स्टील स्लैग रोड तकनीक से निर्माण लागत में 40% कटौती, पारंपरिक सड़कों से 4 गुना मज़बूत: डॉ. जितेंद्र सिंह
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 12 सितंबर 2026 को कहा कि स्टील स्लैग रोड तकनीक से सड़क निर्माण की लागत में लगभग 40 प्रतिशत की कटौती संभव है और यह पारंपरिक सड़कों की तुलना में चार गुना अधिक मज़बूत होती है। मंत्री ने यह बात रायगढ़, छत्तीसगढ़ में जिंदल स्टील और सीएसआईआर-केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-सीआरआरआई) द्वारा निर्मित 'प्रसंस्कृत स्टील स्लैग एग्रीगेट्स से बनी विश्व की सबसे लंबी सड़क' को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड प्रदान किए जाने के अवसर पर कही।
रिकॉर्ड-तोड़ उपलब्धि: क्या है यह सड़क
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में जिंदल स्टील लिमिटेड और सीएसआईआर-सीआरआरआई, नई दिल्ली ने मिलकर फैक्ट्री से निकलने वाले स्टील कचरे (स्टील स्लैग) का 100 प्रतिशत उपयोग करते हुए 1.85 किलोमीटर लंबी 4-लेन सड़क का निर्माण किया है। इस सड़क को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में 'प्रसंस्कृत स्टील स्लैग एग्रीगेट्स से निर्मित विश्व की सबसे लंबी सड़क' के रूप में दर्ज किया गया है। इसके निर्माण में लगभग 2 लाख टन प्रोसेस्ड स्टील स्लैग का उपयोग हुआ, जिससे प्राकृतिक पत्थरों की खुदाई और खनन पर निर्भरता समाप्त हुई है।
तकनीकी विशेषताएँ और लागत में बचत
आधिकारिक बयान के अनुसार, यह सड़क पारंपरिक सड़कों की तुलना में लगभग 35 प्रतिशत पतली है और इसके निर्माण में करीब 40 प्रतिशत लागत की बचत हुई। जिंदल स्टील ने सीएसआईआर के साथ मिलकर स्लैग को क्रशिंग, मेटल निकालने और ग्रेडिंग जैसी वैज्ञानिक प्रक्रियाओं से सड़क योग्य पत्थरों में बदला और सड़क की सबसे निचली परत से लेकर ऊपरी बिटुमिन परत तक इसी सामग्री का उपयोग किया गया। सभी कड़े पर्यावरणीय परीक्षणों को पार करने के बाद ही इसे स्वीकृति दी गई।
गौरतलब है कि डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह भी कहा कि यह तकनीक रखरखाव चक्र को भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ाती है — उपयुक्त अनुप्रयोगों में लगभग 15 वर्षों तक रखरखाव की आवश्यकता नहीं होगी। यह न केवल सड़क इंजीनियरिंग, बल्कि समग्र अवसंरचना अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
उद्योग और सरकार की प्रतिक्रिया
जिंदल स्टील लिमिटेड के चेयरमैन नवीन जिंदल ने इस अवसर पर कहा, 'भारत की तरक्की ऐसी इनोवेशन से होनी चाहिए जो पर्यावरण की सुरक्षा करते हुए आर्थिक मूल्य भी पैदा करे। यह उपलब्धि दिखाती है कि कैसे विज्ञान, टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्री मिलकर औद्योगिक सह-उत्पादों को राष्ट्र-निर्माण के लिए मूल्यवान संसाधनों में बदल सकते हैं। यह सर्कुलर इकॉनमी के काम करने का एक बेहतरीन उदाहरण है।' डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस उपलब्धि को भारतीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी और उद्योग के सफल सहयोग का प्रमाण बताया।
विस्तार की योजना: एक राज्य से पूरे देश तक
डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस स्वदेशी तकनीक को एक परियोजना से अनेक परियोजनाओं और एक राज्य से अनेक राज्यों तक ले जाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इसका विस्तार सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय से आगे — रेलवे, अन्य सरकारी विभागों, राज्य सरकारों तथा निजी बिल्डरों, ठेकेदारों और अवसंरचना संचालकों तक होना चाहिए। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड को मंज़िल नहीं, बल्कि अपनाने के अगले चरण की शुरुआत मानी जानी चाहिए।
पर्यावरण और संसाधन संरक्षण का पहलू
यह परियोजना 'कचरे से कंचन' (वेस्ट टू वेल्थ) की अवधारणा को व्यावहारिक रूप देती है। भारत के तेज़ी से बढ़ते राजमार्गों, एक्सप्रेसवे, औद्योगिक गलियारों, बंदरगाहों और शहरी अवसंरचना के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की माँग भी बढ़ रही है। स्टील स्लैग रोड पहल औद्योगिक उप-उत्पाद के उत्पादक उपयोग और प्राकृतिक संसाधन संरक्षण — दोनों चुनौतियों का एक साथ समाधान करती है। बयान के अनुसार, 1.85 किलोमीटर का यह रिकॉर्ड पहले से ही एक और बड़ी उपलब्धि की राह प्रशस्त कर रहा है, और असली सफलता तब मानी जाएगी जब यह तकनीक पूरे देश में व्यापक रूप से अपनाई जाएगी।