RBI जून 2027 तक तीन बार बढ़ा सकता है रेपो रेट, 75 आधार अंक की वृद्धि संभव: गोल्डमैन सैश
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) जून 2027 तक कुल 75 आधार अंक की रेपो रेट वृद्धि कर सकता है — यानी तीन अलग अलग बैठकों में ब्याज दरें ऊपर जा सकती हैं। यह अनुमान गोल्डमैन सैश के भारत के लिए मुख्य अर्थशास्त्री शांतनु सेनगुप्ता ने 9 अक्टूबर 2026 को दिया। सेनगुप्ता के अनुसार, इन दर वृद्धियों के बावजूद भारत की आर्थिक विकास दर लगभग 7 प्रतिशत बनी रह सकती है।
रेपो रेट वृद्धि का संभावित रोडमैप
सेनगुप्ता ने स्पष्ट किया कि RBI दिसंबर, फरवरी और अप्रैल/जून की मौद्रिक नीति बैठकों में दरें बढ़ा सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति से निपटने के लिए कड़े रुख पर हैं और भारत में महंगाई के दबाव बने हुए हैं। गोल्डमैन सैश का यह आकलन बाज़ार की उन उम्मीदों से अलग है जो RBI से जल्द राहत की अपेक्षा रखती हैं।
अल नीनो: 2027 के लिए बड़ा जोखिम
सेनगुप्ता ने अल नीनो को 2027 की आर्थिक चुनौतियों में सबसे अधिक कम आंके गए जोखिम के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि अल नीनो, जिसे कई वित्तीय बाज़ार भागीदारों ने अभी तक पूरी तरह ध्यान में नहीं रखा है, 2023 की तुलना में 2027 के लिए कहीं बड़ा जोखिम है।
उनका कहना है कि खरीफ (ग्रीष्मकालीन) फसल पर इसका असर सीमित रह सकता है और मौजूदा इन्वेंट्री स्तर निकट भविष्य में महंगाई के दबाव को रोकने में मदद करेंगे। लेकिन तस्वीर बाद में बिगड़ सकती है — सेनगुप्ता के शब्दों में: "जलाशयों में पानी का कम स्तर रबी (शीतकालीन) फसल को नुकसान पहुँचा सकता है।" इसके साथ ही 2027 तक अनाज भंडार घटने से महंगाई और बढ़ सकती है।
कच्चा तेल और विदेशी निवेश: दो अतिरिक्त चिंताएँ
गोल्डमैन सैश के अनुमानों के अनुसार कच्चे तेल की कीमतें $85 से $95 प्रति बैरल के बीच रहने की संभावना है। सेनगुप्ता ने आगाह किया कि यदि कीमतें $100 प्रति बैरल या उससे ऊपर स्थायी रूप से बनी रहती हैं, तो यह आर्थिक विकास और मुद्रास्फीति दोनों के लिए गंभीर बाधा बनेगी।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) के मोर्चे पर भी दबाव जारी है। सेनगुप्ता ने बताया कि विदेशी निवेशक भारत से पूँजी निकालकर अमेरिका, चीन, दक्षिण कोरिया और ताइवान में एआई (AI) से जुड़े अवसरों में लगा रहे हैं। उन्होंने कहा: "दुनिया एआई की ओर बढ़ रही है। इस समय हमारे सामने जो चुनौतियाँ हैं, वे मुख्यतः बाहरी हैं।"
कमाई और बाज़ार परिदृश्य
सेनगुप्ता के अनुसार, इस वर्ष कॉर्पोरेट कमाई में बढ़ोतरी 'मिड टीन' प्रतिशत की सीमा में रहने की उम्मीद है। गौरतलब है कि यह अनुमान तब आया है जब भारतीय शेयर बाज़ार वैश्विक अनिश्चितता के बीच दबाव में है और घरेलू निवेशकों की भागीदारी ही बाज़ार को थामे हुए है।
आगे क्या होगा
RBI की अगली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक दिसंबर में प्रस्तावित है, जो पहली संभावित दर वृद्धि का पहला अवसर होगी। बाज़ार विश्लेषकों की नज़र मानसून के अंतिम आँकड़ों, खुदरा महंगाई (CPI) के अगले प्रिंट और वैश्विक कच्चे तेल की चाल पर टिकी रहेगी, क्योंकि ये तीनों मिलकर RBI के निर्णय को आकार देंगे।