मंदिरों के सोने को मोनेटाइज करने का कोई प्रस्ताव नहीं: वित्त मंत्रालय ने अफवाहें खारिज कीं

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मंदिरों के सोने को मोनेटाइज करने का कोई प्रस्ताव नहीं: वित्त मंत्रालय ने अफवाहें खारिज कीं

सारांश

वित्त मंत्रालय ने मंदिरों के सोने को मोनेटाइज करने की योजना को 'पूरी तरह झूठा और निराधार' बताते हुए खारिज किया। न गोल्ड बॉन्ड का प्रस्ताव है, न मंदिर संरचनाओं को रणनीतिक स्वर्ण भंडार मानने का — सरकार ने नागरिकों से केवल आधिकारिक चैनलों पर भरोसा करने की अपील की।

मुख्य बातें

वित्त मंत्रालय ने 19 मई 2026 को आधिकारिक बयान जारी कर मंदिर सोना मोनेटाइज योजना की अफवाहों को खारिज किया।
मंदिर ट्रस्टों को गोल्ड बॉन्ड जारी करने का कोई प्रस्ताव न प्रस्तावित है, न स्वीकृत।
मंदिर शिखरों और दरवाजों पर लगी सोने की प्लेटों को 'रणनीतिक स्वर्ण भंडार' मानने के दावे भी 'झूठे और निराधार' बताए गए।
सरकार ने नागरिकों को अफवाहें न फैलाने और केवल आधिकारिक चैनलों पर भरोसा करने की सलाह दी।
नीतिगत घोषणाएँ केवल आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों और सरकारी वेबसाइटों के ज़रिए जारी होंगी।

वित्त मंत्रालय ने 19 मई 2026 को एक आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करते हुए उन सभी दावों को सिरे से नकार दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि केंद्र सरकार देशभर के मंदिर ट्रस्टों और धार्मिक संस्थानों के स्वर्ण भंडार को मोनेटाइज करने की योजना बना रही है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ऐसी किसी भी योजना को न तो प्रस्तावित किया गया है और न ही उसे किसी स्तर पर मंजूरी दी गई है।

क्या था दावा

कुछ मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पोस्टों में यह भ्रामक जानकारी फैलाई जा रही थी कि सरकार मंदिरों के गोल्ड रिजर्व के बदले उन्हें गोल्ड बॉन्ड जारी करने की योजना बना रही है। इसके साथ ही यह भी दावा किया जा रहा था कि मंदिर के शिखरों, दरवाजों और अन्य संरचनाओं पर लगी सोने की प्लेटों को 'भारत के रणनीतिक स्वर्ण भंडार' के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा।

सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया

वित्त मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, 'देश भर में मंदिर ट्रस्टों या किसी भी धार्मिक संस्था के पास मौजूद सोने के मोनेटाइज की सरकारी योजना शुरू करने की अटकलें और अफवाहें पूरी तरह से झूठी, भ्रामक और निराधार हैं।' मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि मंदिर संरचनाओं पर लगी सोने की प्लेटों को रणनीतिक स्वर्ण भंडार मानने के दावे भी 'झूठे, भ्रामक और पूरी तरह निराधार' हैं।

नागरिकों को सरकार की सलाह

सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे ऐसी अपुष्ट अफवाहों पर न तो विश्वास करें और न ही उन्हें आगे प्रसारित करें। मंत्रालय ने चेतावनी दी कि इस तरह की भ्रामक जानकारी के प्रसार से जनता में अनावश्यक भ्रम और घबराहट पैदा हो सकती है। सरकार ने स्पष्ट किया कि नीतिगत निर्णयों से जुड़ी कोई भी आधिकारिक घोषणा केवल आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों, सरकारी वेबसाइटों और सत्यापित सार्वजनिक संचार प्लेटफार्मों के माध्यम से ही जारी की जाएगी।

व्यापक संदर्भ

यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में आया है जब सोशल मीडिया पर धार्मिक संस्थाओं की संपत्तियों से जुड़ी अफवाहें तेज़ी से वायरल होती हैं। गौरतलब है कि भारत के मंदिरों में अनुमानित रूप से हज़ारों टन सोना जमा है, जो वैश्विक स्तर पर सबसे बड़े निजी स्वर्ण भंडारों में से एक माना जाता है। इस पृष्ठभूमि में ऐसी अफवाहें संवेदनशील धार्मिक भावनाओं को प्रभावित करने की क्षमता रखती हैं।

आगे क्या

सरकार ने लोगों से आग्रह किया है कि नीतिगत जानकारी के लिए वे केवल अधिकृत चैनलों पर ही भरोसा करें। फिलहाल मंदिर ट्रस्टों के स्वर्ण भंडार से संबंधित कोई भी सरकारी प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल अनुत्तरित है कि ऐसी भ्रामक सूचनाएँ किस स्रोत से उत्पन्न हुईं और उनके प्रसार को रोकने के लिए क्या तंत्र मौजूद है। भारत के मंदिरों में अनुमानित विशाल स्वर्ण भंडार को देखते हुए, इस विषय पर पारदर्शी नीतिगत संवाद की दीर्घकालिक ज़रूरत बनी रहेगी।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या सरकार मंदिरों के सोने को मोनेटाइज करने की योजना बना रही है?
नहीं। वित्त मंत्रालय ने 19 मई 2026 को स्पष्ट किया कि मंदिर ट्रस्टों या किसी भी धार्मिक संस्था के सोने को मोनेटाइज करने का कोई प्रस्ताव न प्रस्तावित है और न ही स्वीकृत। ऐसी सभी अफवाहें 'झूठी, भ्रामक और निराधार' बताई गई हैं।
क्या मंदिरों को गोल्ड बॉन्ड जारी किए जाएंगे?
नहीं। वित्त मंत्रालय ने इस दावे को भी स्पष्ट रूप से नकारा है। मंदिर ट्रस्टों के गोल्ड रिजर्व के बदले गोल्ड बॉन्ड जारी करने की कोई योजना सरकार के पास नहीं है।
क्या मंदिर संरचनाओं पर लगे सोने को रणनीतिक स्वर्ण भंडार माना जाएगा?
नहीं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि मंदिर के शिखरों, दरवाजों या अन्य संरचनाओं पर लगी सोने की प्लेटों को 'भारत के रणनीतिक स्वर्ण भंडार' के रूप में वर्गीकृत करने के दावे पूरी तरह झूठे और निराधार हैं।
नागरिक सरकारी नीतियों की सही जानकारी कहाँ से प्राप्त करें?
वित्त मंत्रालय ने सलाह दी है कि नीतिगत निर्णयों की जानकारी के लिए केवल आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों, सरकारी वेबसाइटों और सत्यापित सार्वजनिक संचार प्लेटफार्मों पर ही भरोसा करें। सोशल मीडिया पर वायरल अपुष्ट सूचनाओं को साझा न करें।
इस खंडन की ज़रूरत क्यों पड़ी?
कुछ मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पोस्टों में मंदिर सोना मोनेटाइज से जुड़े भ्रामक दावे तेज़ी से फैले, जिससे जनता में भ्रम और चिंता उत्पन्न हुई। सरकार ने इस भ्रम को दूर करने और अनावश्यक अशांति रोकने के लिए आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया।
राष्ट्र प्रेस
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