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सरल एआई से विज्ञान संचार क्रांति: CSIR-NISCPR ने रिसर्च पेपर को वीडियो में बदलने की पहल शुरू की

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सरल एआई से विज्ञान संचार क्रांति: CSIR-NISCPR ने रिसर्च पेपर को वीडियो में बदलने की पहल शुरू की

सारांश

रिसर्च पेपर अब केवल पत्रिकाओं तक सीमित नहीं रहेंगे — CSIR-NISCPR ने 'सरल एआई' अपनाकर जटिल शोध को आम लोगों के लिए वीडियो में बदलने की शुरुआत की है। ANRF की इस पहल को डॉ. जितेंद्र सिंह का समर्थन मिला है और 90 से अधिक शोधकर्ताओं ने इसकी पहली वर्कशॉप में भाग लिया।

मुख्य बातें

CSIR-NISCPR ने 15 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में 'सरल एआई' को विज्ञान संचार के लिए अपनाने की घोषणा की।
सरल एआई , अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) की पहल है जो रिसर्च पेपर को छोटे वीडियो में बदलती है।
जितेंद्र सिंह ने संस्थानों को इस टूल को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
शिवकुमार कल्याणरमन ने NISCPR के दौरे पर सरल एआई का परिचय दिया।
सरल एआई पर आयोजित वर्कशॉप में संपादकों और शोधकर्ताओं सहित 90 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
संस्थान की निदेशक डॉ.
गीता वाणी रायसम की अगुवाई में डिजिटल प्लेटफॉर्म के ज़रिए विज्ञान की पहुँच बढ़ाने पर ज़ोर।

सीएसआईआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस कम्युनिकेशन एंड पॉलिसी रिसर्च (CSIR-NISCPR) ने 15 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 'सरल एआई' को विज्ञान संचार के लिए अपनाने की घोषणा की — एक ऐसा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित टूल जो प्रकाशित रिसर्च पेपर को सरल और आकर्षक वीडियो में परिवर्तित करता है। यह पहल खासकर छात्रों और आम जनता तक वैज्ञानिक ज्ञान को सुलभ बनाने के उद्देश्य से की गई है।

सरल एआई क्या है और यह कैसे काम करता है

सरल एआई, अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) की एक पहल है, जिसका मुख्यालय नई दिल्ली में है। यह टूल वैज्ञानिक पत्रिकाओं में प्रकाशित जटिल शोध को छोटे, सहज और दिलचस्प वीडियो प्रारूप में ढालता है। इसका उद्देश्य है कि रिसर्च की पहुँच केवल शोध समुदाय तक सीमित न रहकर समाज के हर वर्ग तक हो।

आधिकारिक बयान के अनुसार, यह पहल विज्ञान और अनुसंधान के प्रभावी संचार के लिए नई तकनीकों को अपनाने पर सरकार के बल के अनुरूप है — एक ऐसे दौर में जब डिजिटल माध्यमों की पहुँच तेजी से बढ़ रही है।

मंत्री और ANRF CEO का प्रोत्साहन

विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने हाल ही में विभिन्न संस्थानों को सरल एआई को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है। इस संदर्भ में CSIR-NISCPR इसे अपनाने में अग्रणी संगठन के रूप में उभरा है।

ANRF के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. शिवकुमार कल्याणरमन ने NISCPR के दौरे के दौरान सरल एआई का विस्तृत परिचय दिया। उन्होंने संस्थान को सलाह दी कि वे इस टूल का उपयोग करके जटिल शोध को आम लोगों तक प्रभावी ढंग से पहुँचाएं। कल्याणरमन ने कहा, 'रिसर्च सिर्फ पब्लिकेशन तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए। सरल एआई जैसे टूल्स रिसर्चर्स और संस्थानों की मदद कर सकते हैं, ताकि वे अपने काम को सिर्फ पेपर्स तक सीमित न रखकर ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुँचा सकें और भारतीय रिसर्च के असर को बढ़ा सकें।'

