सरल एआई से विज्ञान संचार क्रांति: CSIR-NISCPR ने रिसर्च पेपर को वीडियो में बदलने की पहल शुरू की
सारांश
मुख्य बातें
सीएसआईआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस कम्युनिकेशन एंड पॉलिसी रिसर्च (CSIR-NISCPR) ने 15 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 'सरल एआई' को विज्ञान संचार के लिए अपनाने की घोषणा की — एक ऐसा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित टूल जो प्रकाशित रिसर्च पेपर को सरल और आकर्षक वीडियो में परिवर्तित करता है। यह पहल खासकर छात्रों और आम जनता तक वैज्ञानिक ज्ञान को सुलभ बनाने के उद्देश्य से की गई है।
सरल एआई क्या है और यह कैसे काम करता है
सरल एआई, अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) की एक पहल है, जिसका मुख्यालय नई दिल्ली में है। यह टूल वैज्ञानिक पत्रिकाओं में प्रकाशित जटिल शोध को छोटे, सहज और दिलचस्प वीडियो प्रारूप में ढालता है। इसका उद्देश्य है कि रिसर्च की पहुँच केवल शोध समुदाय तक सीमित न रहकर समाज के हर वर्ग तक हो।
आधिकारिक बयान के अनुसार, यह पहल विज्ञान और अनुसंधान के प्रभावी संचार के लिए नई तकनीकों को अपनाने पर सरकार के बल के अनुरूप है — एक ऐसे दौर में जब डिजिटल माध्यमों की पहुँच तेजी से बढ़ रही है।
मंत्री और ANRF CEO का प्रोत्साहन
विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने हाल ही में विभिन्न संस्थानों को सरल एआई को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है। इस संदर्भ में CSIR-NISCPR इसे अपनाने में अग्रणी संगठन के रूप में उभरा है।
ANRF के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. शिवकुमार कल्याणरमन ने NISCPR के दौरे के दौरान सरल एआई का विस्तृत परिचय दिया। उन्होंने संस्थान को सलाह दी कि वे इस टूल का उपयोग करके जटिल शोध को आम लोगों तक प्रभावी ढंग से पहुँचाएं। कल्याणरमन ने कहा, 'रिसर्च सिर्फ पब्लिकेशन तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए। सरल एआई जैसे टूल्स रिसर्चर्स और संस्थानों की मदद कर सकते हैं, ताकि वे अपने काम को सिर्फ पेपर्स तक सीमित न रखकर ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुँचा सकें और भारतीय रिसर्च के असर को बढ़ा सकें।'
NISCPR में व्यावहारिक कार्यशाला का आयोजन
इस पहल को ज़मीनी स्तर पर लागू करने की दिशा में CSIR-NISCPR ने हाल ही में सरल एआई पर एक व्यावहारिक कार्यशाला (वर्कशॉप) का आयोजन किया। इस कार्यशाला में पत्रिकाओं के संपादकों और शोधकर्ताओं सहित 90 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत में वैज्ञानिक प्रकाशनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन उनकी सामाजिक पहुँच अभी भी सीमित रही है। CSIR-NISCPR की निदेशक डॉ. गीता वाणी रायसम की अगुवाई में संस्थान विज्ञान संचार को डिजिटल और तकनीकी माध्यमों से सशक्त बनाने की दिशा में सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।
आम जनता और छात्रों पर असर
सरल एआई का सबसे बड़ा लाभ उन छात्रों और जिज्ञासु नागरिकों को होगा जो वैज्ञानिक शोध को समझना तो चाहते हैं, लेकिन तकनीकी भाषा उनके लिए बाधा बनती है। वीडियो प्रारूप में रिसर्च उपलब्ध होने से सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों पर इसका प्रसार भी सरल होगा।
गौरतलब है कि यह पहल ANRF के उस व्यापक लक्ष्य से प्रेरित है जिसके तहत भारतीय शोध के सामाजिक प्रभाव को बढ़ाना और ज्ञान को लोकतांत्रिक बनाना प्राथमिकता है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि देश के अन्य शोध संस्थान किस गति से इस मॉडल को अपनाते हैं।