26 जुलाई 2026
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एनएचएआई ने ऑटोमैटिक गड्ढा मरम्मत और मशीनीकृत ड्रेनेज सफाई अनिवार्य की, हाईवे रखरखाव में बड़ा बदलाव

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एनएचएआई ने ऑटोमैटिक गड्ढा मरम्मत और मशीनीकृत ड्रेनेज सफाई अनिवार्य की, हाईवे रखरखाव में बड़ा बदलाव

सारांश

एनएचएआई ने 9 जून 2026 को राष्ट्रीय राजमार्गों पर ऑटोमैटिक गड्ढा मरम्मत मशीनें और मशीनीकृत ड्रेनेज सफाई अनिवार्य की। मानसून से पहले उठाया गया यह कदम हाईवे रखरखाव में तकनीकी बदलाव और ठेकेदारों पर कड़ी जवाबदेही की दिशा में एनएचएआई का अब तक का सबसे ठोस प्रयास है।

मुख्य बातें

एनएचएआई ने 9 जून 2026 को राष्ट्रीय राजमार्गों पर ऑटोमैटिक गड्ढा मरम्मत, कॉम्पैक्टिंग और पैचिंग मशीनें अनिवार्य कीं।
शहरी और आबादी वाले क्षेत्रों में मशीनीकृत ड्रेनेज सफाई के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए गए।
हाई-फ्लो सक्शन-जेटिंग यूनिट, हाइड्रोलिक ग्रैब मशीन और डीवॉटरिंग पंप सेट तैनात किए जाएंगे।
पीबीएमसी के तहत ठेकेदारों और कंसेशनियर के लिए रखरखाव कार्यक्रम और निरीक्षण योजना का सख्त पालन अनिवार्य।
ड्रेनेज कमियों की समय-सीमा-आधारित निगरानी सुनिश्चित की जाएगी ताकि सड़क की स्थिति न बिगड़े।

नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने मंगलवार, 9 जून 2026 को राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे के रखरखाव को आधुनिक बनाने के लिए प्रौद्योगिकी-आधारित कई अनिवार्य पहलें लागू कीं। इन पहलों में ऑटोमैटिक गड्ढा भरने वाली मशीनें, मशीनीकृत ड्रेनेज सफाई और परफॉर्मेंस-बेस्ड मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट (पीबीएमसी) के तहत उन्नत उपकरणों की तैनाती शामिल है। अथॉरिटी के अनुसार, इन कदमों का उद्देश्य सड़क की गुणवत्ता, परिचालन दक्षता और यात्रियों के अनुभव को व्यापक रूप से सुधारना है।

मुख्य घटनाक्रम

एनएचएआई ने परफॉर्मेंस-बेस्ड मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट के अंतर्गत उपयोग होने वाले उपकरणों की सूची में ऑटोमैटिक गड्ढा भरने, कॉम्पैक्टिंग और पैचिंग मशीनों के साथ-साथ मशीनीकृत सड़क सफाई उपकरण को भी शामिल किया है। अथॉरिटी ने यह भी स्पष्ट किया है कि चल रहे रखरखाव परियोजनाओं में इन तकनीकों को लगाने से जुड़े खर्चों का आकलन और अनुमोदन एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया जाएगा।

एनएचएआई के अनुसार, ऑटोमैटिक गड्ढा मरम्मत मशीनों के इस्तेमाल से सड़क सुधार कार्य तेज़ होगा, निर्माण-अवरोध का समय घटेगा और राजमार्ग उपयोगकर्ताओं को होने वाली असुविधा कम होगी।

मानसून से पहले ड्रेनेज सफाई अनिवार्य

मानसून सीजन को ध्यान में रखते हुए, एनएचएआई ने राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे के शहरी और आबादी वाले क्षेत्रों में नालियों की मशीनीकृत सफाई अनिवार्य कर दी है। इस प्रणाली में हाई-फ्लो सक्शन और जेटिंग यूनिट, हाइड्रोलिक ग्रैब मशीन और डीवॉटरिंग पंप सेट का एक साथ उपयोग किया जाएगा।

इन उपकरणों का इस्तेमाल जल-निकासी, जमी हुई गाद को ढीला करने, कीचड़ हटाने और ड्रेनेज चैनल से भारी कचरे की सफाई के लिए होगा — जिससे बारिश के पानी का बेहतर प्रबंधन और जलभराव का खतरा कम होने की उम्मीद है।

