सोना ₹1,45,802 और चांदी ₹2,29,057 पर फिसली; भू-राजनीतिक तनाव घटने से MCX पर 3% से अधिक गिरावट
सारांश
मुख्य बातें
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर शुक्रवार, 19 जून को कीमती धातुओं में लगातार तीसरे सत्र में बिकवाली का दबाव बना रहा, जब भू-राजनीतिक तनाव में कमी के संकेतों के बीच सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) की मांग कमज़ोर पड़ गई। अगस्त डिलीवरी वाला सोना ₹3,507 यानी 2.35% टूटकर ₹1,45,802 प्रति 10 ग्राम पर आ गया, जबकि जुलाई डिलीवरी वाली चांदी 3.58% की गिरावट के साथ ₹2,29,057 प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती दिखी।
MCX पर सोने-चांदी का हाल
सोने का पिछला बंद भाव ₹1,49,309 प्रति 10 ग्राम था। आज यह ₹1,47,175 पर खुला और गिरते-गिरते ₹1,45,800 के दिन के निम्नतम स्तर तक पहुँच गया — एकल सत्र में ₹3,509 की चोट। चांदी ने भी इसी रुझान को दोहराया: पिछले बंद ₹2,37,572 से ₹5,201 या 2.1% गिरकर ₹2,32,371 पर खुली और दिन के निचले स्तर ₹2,28,800 तक लुढ़की, जो 3.6% की गिरावट दर्शाता है।
वैश्विक बाज़ार में भी कमज़ोरी
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कॉमेक्स गोल्ड 2.4% की गिरावट के साथ $4,141 प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा था, जबकि कॉमेक्स सिल्वर 4.3% टूटकर $63.45 प्रति औंस पर आ गया। बाज़ार विश्लेषकों के अनुसार, जनवरी में सोना अपने सर्वकालिक उच्च स्तर $5,595 पर था, और तब से अब तक इसमें करीब 24% की गिरावट दर्ज हो चुकी है।
गिरावट के पीछे क्या कारण
एक बाज़ार विशेषज्ञ के अनुसार, इस बिकवाली के पीछे कई कारण एक साथ सक्रिय हैं — तेल की कीमतों में उछाल से महंगाई की आशंका, ब्याज दरों में बढ़ोतरी का माहौल, अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की नीतिगत कठोरता, डॉलर का मज़बूत होना और लीवरेज्ड पोज़ीशन का खत्म होना। विशेषज्ञ ने स्पष्ट किया कि ये उतार-चढ़ाव चक्रीय प्रकृति के हैं, न कि किसी बुनियादी कमज़ोरी का संकेत।
दीर्घकालिक निवेशकों के लिए संदेश
विशेषज्ञ ने आगाह किया कि जो कोई भी यह दावा करे कि कीमत अब तल पर पहुँच चुकी है, वह महज़ अनुमान लगा रहा है। उन्होंने कहा कि सोने के बुनियादी समर्थक कारक — ऐतिहासिक रूप से उच्च सरकारी कर्ज़, केंद्रीय बैंकों द्वारा निरंतर सोना संचय और रिज़र्व करेंसी की विश्वसनीयता पर उठते सवाल — अभी भी बरकरार हैं। उन्होंने 5 वर्ष या उससे अधिक के निवेश क्षितिज वाले निवेशकों को सोने में आंशिक आवंटन पर विचार करने की सलाह दी, हालांकि इसे निवेश परामर्श के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाज़ारों में जोखिम-भूख धीरे-धीरे लौट रही है और निवेशक सुरक्षित परिसंपत्तियों से बाहर निकल रहे हैं। आने वाले सत्रों में फेड की टिप्पणियाँ और भू-राजनीतिक घटनाक्रम सोने-चांदी की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।