6 अगस्त 2026
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आरबीआई ने जारी की वित्त वर्ष 2026-27 की अपर लेयर एनबीएफसी सूची, 17 कंपनियां शामिल; REC, PFC, IRFC पहली बार

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आरबीआई ने जारी की वित्त वर्ष 2026-27 की अपर लेयर एनबीएफसी सूची, 17 कंपनियां शामिल; REC, PFC, IRFC पहली बार

सारांश

RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 की अपर लेयर NBFC सूची में 17 कंपनियों को शामिल किया — पिछली बार से दो अधिक। REC, PFC और IRFC पहली बार इस सूची में आए। टाटा संस का डी-रजिस्ट्रेशन आवेदन अभी विचाराधीन है, पर कंपनी सूची में बरकरार है।

मुख्य बातें

RBI ने 6 अगस्त 2026 को वित्त वर्ष 2026-27 की अपर लेयर NBFC सूची जारी की, जिसमें 17 कंपनियाँ शामिल हैं — पिछले दो वर्षों की 15 की तुलना में दो अधिक।
REC लिमिटेड , PFC और IRFC पहली बार अपर लेयर सूची में शामिल किए गए।
टाटा संस का डी-रजिस्ट्रेशन आवेदन RBI के विचाराधीन है, लेकिन कंपनी को फिर से सूची में बनाए रखा गया है।
अपर लेयर की पात्रता के लिए न्यूनतम ₹1 लाख करोड़ की प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियाँ अनिवार्य।
पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस और सम्मान कैपिटल सूची से बाहर, लेकिन 5 वर्ष के नियम के तहत अपर लेयर के नियामकीय प्रावधानों के दायरे में बनी रहेंगी।
वर्ष 2025-26 में मानदंडों की समीक्षा के कारण उस वर्ष के लिए अलग सूची जारी नहीं की गई थी।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 6 अगस्त 2026 को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपर लेयर गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) की अद्यतन सूची प्रकाशित की, जिसमें इस बार 17 कंपनियों को स्थान दिया गया है — जो वित्त वर्ष 2024-25 और 2023-24 की 15 कंपनियों की तुलना में दो अधिक है। अपर लेयर में वर्गीकृत संस्थाओं पर RBI के सबसे कड़े नियामकीय प्रावधान लागू होते हैं।

नई सूची में क्या बदला

इस वर्ष की सबसे बड़ी नवीनता यह है कि REC लिमिटेड, पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (PFC) और इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (IRFC) को पहली बार अपर लेयर सूची में सम्मिलित किया गया है। इन तीन सार्वजनिक क्षेत्र की वित्तीय संस्थाओं के जुड़ने से ही सूची की संख्या 15 से बढ़कर 17 हुई है।

सूची में पहले से मौजूद प्रमुख कंपनियों में बजाज फाइनेंस, श्रीराम फाइनेंस, एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस, टाटा कैपिटल और टाटा संस शामिल हैं।

टाटा संस पर यथास्थिति बरकरार

RBI ने स्पष्ट किया है कि टाटा संस को एक बार फिर अपर लेयर सूची में बनाए रखा गया है। केंद्रीय बैंक ने यह भी रेखांकित किया कि यह वर्गीकरण कंपनी द्वारा दायर डी-रजिस्ट्रेशन (पंजीकरण निरस्तीकरण) आवेदन के अंतिम निर्णय से स्वतंत्र है — वह आवेदन अभी RBI के विचाराधीन है। गौरतलब है कि जनवरी 2025 में जारी पिछली सूची में भी RBI ने यही स्थिति स्पष्ट की थी, जो दर्शाता है कि टाटा संस का डी-रजिस्ट्रेशन मामला अभी अनिर्णीत है।

मानदंडों की समीक्षा और 2025-26 में सूची न आने का कारण

RBI ने बताया कि वर्ष 2025-26 के दौरान अपर लेयर NBFC की पहचान के मानकों की व्यापक समीक्षा की गई थी, इसीलिए उस वित्त वर्ष के लिए अलग से सूची जारी नहीं की गई। संशोधित मानदंडों के अनुसार, अब केवल उन्हीं NBFC को अपर लेयर में रखा जाता है जिनके पास कम से कम ₹1 लाख करोड़ (एक ट्रिलियन रुपये) की प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियाँ (Assets Under Management) हों। वित्त वर्ष 2026-27 की यह सूची इन्हीं नए नियमों के आधार पर तैयार की गई है।

