19 अक्टूबर 2026
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शेयर बाजार की गिरावट तरलता से जुड़ी, अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

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शेयर बाजार की गिरावट तरलता से जुड़ी, अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

सारांश

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का स्वीकारोक्ति — बाजार की 12% गिरावट की एक वजह आसान निकासी है। एफआईआई ने इस साल ₹33 अरब डॉलर से ज्यादा खींचे। चिंता असली है, पर सरकार का दावा है कि बुनियाद मजबूत है और एआई-बुलबुले के फटने का असर भारत पर सीमित रहेगा।

मुख्य बातें

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 19 अक्टूबर 2026 को कहा कि शेयर बाजार की कमजोरी का कारण बाजार में पर्याप्त तरलता (लिक्विडिटी) है, जो निकासी को आसान बनाती है।
इस वर्ष अब तक घरेलू शेयर बाजार में लगभग 12 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
एनएसडीएल के आंकड़ों के अनुसार, एफआईआई ने इस वर्ष 33 अरब डॉलर से अधिक की इक्विटी निकाली; 16 अक्टूबर को 15 सत्रों बाद ₹1,166 करोड़ की शुद्ध खरीद की।
डीआईआई ने 45 सत्रों की खरीदारी के बाद ₹3,661 करोड़ की शुद्ध बिकवाली की।
सीतारमण ने कहा कि ताइवान और दक्षिण कोरिया को एआई निवेश का अधिक लाभ मिला; भारत को कम एआई एक्सपोजर का फायदा एआई-गिरावट में मिलेगा।
निरंतर पूंजी बहिर्वाह को 2027 के लिए प्रमुख जोखिम बताया; सरकार सेमीकंडक्टर विनिर्माण में निवेश बढ़ा रही है।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 19 अक्टूबर 2026 को कहा कि भारतीय शेयर बाजार में हालिया कमजोरी का एक प्रमुख कारण बाजार में उपलब्ध पर्याप्त तरलता (लिक्विडिटी) है, जिसके चलते निवेशकों के लिए अपने निवेश से बाहर निकलना अपेक्षाकृत सरल हो गया है। आईएमएफ और विश्व बैंक की वार्षिक बैठकों के इतर एक बातचीत में सीतारमण ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी स्थिति मजबूत बनी हुई है।

बाजार में गिरावट का कारण क्या है

सीएनबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त मंत्री ने कहा कि बाजार में पर्याप्त लिक्विडिटी के कारण निवेशक आसानी से अपनी पोजीशन से बाहर निकल पा रहे हैं, जो इस वर्ष की गिरावट का एक अहम कारक है। गौरतलब है कि इस वर्ष अब तक घरेलू शेयर बाजार में लगभग 12 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

इसके बावजूद व्यापारिक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर बनी हुई है। सीतारमण का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक निवेशक उभरते बाजारों से पूंजी खींचकर अमेरिका और कृत्रिम मेधा (एआई) से जुड़े क्षेत्रों में लगा रहे हैं।

एफआईआई की बड़े पैमाने पर निकासी

डिपॉजिटरी एनएसडीएल के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफआईआई) ने भारतीय शेयर बाजार से 33 अरब डॉलर से अधिक की इक्विटी निकाली है। हालांकि, 16 अक्टूबर के कारोबारी सत्र में 15 लगातार सत्रों की बिकवाली के बाद एफआईआई शुद्ध खरीदार बन गए और उन्होंने लगभग ₹1,166 करोड़ के शेयर खरीदे।

वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 45 सत्रों तक जारी खरीदारी का सिलसिला तोड़ते हुए 16 अक्टूबर को करीब ₹3,661 करोड़ की शुद्ध बिकवाली की।

एआई निवेश और भारत की स्थिति

वित्त मंत्री ने कहा कि वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़े निवेशों की मौजूदा लहर में भारत प्रमुख लाभार्थियों में शामिल नहीं रहा है। इसके विपरीत ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों को एआई-संबंधित कंपनियों में अधिक हिस्सेदारी और निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी का लाभ मिला है।