ठेकेदारों पर कड़ी निगरानी

एनएचएआई ने कॉन्ट्रैक्टर और कंसेशनियर को निर्देश दिया है कि वे ड्रेनेज प्रणाली के लिए निर्धारित रखरखाव कार्यक्रम और निरीक्षण योजना का सख्ती से पालन करें। ड्रेनेज संबंधी कमियों को दूर करने की समय-सीमा का अनुपालन हो रहा है या नहीं, इसकी बारीकी से निगरानी की जाएगी ताकि तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित हो और सड़क की स्थिति बिगड़ने से बचाई जा सके।

आम जनता पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में मानसून से पहले हाईवे पर गड्ढों और जलभराव की समस्याएँ चरम पर होती हैं। गौरतलब है कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर गड्ढों के कारण होने वाली दुर्घटनाएँ सड़क सुरक्षा के लिए एक गंभीर चिंता का विषय रही हैं। समय पर मरम्मत और उन्नत उपकरणों की तैनाती से यात्रा अनुभव बेहतर होने, वाहनों को होने वाले नुकसान में कमी आने और हाईवे इन्फ्रास्ट्रक्चर की दीर्घकालिक मज़बूती बनाए रखने की उम्मीद है।

अथॉरिटी के अनुसार, इन पहलों से रखरखाव अनुबंधों का सख्त अनुपालन भी सुनिश्चित होगा, जो अब तक एक कमज़ोर कड़ी रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल क्रियान्वयन का है — पीबीएमसी ढाँचे में उपकरण सूची अपडेट करना और ज़मीन पर मशीनें तैनात करना दो अलग बातें हैं। अतीत में रखरखाव अनुबंधों में ठेकेदारों की जवाबदेही कमज़ोर रही है और निगरानी तंत्र कागज़ों तक सिमटा रहा है। जब तक ड्रेनेज कमियों की समय-सीमा उल्लंघन पर वास्तविक दंड और पारदर्शी सार्वजनिक रिपोर्टिंग नहीं होती, यह पहल भी पिछले सुधार प्रयासों की तरह मानसून के बाद की सुर्खियों तक सीमित रह सकती है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनएचएआई ने ऑटोमैटिक गड्ढा मरम्मत मशीनें क्यों अनिवार्य कीं?
एनएचएआई के अनुसार, ऑटोमैटिक गड्ढा मरम्मत मशीनों से सड़क सुधार कार्य तेज़ होगा, निर्माण-अवरोध का समय घटेगा और हाईवे उपयोगकर्ताओं को होने वाली असुविधा कम होगी। यह कदम राष्ट्रीय राजमार्गों पर रखरखाव की गुणवत्ता और दीर्घकालिक ढाँचागत मज़बूती सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
मानसून से पहले मशीनीकृत ड्रेनेज सफाई में कौन-से उपकरण इस्तेमाल होंगे?
एनएचएआई ने हाई-फ्लो सक्शन और जेटिंग यूनिट, हाइड्रोलिक ग्रैब मशीन और डीवॉटरिंग पंप सेट के एक साथ उपयोग का निर्देश दिया है। ये उपकरण जल-निकासी, गाद हटाने, कीचड़ सफाई और भारी कचरे को ड्रेनेज चैनल से बाहर करने के लिए तैनात किए जाएंगे।
पीबीएमसी के तहत ठेकेदारों पर क्या नई ज़िम्मेदारियाँ हैं?
परफॉर्मेंस-बेस्ड मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट के तहत ठेकेदारों और कंसेशनियर को ड्रेनेज प्रणाली के निर्धारित रखरखाव कार्यक्रम और निरीक्षण योजना का सख्ती से पालन करना होगा। ड्रेनेज कमियों को दूर करने की समय-सीमा का अनुपालन बारीकी से निगरानी में रहेगा।
इन पहलों से आम यात्रियों को क्या फायदा होगा?
एनएचएआई के अनुसार, समय पर गड्ढा मरम्मत और बेहतर ड्रेनेज प्रबंधन से यात्रा अनुभव में सुधार होगा, वाहनों को होने वाला नुकसान कम होगा और जलभराव से उत्पन्न दुर्घटनाओं का खतरा घटेगा। हाईवे इन्फ्रास्ट्रक्चर की दीर्घकालिक टिकाऊपन भी बढ़ेगी।
एनएचएआई की ये नई गाइडलाइंस कब से लागू होंगी?
एनएचएआई ने 9 जून 2026 को ये दिशानिर्देश जारी किए हैं और इन्हें तत्काल प्रभाव से लागू करने का निर्देश दिया गया है। मानसून सीजन को देखते हुए ड्रेनेज सफाई और गड्ढा मरम्मत के उपाय प्राथमिकता के आधार पर अपनाए जाने हैं।
राष्ट्र प्रेस
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