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विकसित भारत 2047: निवेशकों का भरोसा बनाए रखने के लिए मजबूत वित्तीय प्रशासन अनिवार्य — एसोचैम सम्मेलन

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विकसित भारत 2047: निवेशकों का भरोसा बनाए रखने के लिए मजबूत वित्तीय प्रशासन अनिवार्य — एसोचैम सम्मेलन

सारांश

नई दिल्ली में एसोचैम के राष्ट्रीय सम्मेलन में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने एकमत होकर कहा कि 'विकसित भारत 2047' की असली परीक्षा आर्थिक आँकड़ों में नहीं, बल्कि संस्थागत विश्वास, पारदर्शी वित्तीय रिपोर्टिंग और AI-युग में जवाबदेही बनाए रखने की क्षमता में होगी।

मुख्य बातें

कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय की संयुक्त सचिव अनीता शाह अकेला ने 17 जून 2026 को कहा कि 'विकसित भारत 2047' की यात्रा भरोसे और मजबूत वित्तीय प्रशासन पर आधारित होनी चाहिए।
दिवालियापन-पूर्व समाधान तंत्र और समय पर चेतावनी प्रणालियाँ उद्यमों के मूल्य और निवेशकों के विश्वास की रक्षा के लिए अनिवार्य बताई गईं।
NFRA अध्यक्ष नितिन गुप्ता ने उच्च गुणवत्ता वाली वित्तीय रिपोर्टिंग को कॉर्पोरेट प्रशासन और आर्थिक विकास की नींव बताया।
IICA के महानिदेशक ज्ञानेश्वर कुमार सिंह ने कहा कि भारत की नियामक व्यवस्था नियम-आधारित से विश्वास-आधारित मॉडल की ओर बढ़ रही है।
AI और संप्रभु AI के उपयोग में मानवीय निर्णय, नैतिक मूल्यों और जवाबदेही का संतुलन अनिवार्य बताया गया।

कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय की संयुक्त सचिव अनीता शाह अकेला ने 17 जून 2026 को नई दिल्ली में स्पष्ट किया कि भारत की 'विकसित भारत 2047' की यात्रा केवल आर्थिक विकास की रफ्तार पर नहीं, बल्कि संस्थागत भरोसे और सुदृढ़ वित्तीय प्रशासन की नींव पर टिकी होनी चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि समय पर चेतावनी देने वाली प्रणालियाँ और दिवालियापन-पूर्व समाधान तंत्र उद्यमों के मूल्य, निवेशकों के विश्वास और समग्र आर्थिक स्थिरता की रक्षा के लिए अपरिहार्य हैं।

सम्मेलन की पृष्ठभूमि

एसोचैम द्वारा राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित 'वित्तीय प्रशासन के भविष्य' पर राष्ट्रीय सम्मेलन में विभिन्न उद्योग क्षेत्रों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों, नियामक अधिकारियों और नीति-निर्माताओं ने भाग लिया। सम्मेलन का केंद्रीय विषय था — विश्वास, पारदर्शिता, जवाबदेही और जिम्मेदार नवाचार के माध्यम से 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करना।

तकनीक और मानवीय जवाबदेही का संतुलन

अनीता शाह अकेला ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और संप्रभु AI जैसी तकनीकें परिवर्तनकारी अवसर प्रदान करती हैं, परंतु इनका उपयोग सदैव मानवीय निर्णय, नैतिक मूल्यों और संस्थागत जवाबदेही के साथ संतुलित होना चाहिए। उन्होंने कहा, 'आखिरकार वही संस्थान लंबे समय तक टिकते हैं, जो केवल शक्तिशाली नहीं बल्कि सबसे अधिक भरोसेमंद होते हैं।'

वित्तीय रिपोर्टिंग और प्रशासनिक विफलताओं से सबक

राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (NFRA) के अध्यक्ष नितिन गुप्ता ने कहा कि उच्च गुणवत्ता वाली वित्तीय रिपोर्टिंग सुदृढ़ कॉर्पोरेट प्रशासन और दीर्घकालिक आर्थिक विकास की आधारशिला है। उन्होंने वैश्विक और घरेलू प्रशासनिक विफलताओं से सबक लेने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही केवल नियामक अनुपालन तक सीमित नहीं, बल्कि यह एक रणनीतिक आवश्यकता है। उनके अनुसार, 'भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, साइबर खतरों और AI-जनित बदलावों के इस दौर में विश्वास केवल जवाबदेही, पेशेवर साहस और पारदर्शी सूचना-साझाकरण की प्रतिबद्धता से ही निर्मित होता है।'

