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भारतवंशी कनिष्क नारायण बने ब्रिटेन के एआई मंत्री, कैबिनेट बैठकों में भी होंगे शामिल

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भारतवंशी कनिष्क नारायण बने ब्रिटेन के एआई मंत्री, कैबिनेट बैठकों में भी होंगे शामिल

सारांश

बिहार में जन्मे और वेल्स में पले-बढ़े कनिष्क नारायण अब ब्रिटेन की एआई नीति के सूत्रधार बन गए हैं। ऑक्सफोर्ड और स्टैनफोर्ड से पढ़े इस भारतवंशी सांसद को प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने कैबिनेट में शामिल किया — यह नियुक्ति ब्रिटेन की एआई महत्वाकांक्षा और भारतीय डायस्पोरा की बढ़ती राजनीतिक पहुँच, दोनों का प्रतीक है।

मुख्य बातें

कनिष्क नारायण को 21 जुलाई 2026 को ब्रिटेन के एआई मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया।
उन्हें कैबिनेट ऑफिस और डिपार्टमेंट फॉर बिजनेस, इनोवेशन, साइंस एंड ट्रेड में संयुक्त रूप से राज्य मंत्री बनाया गया है।
प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने उन्हें कैबिनेट बैठकों में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया।
नारायण इससे पहले सितंबर 2025 में कीर स्टार्मर सरकार में एआई और ऑनलाइन सुरक्षा मंत्री रह चुके हैं।
बिहार में जन्मे नारायण 12 वर्ष की उम्र में कार्डिफ, वेल्स गए; ऑक्सफोर्ड और स्टैनफोर्ड से शिक्षित हैं।

भारतीय मूल के ब्रिटिश सांसद कनिष्क नारायण को 21 जुलाई 2026 को ब्रिटेन सरकार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) मंत्री नियुक्त किया गया है। उन्हें कैबिनेट ऑफिस और डिपार्टमेंट फॉर बिजनेस, इनोवेशन, साइंस एंड ट्रेड में संयुक्त रूप से राज्य मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस नियुक्ति के साथ वह अब ब्रिटिश कैबिनेट की बैठकों में भी भाग लेंगे।

नियुक्ति की घोषणा

10 डाउनिंग स्ट्रीट के आधिकारिक एक्स अकाउंट के माध्यम से इस नियुक्ति की जानकारी दी गई। ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने नारायण को कैबिनेट में शामिल होने का निमंत्रण दिया। यह नियुक्ति नई सरकार की एआई नीति को केंद्र में रखने की प्राथमिकता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।

गौरतलब है कि यह नारायण की एआई क्षेत्र में दूसरी बड़ी सरकारी जिम्मेदारी है — इससे पहले सितंबर 2025 में तत्कालीन प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की सरकार में भी उन्हें एआई और ऑनलाइन सुरक्षा मंत्री नियुक्त किया गया था।

नारायण का एआई पर दृष्टिकोण

नियुक्ति के बाद नारायण ने अपने एक्स अकाउंट पर कहा कि एआई मानव इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण तकनीकों में से एक हो सकती है और इसका प्रभाव अन्य सभी तकनीकी बदलावों से कहीं अधिक व्यापक होगा। उन्होंने लिखा, 'एआई का सकारात्मक प्रभाव बेहद व्यापक हो सकता है, जिसमें ब्रिटेन का पुनः औद्योगिकीकरण, राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूती और सार्वजनिक सेवाओं में बड़ा बदलाव शामिल है।'

साथ ही उन्होंने एआई से जुड़े जोखिमों को भी स्वीकार किया। नारायण ने कहा, 'नौकरियों, बदलाव की गति और समाज पर इसके प्रभाव को लेकर ब्रिटिश जनता की चिंताएं स्वाभाविक हैं।' उनके अनुसार, 'सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि एआई का विकास हो रहा है। देशों के पास एक सीमित समय है यह तय करने के लिए कि वे एआई को आकार देंगे या फिर एआई उन्हें आकार देगा। ब्रिटेन इस समय इसी निर्णायक दौर में है।'

