सेंसेक्स 1,336 अंक और निफ्टी 453 अंक उछले, FII खरीदारी व बॉन्ड यील्ड में नरमी से साप्ताहिक 2% की तेजी
सारांश
मुख्य बातें
BSE सेंसेक्स और NSE निफ्टी ने 26 से 30 अक्टूबर 2026 के कारोबारी सप्ताह में करीब 2 प्रतिशत की मजबूत बढ़त दर्ज की। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की आक्रामक खरीदारी, बॉन्ड यील्ड में नरमी और घरेलू कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजों ने मिलकर बाजार को रफ्तार दी। सप्ताह के अंत में सेंसेक्स 74,459.53 और निफ्टी 23,053.10 पर बंद हुए।
साप्ताहिक बंद स्तर और मुख्य आँकड़े
सेंसेक्स पूरे सप्ताह में 1,335.70 अंक (1.83%) चढ़कर 74,459.53 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 ने 453.10 अंक (2.00%) की बढ़त के साथ 23,053.10 का स्तर हासिल किया। मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेगमेंट ने लार्ज-कैप से बेहतर प्रदर्शन किया — निफ्टी मिडकैप 100 में 2.69 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 4 प्रतिशत की तेजी आई।
FII और DII की भागीदारी
इस सप्ताह विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने शुद्ध रूप से ₹6,304.67 करोड़ के शेयर खरीदे। घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने भी ₹3,109.79 करोड़ की खरीदारी कर बाजार को समर्थन दिया। यह ऐसे समय में आया है जब पिछले कई सप्ताहों से FII की बिकवाली बाजार पर दबाव बनाए हुए थी।
वैश्विक संकेत और केंद्रीय बैंकों की नीति
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Fed), यूरोपीय केंद्रीय बैंक (ECB) और बैंक ऑफ जापान ने अपेक्षा के अनुरूप ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया। हालाँकि, तीनों केंद्रीय बैंकों की मुद्रास्फीति पर जारी सतर्कता ने शीघ्र मौद्रिक नरमी की उम्मीदों पर लगाम लगाए रखी। बॉन्ड यील्ड में आई कमी ने जोखिम लेने की प्रवृत्ति में सुधार किया, जिसका सीधा फायदा भारतीय बाजार को मिला।
सेक्टर-वार प्रदर्शन
फार्मा और हेल्थकेयर शेयरों में कंपनियों के सकारात्मक तिमाही नतीजों के चलते अच्छी तेजी देखी गई। बॉन्ड यील्ड में नरमी से रियल एस्टेट सेक्टर को फायदा पहुँचा। इनपुट लागत में कमी की उम्मीदों ने मेटल, FMCG और ऑटो शेयरों को सहारा दिया। दूसरी ओर, सीमेंट और ऑयल एंड गैस सेक्टर के शेयरों में सुस्ती बनी रही।
कच्चे तेल का दबाव और आगे की दिशा
सप्ताह के अंत में पश्चिम एशिया में नए सिरे से तनाव बढ़ने से ब्रेंट क्रूड की कीमत 117 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुँच गई, जिससे व्यापक बाजार में मुनाफावसूली का दबाव बना। गौरतलब है कि बेंचमार्क इंडेक्स ने इस दबाव के बावजूद अपनी साप्ताहिक बढ़त बरकरार रखी। अब निवेशकों की नजरें OPEC+ की आगामी उत्पादन समीक्षा पर टिकी हैं, जिसके नतीजे आपूर्ति परिदृश्य को प्रभावित कर सकते हैं।