NISCPR में व्यावहारिक कार्यशाला का आयोजन

इस पहल को ज़मीनी स्तर पर लागू करने की दिशा में CSIR-NISCPR ने हाल ही में सरल एआई पर एक व्यावहारिक कार्यशाला (वर्कशॉप) का आयोजन किया। इस कार्यशाला में पत्रिकाओं के संपादकों और शोधकर्ताओं सहित 90 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत में वैज्ञानिक प्रकाशनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन उनकी सामाजिक पहुँच अभी भी सीमित रही है। CSIR-NISCPR की निदेशक डॉ. गीता वाणी रायसम की अगुवाई में संस्थान विज्ञान संचार को डिजिटल और तकनीकी माध्यमों से सशक्त बनाने की दिशा में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।

आम जनता और छात्रों पर असर

सरल एआई का सबसे बड़ा लाभ उन छात्रों और जिज्ञासु नागरिकों को होगा जो वैज्ञानिक शोध को समझना तो चाहते हैं, लेकिन तकनीकी भाषा उनके लिए बाधा बनती है। वीडियो प्रारूप में रिसर्च उपलब्ध होने से सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों पर इसका प्रसार भी सरल होगा।

गौरतलब है कि यह पहल ANRF के उस व्यापक लक्ष्य से प्रेरित है जिसके तहत भारतीय शोध के सामाजिक प्रभाव को बढ़ाना और ज्ञान को लोकतांत्रिक बनाना प्राथमिकता है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि देश के अन्य शोध संस्थान किस गति से इस मॉडल को अपनाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उनका सामाजिक प्रभाव अभी भी कमज़ोर रहा है — सरल एआई इस खाई को पाटने का प्रयास करता है। असली परीक्षण यह है कि क्या यह टूल केवल एक शोकेस पहल बनकर रह जाता है या देश के सैकड़ों अन्य शोध संस्थानों में व्यापक रूप से लागू होता है। 90 प्रतिभागियों की वर्कशॉप उत्साहजनक शुरुआत है, लेकिन स्केलेबिलिटी और बहुभाषिक विस्तार — खासकर क्षेत्रीय भाषाओं में — इस पहल की वास्तविक सफलता की कसौटी होगी।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सरल एआई क्या है और इसे किसने बनाया है?
सरल एआई, अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) की एक पहल है जो प्रकाशित रिसर्च पेपर को छोटे और सहज वीडियो में परिवर्तित करती है। इसका उद्देश्य जटिल वैज्ञानिक शोध को छात्रों और आम जनता के लिए सुलभ बनाना है।
CSIR-NISCPR ने सरल एआई क्यों अपनाया?
CSIR-NISCPR ने विज्ञान संचार की पहुँच और प्रभाव को बढ़ाने के लिए सरल एआई अपनाया है। विज्ञान मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के प्रोत्साहन और ANRF के सामाजिक प्रसार लक्ष्यों के अनुरूप यह कदम उठाया गया है।
सरल एआई की वर्कशॉप में कितने लोगों ने भाग लिया?
CSIR-NISCPR द्वारा आयोजित सरल एआई की व्यावहारिक वर्कशॉप में पत्रिकाओं के संपादकों और शोधकर्ताओं सहित 90 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
सरल एआई से आम जनता को क्या फायदा होगा?
सरल एआई के ज़रिए जटिल वैज्ञानिक शोध को सरल वीडियो प्रारूप में उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे छात्र और आम नागरिक तकनीकी भाषा की बाधा के बिना नवीनतम अनुसंधान को समझ सकेंगे। सोशल मीडिया पर भी इसका प्रसार आसान होगा।
ANRF के CEO ने संस्थानों को क्या सलाह दी?
ANRF के CEO डॉ. शिवकुमार कल्याणरमन ने संस्थानों को सलाह दी कि वे सरल एआई का उपयोग करके शोध को केवल पेपर्स तक सीमित न रखें, बल्कि इसे व्यापक समाज तक पहुँचाएं ताकि भारतीय अनुसंधान का असर बढ़ सके।
राष्ट्र प्रेस
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