वेल्स से जुड़ाव और व्यक्तिगत सफर

नारायण ने अपनी नियुक्ति को वेल्स के लोगों से जोड़ते हुए कहा कि वेल ऑफ ग्लैमरगन क्षेत्र ने उनके परिवार को अवसर दिया और उन्हें ब्रिटेन की संसद तक पहुँचने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि वेल्स ने उन्हें देश के पहले जातीय अल्पसंख्यक सांसदों में से एक बनने और अब कैबिनेट में योगदान देने का अवसर दिया।

नारायण ने स्पष्ट किया कि वह अपनी नई जिम्मेदारी में तेजी, महत्वाकांक्षा और स्पष्ट लक्ष्य के साथ काम करेंगे तथा एआई के विकास और वैश्विक नीति निर्माण में ब्रिटेन की भूमिका को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करेंगे।

कनिष्क नारायण: एक परिचय

कनिष्क नारायण का जन्म बिहार में हुआ था। वह 12 वर्ष की उम्र में अपने परिवार के साथ कार्डिफ, वेल्स चले गए। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कैथेज हाई स्कूल से पूरी की। इसके बाद उन्होंने प्रतिष्ठित ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा हासिल की और स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से एमबीए की डिग्री प्राप्त की।

यह नियुक्ति ऐसे समय में आई है जब वैश्विक स्तर पर देश एआई नीति निर्माण में एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ में हैं। ब्रिटेन अब इस क्षेत्र में एक भारतवंशी नेता के नेतृत्व में अपनी रणनीति को नई दिशा देने की तैयारी में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सर्वोच्च राजनीतिक प्राथमिकता मानता है। हालांकि सवाल यह है कि क्या एक मंत्री पद की नियुक्ति मात्र से ब्रिटेन अमेरिका और चीन की एआई दौड़ में पिछड़ने की भरपाई कर सकता है। नारायण के लिए चुनौती दोहरी है — एक ओर एआई से उत्पन्न रोजगार संकट की चिंताओं को संबोधित करना, दूसरी ओर वैश्विक नीति निर्माण में ब्रिटेन की साख बहाल करना। भारतीय डायस्पोरा के नजरिए से यह नियुक्ति ऋषि सुनक के बाद एक और मील का पत्थर है, लेकिन असली कसौटी नीतिगत परिणाम होंगे, न कि पहचान।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कनिष्क नारायण को ब्रिटेन में कौन-सा पद मिला है?
कनिष्क नारायण को ब्रिटेन सरकार में एआई मंत्री नियुक्त किया गया है। उन्हें कैबिनेट ऑफिस और डिपार्टमेंट फॉर बिजनेस, इनोवेशन, साइंस एंड ट्रेड में संयुक्त रूप से राज्य मंत्री की जिम्मेदारी दी गई है और वह कैबिनेट बैठकों में भी भाग लेंगे।
कनिष्क नारायण कौन हैं और उनकी पृष्ठभूमि क्या है?
कनिष्क नारायण बिहार में जन्मे भारतवंशी ब्रिटिश सांसद हैं जो 12 वर्ष की उम्र में कार्डिफ, वेल्स चले गए थे। उन्होंने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा और स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से एमबीए किया है, और वेल ऑफ ग्लैमरगन से सांसद चुने गए हैं।
क्या कनिष्क नारायण पहले भी एआई मंत्री रह चुके हैं?
हाँ, सितंबर 2025 में तत्कालीन प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की सरकार में उन्हें एआई और ऑनलाइन सुरक्षा मंत्री नियुक्त किया गया था। यह उनकी इस क्षेत्र में दूसरी बड़ी सरकारी जिम्मेदारी है।
नारायण एआई के बारे में क्या सोचते हैं?
नारायण का मानना है कि एआई मानव इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण तकनीकों में से एक हो सकती है। उन्होंने कहा है कि देशों के पास सीमित समय है यह तय करने के लिए कि वे एआई को आकार देंगे या एआई उन्हें — और ब्रिटेन इस समय उसी निर्णायक दौर में है।
इस नियुक्ति की घोषणा कैसे की गई?
इस नियुक्ति की घोषणा 10 डाउनिंग स्ट्रीट के आधिकारिक एक्स अकाउंट के माध्यम से की गई। प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने नारायण को कैबिनेट में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।
राष्ट्र प्रेस
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