30 सितंबर 2026
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पेट्रोलियम संशोधन विधेयक 2026: बिना लाइसेंस गतिविधियों पर ₹25 करोड़ जुर्माना और 3 साल कैद का प्रस्ताव

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पेट्रोलियम संशोधन विधेयक 2026: बिना लाइसेंस गतिविधियों पर ₹25 करोड़ जुर्माना और 3 साल कैद का प्रस्ताव

सारांश

केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम (संशोधन) विधेयक 2026 का मसौदा जारी किया है जिसमें बिना लाइसेंस गतिविधियों पर ₹25 करोड़ जुर्माना और 3 साल कैद, तथा अवसंरचना क्षति पर 10 साल सजा का प्रस्ताव है। साथ ही मामूली उल्लंघनों को आपराधिक दायरे से बाहर कर प्रशासनिक दंड तंत्र बनाने की योजना है।

मुख्य बातें

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 30 सितंबर 2026 को पेट्रोलियम (संशोधन) विधेयक, 2026 का मसौदा जारी किया।
बिना लाइसेंस पेट्रोलियम गतिविधियाँ संचालित करने पर ₹25 करोड़ तक जुर्माना और 3 वर्ष तक कैद ; लगातार उल्लंघन पर ₹10 लाख प्रति दिन अतिरिक्त।
धोखाधड़ी से लाइसेंस प्राप्त करने पर 5 वर्ष तक की कैद ; महत्वपूर्ण अवसंरचना को नुकसान पर 10 वर्ष कैद और ₹25 करोड़ जुर्माना ।
लाइसेंस शर्तों के मामूली उल्लंघन अपराध की श्रेणी से बाहर; निर्णायक अधिकारी के माध्यम से प्रशासनिक दंड — पहली बार ₹2.5 करोड़ , दोबारा ₹5 करोड़ तक।
हितधारकों और आम जनता से 30 अक्टूबर 2026 तक सुझाव आमंत्रित; उसके बाद विधेयक को अंतिम रूप दिया जाएगा।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 30 सितंबर 2026 को पेट्रोलियम (संशोधन) विधेयक, 2026 का मसौदा सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए जारी किया, जिसमें बिना लाइसेंस पेट्रोलियम गतिविधियाँ संचालित करने पर ₹25 करोड़ तक के जुर्माने और तीन वर्ष तक की कैद का प्रस्ताव है। यह मसौदा एक साथ दो लक्ष्य साधता है — मामूली नियामकीय उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस को बढ़ावा देना, और गंभीर अपराधों के लिए दंड को कड़ा करना। हितधारकों से 30 अक्टूबर 2026 तक सुझाव माँगे गए हैं।

प्रस्तावित दंड का ढाँचा

मसौदे के अनुसार, जो गतिविधियाँ कानूनी रूप से लाइसेंस के अधीन हैं — जैसे पेट्रोलियम या पेट्रोलियम उत्पादों का उत्पादन, आयात, भंडारण, रिफाइनिंग, परिवहन और मिश्रण — उन्हें बिना लाइसेंस संचालित करने पर तीन वर्ष तक की जेल, ₹25 करोड़ तक का जुर्माना, या दोनों लगाए जा सकते हैं। यदि यह उल्लंघन निरंतर जारी रहता है, तो अतिरिक्त ₹10 लाख प्रति दिन का जुर्माना भी देना होगा।

धोखाधड़ी से लाइसेंस प्राप्त करने को और भी गंभीर अपराध माना गया है। गलत जानकारी, फर्जी पहचान या अन्य अनुचित तरीकों से लाइसेंस हासिल करने पर पाँच वर्ष तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान रखा गया है।

पेट्रोलियम अवसंरचना को नुकसान पर सख्त प्रावधान

पेट्रोलियम सुविधाओं को नुकसान पहुँचाने, ईंधन चोरी करने या सुरक्षा खतरे उत्पन्न करने जैसे मामलों में पहली बार दोष सिद्ध होने पर पाँच वर्ष तक की कैद और ₹15 करोड़ तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। बार-बार अपराध करने पर सजा और कड़ी होगी — दूसरी या उसके बाद की गलती पर सात वर्ष की कैद और ₹25 करोड़ का जुर्माना प्रस्तावित है।

महत्वपूर्ण पेट्रोलियम अवसंरचना को क्षति पहुँचाने के मामलों में दंड सर्वाधिक कठोर है — 10 वर्ष तक की जेल और ₹25 करोड़ या वास्तविक नुकसान की लागत, जो भी कम हो। यह प्रावधान रणनीतिक पेट्रोलियम संपत्तियों की सुरक्षा के लिहाज़ से उल्लेखनीय है।

मामूली उल्लंघनों का विकेंद्रीकृत निपटारा

मसौदे की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि लाइसेंस शर्तों के मामूली उल्लंघनों को आपराधिक अदालतों से हटाकर एक प्रशासनिक दंड तंत्र के तहत लाने का प्रस्ताव है। नियुक्त निर्णायक अधिकारी ऐसे मामलों में कार्रवाई करेगा। पहली बार के उल्लंघन पर ₹2.5 करोड़ तक का सिविल जुर्माना और बार-बार के उल्लंघन पर ₹5 करोड़ तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।

