मंजुला कुमारी की 'पीएमएफएमई' योजना से 10 लाख का मसाला उद्योग, 30 लोगों को मिला रोजगार

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मंजुला कुमारी की 'पीएमएफएमई' योजना से 10 लाख का मसाला उद्योग, 30 लोगों को मिला रोजगार

सारांश

सिलाव प्रखंड की मंजुला कुमारी ने 'पीएमएफएमई' योजना से 10 लाख की लागत से मसाला उद्योग स्थापित किया। यह न केवल उनके गांव का नाम रोशन कर रहा है, बल्कि 30 लोगों को रोजगार भी दे रहा है। जानें उनकी प्रेरक कहानी।

Key Takeaways

  • पीएमएफएमई योजना ने मंजुला की मदद की।
  • उद्योग ने 30 लोगों को रोजगार दिया।
  • उच्च गुणवत्ता और शुद्ध मसाले का उत्पादन।
  • स्थानीय समुदाय में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा।
  • सरकार की योजनाओं का सही उपयोग।

नालंदा, २५ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। कभी हल्दी को छोटे स्तर पर पीसकर स्थानीय मार्केट में बेचने वाली बिहार के सिलाव प्रखंड के सरीचक गांव की मंजुला कुमारी आज क्षेत्र की महिलाओं के लिए एक प्रेरणा बनी हैं। ‘पीएमएफएमई’ योजना की सहायता से उन्होंने न केवल अपने गांव में ‘सरीचक एंटरप्राइजेज’ नामक मसाला उद्योग स्थापित किया है, बल्कि ३० से अधिक लोगों को रोजगार देकर आत्मनिर्भरता की नई परिभाषा भी गढ़ी है।

मंजुला ने बाजार में उपलब्ध सामान्य मसालों से भिन्नता लाते हुए गुणवत्ता और शुद्धता पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। उनकी यूनिट में हल्दी, मिर्च, धनिया और गरम मसाले पीसने के लिए अलग-अलग मशीनें स्थापित की गई हैं। आज, उनके शुद्ध मसाले सिलाव के गांवों से निकलकर राजगीर के प्रमुख होटलों और मॉल्स तक अपनी खुशबू फैला रहे हैं।

मंजुला ने राष्ट्र प्रेस से बात करते हुए बताया कि पहले वह हल्दी का एक छोटा सा व्यवसाय करती थीं, लेकिन मांग पूरी नहीं कर पा रही थीं। इसी दौरान जीविका के माध्यम से उन्हें सरकार की पीएमएफएमई योजना की जानकारी मिली। बड़े स्तर पर व्यवसाय स्थापित करने का सपना लेकर उन्होंने आवेदन किया और बड़गांव स्थित केनरा बैंक से उन्हें ७ लाख २१ हजार रुपये का ऋण मिल गया। अपनी जमा पूंजी मिलाकर लगभग १० लाख रुपये की लागत से उन्होंने अपनी यूनिट की स्थापना की।

उन्होंने बताया, "आमतौर पर लोग एक ही मशीन में सभी मसाले पीसते हैं, लेकिन हमारी हल्दी की मशीन पूरी तरह से अलग है। इसमें केवल हल्दी ही पीसी जाती है, ताकि ग्राहकों को १००%25 शुद्धता मिल सके। हमारे यहां खड़े और पिसे हुए, दोनों प्रकार के मसाले तैयार होते हैं। हम हल्दी के साथ-साथ अन्य मसालों जैसे मिर्च, धनिया, जीरा, गोलकी और कई प्रकार के गरम एवं सब्जी मसाले भी तैयार करते हैं।"

शुरुआत में माल बेचने में आई चुनौतियों को मंजुला ने एक उत्कृष्ट रणनीति से हल किया। उन्होंने हर गांव में एक स्टाफ (जीविका से जुड़ी महिलाएं) नियुक्त किया, जो मांग लेता है और आपूर्ति करता है। वर्तमान में उनके साथ वितरण के कार्य में ३० लोग जुड़े हैं। वहीं, पिसाई और पैकेजिंग के लिए घर पर ३ कर्मचारी नियुक्त किए गए हैं। आज उनके मसाले सिलाव प्रखंड के अलावा दो स्कूलों, राजगीर के तीन-चार बड़े होटलों और हाल ही में खोले गए तीन-चार मॉल में भी आपूर्ति की जा रही है।

इस सफलता से उत्साहित मंजुला कुमारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष आभार व्यक्त किया है। वे बताती हैं कि इस योजना के तहत उन्हें लगभग ढाई लाख रुपये की अनुदान राशि भी प्राप्त हुई है। खुद को पीएम मोदी की बहुत बड़ी प्रशंसक बताते हुए मंजुला कहती हैं, "मेरी बस एक ही इच्छा है कि मुझे जीवन में कम से कम एक बार प्रधानमंत्री से मिलने का अवसर मिले।"

Point of View

बल्कि कई लोगों को रोजगार भी दिया है। यह एक प्रेरणा है कि सही अवसर और संसाधनों के साथ कोई भी अपनी स्थिति में बदलाव ला सकता है।
NationPress
26/03/2026

Frequently Asked Questions

क्या मंजुला कुमारी ने सरकारी योजना का लाभ उठाया?
हाँ, मंजुला ने 'पीएमएफएमई' योजना का लाभ उठाकर अपने मसाला उद्योग की स्थापना की।
उनके मसाले कहाँ बिकते हैं?
मंजुला के मसाले सिलाव प्रखंड के अलावा राजगीर के बड़े होटलों और मॉल में भी बिकते हैं।
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