सेंसेक्स 706 अंक उछला, विधानसभा चुनावों में BJP की बढ़त से बंगाल की कंपनियों में 6% तक तेजी
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई में 4 मई को भारतीय शेयर बाजार में जोरदार तेजी देखी गई, जब पाँच राज्यों के विधानसभा चुनाव रुझानों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) तीन राज्यों में आगे दिखी। दोपहर 12 बजे तक BSE सेंसेक्स 706 अंक (0.92%) की मजबूती के साथ 77,616 और निफ्टी 211 अंक (0.88%) की बढ़त के साथ 24,209 पर कारोबार कर रहा था। पश्चिम बंगाल मुख्यालय वाली कंपनियों में निवेशकों की विशेष दिलचस्पी के चलते इन शेयरों में 3% से 6% तक की तेजी दर्ज हुई।
बाजार में चौतरफा तेजी
लार्जकैप शेयरों के साथ-साथ मिड और स्मॉलकैप में भी खरीदारी का जोर रहा। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 155 अंक (0.86%) की तेजी के साथ 18,161 और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 564 अंक (0.85%) की बढ़त के साथ 60,349 पर था। शुरुआती कारोबार में निफ्टी रियल्टी और निफ्टी आईटी टॉप गेनर रहे, जबकि निफ्टी ऑटो, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी मेटल, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और निफ्टी फार्मा सहित लगभग सभी सूचकांक हरे निशान में थे।
बंगाल से जुड़ी कंपनियों में जोरदार उछाल
चुनाव रुझानों में असम, पश्चिम बंगाल और पांडिचेरी में BJP की बढ़त के बीच पश्चिम बंगाल में कारोबार करने वाली कंपनियों पर निवेशकों का फोकस केंद्रित रहा। सेंको गोल्ड का शेयर 6% की तेजी के साथ ₹330, एक्साइड इंडस्ट्रीज करीब 5% उछलकर ₹378, बिड़ला कॉर्पोरेशन 5% से अधिक की बढ़त के साथ ₹961, बंधन बैंक 4% से अधिक के उछाल के साथ ₹208, लक्स इंडस्ट्रीज करीब 3.5% की तेजी के साथ ₹1,444 और इमामी का शेयर 3% की बढ़त के साथ ₹457 पर कारोबार कर रहा था।
बाजार विशेषज्ञों की राय
जानकारों के अनुसार, विधानसभा चुनावों — विशेषकर पश्चिम बंगाल के नतीजों — का असर शेयर बाजार पर छोटी अवधि तक सीमित रहेगा। उनका कहना है कि लंबी अवधि में बाजार की दिशा कच्चे तेल की कीमतें, ईरान-अमेरिका तनाव और हॉर्मुज स्ट्रेट की स्थिति जैसे वैश्विक कारकों पर निर्भर करेगी। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाजारों में मजबूती ने भारतीय बाजार की शुरुआत को सकारात्मक बनाया — सेंसेक्स 343.77 अंक (0.45%) की तेजी के साथ 77,257.27 पर खुला था।
आगे क्या देखें
बाजार विश्लेषकों की नज़र अब चुनावी नतीजों के अंतिम आँकड़ों पर होगी, जो बंगाल-केंद्रित शेयरों की दिशा तय करेंगे। गौरतलब है कि राजनीतिक स्थिरता के संकेत मिलते ही निवेशक आमतौर पर क्षेत्रीय कंपनियों में पोजीशन बनाते हैं, लेकिन वैश्विक भू-राजनीतिक जोखिम किसी भी रैली की स्थिरता को चुनौती दे सकते हैं।