निर्णायक अधिकारी संबंधित लाइसेंसधारी को सुधारात्मक कदम उठाने का निर्देश देने के साथ-साथ, आवश्यकता पड़ने पर लाइसेंस के निलंबन, रद्दीकरण या दायरा सीमित करने की सिफारिश भी कर सकेगा। यह व्यवस्था छोटी कंपनियों और उद्यमियों को अदालती प्रक्रिया से राहत देने के उद्देश्य से प्रस्तावित है।

सरकार का उद्देश्य और संदर्भ

मंत्रालय के अनुसार, इन संशोधनों का मूल उद्देश्य पेट्रोलियम क्षेत्र के नियामकीय ढाँचे को आधुनिक बनाना है। गौरतलब है कि मौजूदा पेट्रोलियम कानून दशकों पुराना है और उसमें डिजिटल अर्थव्यवस्था, नवीन ऊर्जा संरचनाओं तथा बदलती व्यावसायिक वास्तविकताओं का प्रतिबिंब नहीं है। यह संशोधन ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार कई क्षेत्रों में नियामकीय सुधार और विकेंद्रीकृत दंड तंत्र को प्राथमिकता दे रही है।

आगे की प्रक्रिया

मंत्रालय ने उद्योग जगत, हितधारकों और आम जनता से 30 अक्टूबर 2026 तक अपने सुझाव और टिप्पणियाँ साझा करने का आग्रह किया है। प्राप्त सुझावों के आधार पर विधेयक को अंतिम रूप दिया जाएगा और उसके बाद इसे संसद में पेश किया जाएगा। यदि पारित होता है, तो यह पेट्रोलियम क्षेत्र में नियामकीय अनुपालन और दंड व्यवस्था में आमूल बदलाव लाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी असली परीक्षा क्रियान्वयन में होगी। 'निर्णायक अधिकारी' की स्वायत्तता और जवाबदेही के बिना, यह प्रशासनिक दंड तंत्र नौकरशाही विवेक का नया द्वार बन सकता है। दूसरी बात, ₹25 करोड़ का अधिकतम जुर्माना बड़े ऑपरेटरों के लिए पर्याप्त निवारक नहीं हो सकता जब अवसंरचना को नुकसान पहुँचाने से होने वाला लाभ उससे कहीं अधिक हो। और तीसरी — मसौदे में 'महत्वपूर्ण पेट्रोलियम अवसंरचना' की परिभाषा अभी भी अस्पष्ट है, जो कानूनी विवादों की ज़मीन तैयार कर सकती है।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पेट्रोलियम संशोधन विधेयक 2026 क्या है?
यह केंद्र सरकार द्वारा जारी किया गया मसौदा विधेयक है जो पेट्रोलियम क्षेत्र के नियामकीय ढाँचे को आधुनिक बनाने के लिए तैयार किया गया है। इसमें मामूली उल्लंघनों को आपराधिक दायरे से बाहर करने और गंभीर अपराधों के लिए कड़े दंड का प्रस्ताव है।
बिना लाइसेंस पेट्रोलियम गतिविधियों पर क्या सजा प्रस्तावित है?
मसौदे के अनुसार बिना लाइसेंस पेट्रोलियम गतिविधियाँ संचालित करने पर तीन वर्ष तक की जेल, ₹25 करोड़ तक का जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। उल्लंघन जारी रहने पर प्रति दिन ₹10 लाख का अतिरिक्त जुर्माना भी लग सकता है।
मामूली उल्लंघनों को अपराध-मुक्त करने का क्या मतलब है?
लाइसेंस शर्तों के छोटे-मोटे उल्लंघनों के लिए अब आपराधिक अदालत की बजाय एक नियुक्त निर्णायक अधिकारी कार्रवाई करेगा। पहली बार के उल्लंघन पर ₹2.5 करोड़ और दोबारा उल्लंघन पर ₹5 करोड़ तक का सिविल जुर्माना लगाया जा सकेगा।
पेट्रोलियम अवसंरचना को नुकसान पहुँचाने पर क्या दंड है?
पेट्रोलियम सुविधाओं को नुकसान, ईंधन चोरी या सुरक्षा खतरे के मामलों में पहली बार दोषी पाए जाने पर पाँच वर्ष की कैद और ₹15 करोड़ जुर्माना प्रस्तावित है। महत्वपूर्ण अवसंरचना को क्षति पहुँचाने पर यह सजा 10 वर्ष कैद और ₹25 करोड़ तक जा सकती है।
इस विधेयक पर सुझाव देने की अंतिम तारीख क्या है?
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने उद्योग जगत, हितधारकों और आम जनता से 30 अक्टूबर 2026 तक अपने सुझाव और टिप्पणियाँ साझा करने का आग्रह किया है। प्राप्त सुझावों के आधार पर विधेयक को अंतिम रूप दिया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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