नियम-आधारित से विश्वास-आधारित प्रशासन की ओर

भारतीय कॉर्पोरेट मामलों के संस्थान (IICA) के महानिदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी ज्ञानेश्वर कुमार सिंह ने रेखांकित किया कि भारत की नियामक व्यवस्था क्रमशः नियम-आधारित मॉडल से विश्वास-आधारित मॉडल की ओर अग्रसर हो रही है। उन्होंने डिजिटलीकरण, नियमों में ढील और अनेक अपराधों के गैर-आपराधिकीकरण को इस बदलाव के प्रमुख चालकों के रूप में चिह्नित किया।

ज्ञानेश्वर कुमार सिंह ने बोर्ड और वित्तीय क्षेत्र के नेताओं से आग्रह किया कि वे केवल शेयरधारकों के हित तक सीमित सोच से आगे बढ़ें। उन्होंने कहा, 'जैसे-जैसे कारोबारी दुनिया अधिक परस्पर जुड़ी होती जा रही है, कंपनियों के निदेशक मंडलों को सभी हितधारकों के प्रति अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी होगी।'

आगे की राह

सम्मेलन में उभरी सहमति यह थी कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए वित्तीय प्रशासन को नीति-निर्माण के केंद्र में रखना होगा। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर कॉर्पोरेट प्रशासन विफलताओं ने निवेशकों की सतर्कता बढ़ा दी है और भारत अपनी अर्थव्यवस्था को $5 ट्रिलियन के लक्ष्य की ओर ले जाने की कोशिश में है। विशेषज्ञों के अनुसार, बिना संस्थागत विश्वसनीयता के यह लक्ष्य अधूरा रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

वे सुनने में ठोस लगती हैं — परंतु असली सवाल यह है कि 'विश्वास-आधारित प्रशासन' की यह अवधारणा नीति-दस्तावेजों से निकलकर ज़मीन पर कब उतरेगी। भारत में कॉर्पोरेट प्रशासन विफलताओं — IL&FS से लेकर हालिया लेखांकन विवादों तक — का इतिहास बताता है कि घोषणाएँ और क्रियान्वयन के बीच की खाई अक्सर चौड़ी रहती है। NFRA की स्थापना के बाद भी ऑडिट गुणवत्ता को लेकर सवाल बने हुए हैं। जब तक दिवालियापन-पूर्व समाधान तंत्र और AI जवाबदेही के लिए बाध्यकारी नियामक ढाँचा नहीं बनता, ये वक्तव्य महत्वाकांक्षी सम्मेलन-भाषण से अधिक नहीं बन पाएँगे।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विकसित भारत 2047 के लिए वित्तीय प्रशासन क्यों जरूरी है?
कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के अनुसार, आर्थिक विकास तभी टिकाऊ होता है जब उसके साथ संस्थागत भरोसा और पारदर्शी वित्तीय प्रशासन हो। निवेशकों का विश्वास और उद्यमों का दीर्घकालिक मूल्य इसी नींव पर खड़े होते हैं।
दिवालियापन-पूर्व समाधान तंत्र क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
यह वह व्यवस्था है जो किसी उद्यम के पूरी तरह दिवालिया होने से पहले ही उसकी वित्तीय कठिनाइयों का समाधान खोजती है। अनीता शाह अकेला के अनुसार, यह उद्यमों के मूल्य और निवेशकों के विश्वास की रक्षा के लिए बेहद जरूरी है।
NFRA की भूमिका कॉर्पोरेट प्रशासन में क्या है?
राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (NFRA) उच्च गुणवत्ता वाली वित्तीय रिपोर्टिंग सुनिश्चित करता है। NFRA अध्यक्ष नितिन गुप्ता के अनुसार, यह मजबूत कॉर्पोरेट प्रशासन और आर्थिक विकास की आधारशिला है।
AI के उपयोग में जवाबदेही कैसे सुनिश्चित होगी?
सम्मेलन में कहा गया कि AI और संप्रभु AI जैसी तकनीकों का उपयोग सदैव मानवीय निर्णय, नैतिक मूल्यों और संस्थागत जवाबदेही के साथ संतुलित होना चाहिए। बिना इस संतुलन के तकनीकी बदलाव शासन-व्यवस्था में नए जोखिम पैदा कर सकते हैं।
भारत की नियामक व्यवस्था किस दिशा में बदल रही है?
IICA के महानिदेशक ज्ञानेश्वर कुमार सिंह के अनुसार, भारत की नियामक व्यवस्था नियम-आधारित मॉडल से विश्वास-आधारित मॉडल की ओर बढ़ रही है। डिजिटलीकरण, नियमों में ढील और अनेक अपराधों का गैर-आपराधिकीकरण इस बदलाव को गति दे रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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