मोदी भारत को आधुनिक बनाना चाहते हैं, पश्चिमी नहीं: नॉर्वेजियन राजनयिक एरिक सोल्हेम
सारांश
नॉर्वे के पूर्व मंत्री एरिक सोल्हेम का कहना है कि पीएम मोदी भारत को आधुनिक बनाना चाहते हैं, पश्चिमी नहीं — और पश्चिमी मीडिया इस फर्क को समझने में नाकाम रहता है। उनके अनुसार, भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक जड़ें कमज़ोरी नहीं, बल्कि ताकत हैं।
मुख्य बातें
एरिक सोल्हेम ने 6 मई को राष्ट्र प्रेस को दिए साक्षात्कार में कहा कि पीएम मोदी भारत को आधुनिक बनाना चाहते हैं, पश्चिमी नहीं।
सोल्हेम के अनुसार, मोदी चाहते हैं कि भविष्य का भारत अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत पर खड़ा हो।
पश्चिमी मीडिया मोदी को नकारात्मक रूप से इसलिए दिखाता है क्योंकि वह भारत में धर्म और संस्कृति की भूमिका नहीं समझता।
सोल्हेम ने पाकिस्तान के साथ हुए छोटे संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि मोदी ने इसे कुछ ही दिनों में सुलझा दिया।
उन्होंने तमिलनाडु में अभिनेता से नेता बने विजय के उभार को एक अहम राजनीतिक घटना बताया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक ऐसे भारत की परिकल्पना करते हैं जो अपनी सांस्कृतिक और सभ्यतागत जड़ों से जुड़े रहते हुए तेज़ी से आधुनिक बने — न कि पश्चिमी मॉडल की अंधी नकल करे। यह विचार नॉर्वे के वरिष्ठ राजनयिक और पूर्व जलवायु एवं पर्यावरण मंत्री एरिक सोल्हेम ने बुधवार, 6 मई को समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से विशेष बातचीत में व्यक्त किए। सोल्हेम के अनुसार, मोदी का यह दृष्टिकोण विकास का एक वैकल्पिक रास्ता प्रस्तुत करता है जिसमें आधुनिकता और परंपरा का संतुलन बना रहता है।
मोदी का विकास-दर्शन: परंपरा और प्रगति का संगम
एरिक सोल्हेम ने कहा,
संपादकीय दृष्टिकोण
यह ध्यान देने योग्य है कि वे एक बाहरी पर्यवेक्षक हैं और उनकी राय भारत की जटिल आंतरिक राजनीति की पूरी परतें नहीं खोलती। 'आधुनिकता बनाम पश्चिमीकरण' का यह विमर्श नया नहीं है — स्वामी विवेकानंद से लेकर जवाहरलाल नेहरू तक, भारतीय विचारकों ने इसे सदियों से परखा है। असली सवाल यह है कि सांस्कृतिक पहचान और संवैधानिक बहुलवाद के बीच संतुलन कैसे बना रहे — यह परीक्षा चुनावी नतीजों से कहीं अधिक गहरी है।
RashtraPress
13 मई 2026
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
एरिक सोल्हेम कौन हैं और उन्होंने मोदी के बारे में क्या कहा?
एरिक सोल्हेम नॉर्वे के वरिष्ठ राजनयिक और पूर्व जलवायु एवं पर्यावरण मंत्री हैं। उन्होंने 6 मई को राष्ट्र प्रेस को दिए साक्षात्कार में कहा कि पीएम मोदी भारत को तेज़ी से आधुनिक बनाना चाहते हैं, लेकिन पश्चिमी मॉडल की नकल किए बिना — बल्कि देश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जड़ों के आधार पर।
पश्चिमी मीडिया पीएम मोदी को नकारात्मक रूप से क्यों दिखाता है?
सोल्हेम के अनुसार, पश्चिमी मीडिया और संस्थाएँ धर्म और संस्कृति को संदेह की नज़र से देखती हैं, जबकि भारत में ये चीज़ें लोगों की पहचान और ताकत का स्रोत हैं। इस वैचारिक अंतर के कारण पश्चिमी मीडिया मोदी की नीतियों को ठीक से नहीं समझ पाता।
सोल्हेम ने पाकिस्तान के साथ संघर्ष पर क्या कहा?
सोल्हेम ने कहा कि भारत किसी बड़े युद्ध में नहीं रहा है और पाकिस्तान के साथ हुए छोटे संघर्ष को प्रधानमंत्री मोदी ने कुछ ही दिनों में सुलझा दिया। उन्होंने इसे एक ऐसा उदाहरण बताया जिससे दूसरे देश सीख सकते हैं।
सोल्हेम ने भारत की राजनीति पर क्या टिप्पणी की?
सोल्हेम ने विपक्षी नेताओं पर सीधी टिप्पणी से परहेज़ किया और कहा कि ध्यान चुनावी नतीजों पर होना चाहिए। उन्होंने पश्चिम बंगाल और असम में भाजपा के प्रदर्शन और तमिलनाडु में अभिनेता से नेता बने विजय के उभार को उल्लेखनीय बताया।
मोदी के विकास मॉडल की खासियत क्या है?
सोल्हेम के अनुसार, मोदी का विकास मॉडल आधुनिकता और परंपरा का संतुलन बनाता है — जिसमें भारत तेज़ी से प्रगति करे, लेकिन अपनी सभ्यतागत पहचान, विशेषकर हिंदू धर्म से जुड़ी सांस्कृतिक जड़ों को बनाए रखे। यह पश्चिमी विकास के एकरेखीय मॉडल से अलग रास्ता है।