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सिंगापुर हाई कोर्ट ने बायजू रवींद्रन को अवमानना आदेश से अस्थायी राहत दी, गिरफ्तारी वारंट की खबरें गलत

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सिंगापुर हाई कोर्ट ने बायजू रवींद्रन को अवमानना आदेश से अस्थायी राहत दी, गिरफ्तारी वारंट की खबरें गलत

सारांश

सिंगापुर हाई कोर्ट ने बायजू रवींद्रन को 25 मई के अवमानना आदेश के दंडात्मक प्रावधानों से अस्थायी राहत दी है। गिरफ्तारी वारंट की मीडिया रिपोर्टों को उनके कानूनी दल ने सिरे से खारिज किया। मामला मध्यस्थता विवाद और दस्तावेज़ खुलासे से जुड़ा है।

मुख्य बातें

सिंगापुर हाई कोर्ट ने बायजू रवींद्रन के खिलाफ 25 मई के सिविल अवमानना आदेश के हिरासत और सरेंडर प्रावधानों पर रोक लगाई।
अपील की प्रक्रिया पूरी होने तक रवींद्रन को जेल नहीं भेजा जाएगा और न ही सरेंडर करना होगा।
किसी भी अदालत ने रवींद्रन के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी नहीं किया — मीडिया रिपोर्टें गलत बताई गईं।
मामला मध्यस्थता कार्यवाही और दस्तावेज़ खुलासे से जुड़े विवाद से संबंधित है; कोई आपराधिक आरोप नहीं।
रवींद्रन ने दावा किया कि उन्होंने और परिवार ने ₹5,000 करोड़ से अधिक निजी संपत्ति कंपनी में वापस लगाई है।

सिंगापुर के हाई कोर्ट के जनरल डिवीजन ने बायजू के संस्थापक बायजू रवींद्रन के खिलाफ जारी सिविल अवमानना आदेश के कुछ प्रमुख प्रावधानों पर रोक लगा दी है। इस फैसले से रवींद्रन को अपील प्रक्रिया पूरी होने तक हिरासत और सरेंडर की बाध्यता से अस्थायी मुक्ति मिली है। यह राहत उनकी ओर से दायर अर्जी पर विचार के बाद दी गई है।

अदालत का ताज़ा आदेश

सिंगापुर हाई कोर्ट ने 25 मई को जारी अपने सिविल अवमानना आदेश के तहत रवींद्रन को हिरासत में लेने और सरेंडर करने के प्रावधानों पर फिलहाल रोक लगा दी है। इसका अर्थ है कि अपील की सुनवाई पूरी होने तक उन्हें न तो जेल भेजा जाएगा और न ही सरेंडर करना होगा। मूल आदेश में रवींद्रन को केवल 15 जून को अदालत में उपस्थित होने के लिए कहा गया था।

गिरफ्तारी वारंट की खबरें निराधार

रवींद्रन के कानूनी दल ने स्पष्ट किया है कि मीडिया में फैली उन रिपोर्टों को गलत बताया गया है जिनमें उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी होने का दावा किया गया था। बयान के अनुसार, किसी भी अदालत ने उनके खिलाफ कभी कोई गिरफ्तारी वारंट जारी नहीं किया।

रवींद्रन और लाजारेफ ले बार्स के संस्थापकों के वरिष्ठ मुकदमेबाजी सलाहकार जे. माइकल मैकनट ने कहा, 'सिंगापुर कोर्ट के पिछले आदेश की कुछ चुनिंदा बातों को ज़ुबानी तौर पर लीक किए जाने के बाद जनता के बीच एक बिल्कुल गलत बात फैलाई गई कि रवींद्रन के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है।'

मामले की पृष्ठभूमि

यह अवमानना मामला दस्तावेज़ों के खुलासे और मध्यस्थता कार्यवाही से जुड़ी अन्य जिम्मेदारियों को लेकर चल रहे विवाद से संबंधित है। बयान के अनुसार, मध्यस्थता से जुड़े इन आदेशों को अलग कानूनी कार्यवाही में चुनौती दी जा रही है और उन्हें रद्द करवाने की कोशिशें जारी हैं। मैकनट ने यह भी रेखांकित किया कि इस मामले में रवींद्रन के खिलाफ कोई आपराधिक आरोप नहीं हैं और किसी अदालत ने उन्हें धोखाधड़ी, बेईमानी, फंड के दुरुपयोग या किसी निजी गड़बड़ी का दोषी नहीं पाया है।