पीएनबी हाउसिंग और सम्मान कैपिटल सूची से बाहर, फिर भी नियमों के दायरे में

पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस और सम्मान कैपिटल इस बार निर्धारित मानदंडों को पूरा नहीं कर सकीं और इन्हें नई सूची में शामिल नहीं किया गया। हालांकि, RBI के नियमों के अनुसार एक बार अपर लेयर में वर्गीकृत होने पर कोई भी NBFC कम से कम 5 वर्षों तक उस श्रेणी के कड़े नियामकीय प्रावधानों के अधीन रहती है — भले ही बाद के वर्षों में वह तय मानदंडों को पूरा न करे। इस प्रावधान के चलते ये दोनों कंपनियाँ सूची में नाम न होने के बावजूद अपर लेयर के अनुपालन दायित्वों से मुक्त नहीं होंगी।

वित्तीय स्थिरता के लिए नियामकीय महत्व

RBI का मानना है कि बड़ी NBFC पर मज़बूत नियामकीय निगरानी बनाए रखना देश की वित्तीय प्रणाली की स्थिरता और पारदर्शिता के लिए अनिवार्य है। अपर लेयर की कंपनियों को उन्नत जोखिम प्रबंधन ढाँचा, सख्त अनुपालन मानक और नियमित रिपोर्टिंग दायित्वों का पालन करना होता है। यह ऐसे समय में आया है जब RBI गैर-बैंकिंग क्षेत्र में प्रणालीगत जोखिमों की निगरानी को लगातार कड़ा कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

PFC और IRFC जैसी सरकारी वित्तीय संस्थाओं का अपर लेयर में आना संकेत देता है कि RBI अब सार्वजनिक क्षेत्र की बड़ी NBFC को भी उसी कड़ी निगरानी के दायरे में लाना चाहता है जो अब तक मुख्यतः निजी क्षेत्र पर लागू होती थी — यह नीतिगत दृष्टि से महत्वपूर्ण बदलाव है। टाटा संस का मामला अलग पहेली है: डी-रजिस्ट्रेशन आवेदन वर्षों से लंबित है, और हर बार सूची में बने रहने से यह सवाल उठता है कि RBI इस पर निर्णय में इतनी सतर्कता क्यों बरत रहा है। पीएनबी हाउसिंग और सम्मान कैपिटल का सूची से बाहर होना तकनीकी रूप से राहत की बात लग सकती है, लेकिन 5 वर्षीय नियामकीय 'लॉक-इन' यह सुनिश्चित करता है कि अनुपालन बोझ तत्काल कम नहीं होगा — जो नियामक अनुशासन की दृष्टि से सही संतुलन है।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

RBI की अपर लेयर NBFC सूची क्या होती है?
RBI अपनी स्केल-बेस्ड रेगुलेशन (SBR) व्यवस्था के तहत बड़ी NBFC को चार स्तरों में वर्गीकृत करता है, जिनमें 'अपर लेयर' सबसे कड़े नियामकीय प्रावधानों वाली श्रेणी है। इस श्रेणी में वे NBFC आती हैं जिनके पास कम से कम ₹1 लाख करोड़ की प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियाँ हों और जो प्रणालीगत महत्व की दृष्टि से जोखिम रखती हों।
वित्त वर्ष 2026-27 की अपर लेयर NBFC सूची में कौन-कौन सी कंपनियाँ नई हैं?
इस बार REC लिमिटेड , पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (PFC) और इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (IRFC) पहली बार अपर लेयर सूची में शामिल हुई हैं। इन्हीं तीन कंपनियों के जुड़ने से सूची की संख्या 15 से बढ़कर 17 हो गई है।
टाटा संस का डी-रजिस्ट्रेशन आवेदन क्या है और इसकी स्थिति क्या है?
टाटा संस ने RBI के पास NBFC पंजीकरण निरस्त कराने (डी-रजिस्ट्रेशन) का आवेदन दिया हुआ है, जो अभी विचाराधीन है। RBI ने स्पष्ट किया है कि अपर लेयर सूची में शामिल किया जाना इस आवेदन के अंतिम निर्णय से अलग और स्वतंत्र प्रक्रिया है।
पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस सूची से बाहर होने के बावजूद नियमों के दायरे में क्यों रहेगी?
RBI के नियमों के अनुसार, एक बार अपर लेयर में वर्गीकृत होने पर कोई भी NBFC कम से कम 5 वर्षों तक उस श्रेणी के नियामकीय प्रावधानों के अधीन रहती है। इसलिए पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस और सम्मान कैपिटल — सूची में नाम न होने के बावजूद — अपर लेयर के अनुपालन दायित्वों से तत्काल मुक्त नहीं होंगी।
2025-26 में अपर लेयर NBFC की सूची क्यों नहीं जारी की गई थी?
RBI ने वर्ष 2025-26 के दौरान अपर लेयर NBFC पहचान के मानदंडों की व्यापक समीक्षा की थी, इसी कारण उस वित्त वर्ष के लिए अलग से सूची प्रकाशित नहीं की गई। संशोधित मानदंडों के आधार पर अब वित्त वर्ष 2026-27 की सूची जारी की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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