभ बताया। प्रतिनिधित्व में UNSC सुधार और वित्तीय संस्थाओं में समान मतदान अधिकार शामिल हैं; जवाबदेही में 'सीफेयर्स इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क'; और नियम निर्माण में AI, साइबरस्पेस व जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में समान भागीदारी।
मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार के बारे में क्या कहा?
मोदी ने कहा कि UNSC सुधार को 'अब और टाला नहीं जा सकता' और इस पर बातचीत को निश्चित समयसीमा तथा स्पष्ट परिणामों से जोड़ना होगा। यह भारत की उस दीर्घकालिक माँग की पुनरावृत्ति है जिसमें वह स्थायी सदस्यता और व्यापक सुधार की वकालत करता रहा है।
ग्लोबल साउथ के लिए इस प्रस्ताव का क्या महत्व है?
ग्लोबल साउथ के देश वैश्विक संकटों — जलवायु, ऋण, महामारी — से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं, लेकिन IMF, विश्व बैंक और UNSC जैसी संस्थाओं में उनकी निर्णायक भूमिका सीमित है। मोदी का प्रस्ताव इस असंतुलन को संरचनात्मक रूप से बदलने की माँग करता है।
ब्रिक्स सुधार रोडमैप कब तक तैयार होगा?
PM मोदी ने प्रस्ताव दिया कि अगले ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन तक 10 सुधारों को 'ब्रिक्स सुधार रोडमैप' का अंतिम रूप दिया जाए। इसके लिए सदस्य देशों के बीच बातचीत की प्रक्रिया अब शुरू होने की उम्मीद है, हालांकि कोई निश्चित समयसीमा घोषित नहीं की गई।
राष्ट्र प्रेस
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