रवींद्रन का पक्ष

अदालत के ताज़ा फैसले का स्वागत करते हुए बायजू रवींद्रन ने कहा, 'ऐसे समय में जब पार्टियाँ समझौते पर बातचीत कर रही हैं, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि गड़बड़ी की गलत धारणा बनाई जा रही है। मैं सही कानूनी प्रक्रिया के ज़रिए इस नैरेटिव को ठीक करने के लिए प्रतिबद्ध हूँ।'

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि न तो उन्हें और न ही किसी संस्थापक को विवादित फंड का कोई हिस्सा निजी तौर पर मिला। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने और उनके परिवार ने अपनी निजी संपत्ति में से ₹5,000 करोड़ से अधिक कंपनी में वापस लगाए हैं।

आगे क्या होगा

अपील की प्रक्रिया जारी रहने तक रवींद्रन को अवमानना आदेश के दंडात्मक प्रावधानों से राहत मिली रहेगी। यह मामला बायजू की व्यापक कानूनी और वित्तीय उथल-पुथल के बीच आया है, जो कंपनी के भविष्य और निवेशकों की स्थिति के लिए महत्वपूर्ण है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह बायजू के व्यापक वित्तीय संकट और मध्यस्थता विवाद को हल नहीं करती। गिरफ्तारी वारंट की खबरों का खंडन महत्वपूर्ण है, परंतु यह सवाल बना रहता है कि दस्तावेज़ खुलासे को लेकर मूल अवमानना आदेश क्यों जारी हुआ था। यह मामला एडटेक क्षेत्र में प्रशासनिक पारदर्शिता और निवेशक सुरक्षा की व्यापक बहस का हिस्सा है, जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिंगापुर हाई कोर्ट ने बायजू रवींद्रन के मामले में क्या फैसला दिया?
सिंगापुर हाई कोर्ट के जनरल डिवीजन ने 25 मई के सिविल अवमानना आदेश के हिरासत और सरेंडर प्रावधानों पर रोक लगा दी है। इससे रवींद्रन को अपील की प्रक्रिया पूरी होने तक जेल नहीं भेजा जाएगा।
क्या बायजू रवींद्रन के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ था?
नहीं। रवींद्रन के कानूनी दल ने स्पष्ट किया है कि किसी भी अदालत ने उनके खिलाफ कभी कोई गिरफ्तारी वारंट जारी नहीं किया। मीडिया में फैली ऐसी रिपोर्टें गलत और भ्रामक बताई गई हैं।
बायजू रवींद्रन के खिलाफ अवमानना का मामला किस बात को लेकर है?
यह मामला दस्तावेज़ों के खुलासे और मध्यस्थता कार्यवाही से जुड़ी जिम्मेदारियों को लेकर चल रहे विवाद से संबंधित है। इन आदेशों को अलग कानूनी कार्यवाही में चुनौती दी जा रही है।
क्या बायजू रवींद्रन पर कोई आपराधिक आरोप हैं?
उनके वरिष्ठ कानूनी सलाहकार के अनुसार, इस मामले में रवींद्रन के खिलाफ कोई आपराधिक आरोप नहीं हैं। किसी भी अदालत ने उन्हें धोखाधड़ी, बेईमानी या फंड के दुरुपयोग का दोषी नहीं पाया है।
बायजू रवींद्रन ने फंड विवाद पर क्या कहा?
रवींद्रन ने कहा कि न तो उन्हें और न ही किसी संस्थापक को विवादित फंड का कोई हिस्सा निजी तौर पर मिला। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने और उनके परिवार ने अपनी निजी संपत्ति में से ₹5,000 करोड़ से अधिक कंपनी में वापस लगाए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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