सीतारमण ने कहा, 'एआई और अमेरिका की ओर पूंजी का प्रवाह, जो सामान्य परिस्थितियों में विभिन्न देशों और क्षेत्रों में निवेश के रूप में जाता, चिंता का विषय है।' हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि वैश्विक स्तर पर एआई निवेशों में गिरावट आती है और व्यापक बाजार बिकवाली होती है, तो भारत को उससे अपेक्षाकृत कम नुकसान होने की संभावना है — क्योंकि देश को शुरुआत में उस स्तर का एआई निवेश प्राप्त ही नहीं हुआ।

2027 के लिए जोखिम और सरकार की तैयारी

वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि पूंजी का लगातार बहिर्वाह जारी रहा, तो वर्ष 2027 में यह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बन सकता है। उन्होंने कहा कि भारत अब उन्नत प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में पिछड़ने वाला देश नहीं है और सरकार सेमीकंडक्टर विनिर्माण में तेजी से निवेश बढ़ा रही है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। आगे देखें तो बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक एफआईआई प्रवाह, एआई निवेश की गति और रुपये की स्थिरता पर निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो एफआईआई द्वारा 33 अरब डॉलर की निकासी की वजहें — मूल्यांकन, वृद्धि की गति और प्रतिस्पर्धी विकल्प — अनुत्तरित रह जाती हैं। एआई में कम एक्सपोजर को 'सुरक्षा कवच' के रूप में पेश करना रक्षात्मक तर्क है, न कि रणनीतिक दृष्टि। असली सवाल यह है कि जब दुनिया एआई-आधारित वृद्धि की ओर बढ़ रही है, तो भारत उसमें अग्रणी भागीदार कब बनेगा — और सेमीकंडक्टर निवेश की गति क्या वास्तव में इस अंतर को पाट सकती है।
RashtraPress
19 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शेयर बाजार की गिरावट का क्या कारण बताया?
सीतारमण ने कहा कि बाजार में पर्याप्त तरलता (लिक्विडिटी) होने के कारण निवेशकों के लिए अपने निवेश से बाहर निकलना आसान है, जो हालिया कमजोरी का एक प्रमुख कारण है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी स्थिति मजबूत बनी हुई है।
इस साल विदेशी निवेशकों (एफआईआई) ने भारतीय बाजार से कितनी रकम निकाली है?
एनएसडीएल के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष अब तक एफआईआई ने भारतीय शेयर बाजार से 33 अरब डॉलर से अधिक की इक्विटी निकाली है। हालांकि 16 अक्टूबर को 15 लगातार सत्रों की बिकवाली के बाद वे ₹1,166 करोड़ के शुद्ध खरीदार बने।
क्या एआई निवेश की लहर से भारत को नुकसान हुआ है?
वित्त मंत्री के अनुसार, भारत एआई निवेश की मौजूदा वैश्विक लहर का उतना लाभ नहीं उठा सका जितना ताइवान और दक्षिण कोरिया ने उठाया। हालांकि सीतारमण ने कहा कि यदि वैश्विक एआई निवेश में गिरावट आती है, तो भारत पर इसका असर अपेक्षाकृत सीमित रहेगा।
2027 में भारत के सामने प्रमुख आर्थिक जोखिम क्या है?
वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि यदि पूंजी का लगातार बहिर्वाह जारी रहा तो यह 2027 में भारत के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बन सकता है। इसके साथ ही उन्होंने सेमीकंडक्टर विनिर्माण में सरकार के बढ़ते निवेश का उल्लेख करते हुए भविष्य के लिए आशावाद व्यक्त किया।
घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) की भूमिका हालिया बाजार में कैसी रही?
डीआईआई ने लगातार 45 सत्रों तक बाजार में खरीदारी करके गिरावट को थामने में मदद की। हालांकि 16 अक्टूबर के सत्र में उन्होंने यह सिलसिला तोड़ते हुए ₹3,661 करोड़ की शुद्ध बिकवाली की।
राष्ट्र प्रेस
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