CII अध्यक्ष आर. मुकुंदन: 10 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लिए भारत को चाहिए 'स्पीड ऑफ डूइंग बिजनेस'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के अध्यक्ष आर. मुकुंदन ने 23 जून 2026 को मुंबई में कहा कि भारत को 10 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लिए वैश्विक स्तर पर अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता में बड़ा सुधार करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि बदलते भू-राजनीतिक और तकनीकी परिदृश्य में भारत को व्यापार, विनिर्माण, निवेश और नवाचार — हर मोर्चे पर रफ्तार बढ़ानी होगी। मुकुंदन के अनुसार, अब केवल 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' पर्याप्त नहीं है — देश को 'स्पीड ऑफ डूइंग बिजनेस' की संस्कृति अपनानी होगी।
पिछले 12 वर्षों की उपलब्धियाँ
CII अध्यक्ष ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत ने कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। बिजली, लॉजिस्टिक्स, रेलवे, बंदरगाह और शिपिंग जैसे बुनियादी ढाँचे के क्षेत्रों में बड़े सुधार हुए हैं। हालाँकि, उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने के लिए भारत को चीन और वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धियों से आगे निकलना होगा — और इसके लिए नीतिगत गति अनिवार्य है।
एफडीआई और मुक्त व्यापार समझौते
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) पर मुकुंदन ने कहा कि भारतीय कंपनियाँ विदेशों में निवेश कर रही हैं, लेकिन देश में अधिक विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए निवेश प्रक्रिया को और सरल व तेज़ बनाने की आवश्यकता है। मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) पर उन्होंने कहा कि भारत ने कई FTA पर हस्ताक्षर किए हैं, लेकिन उनका उपयोग अपेक्षित स्तर पर नहीं हो रहा। उन्होंने 'फ्री ट्रेड यूटिलाइजेशन' (FTU) बढ़ाने पर जोर दिया और कहा कि रक्षा, एयरोस्पेस और उन्नत विनिर्माण में भारत-अमेरिका सहयोग के बड़े अवसर मौजूद हैं।
PLI योजना और विनिर्माण विस्तार
उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना पर मुकुंदन ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में यह योजना बेहद सफल रही है। उन्होंने सुझाया कि फर्नीचर, खिलौना उद्योग और अन्य श्रम-प्रधान क्षेत्रों में भी PLI का विस्तार होना चाहिए, ताकि घरेलू विनिर्माण को और बल मिले। 10 ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य के लिए उन्होंने शिपिंग, बंदरगाहों और रेलवे की क्षमता में बड़े पैमाने पर वृद्धि और सरकारी-औद्योगिक प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण को अनिवार्य बताया।
एआई, हरित ऊर्जा और ऊर्जा सुरक्षा
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर CII अध्यक्ष ने कहा कि यह तकनीक अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, बुनियादी ढाँचे और प्रशासन में AI का प्रभावी उपयोग उत्पादकता और सेवा गुणवत्ता को बेहतर बना सकता है। ग्रीन एनर्जी पर उन्होंने कहा कि बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क विकसित करने में समय लगता है, इसलिए वितरण व्यवस्था को प्राथमिकता से मजबूत करना होगा। इथेनॉल ब्लेंडिंग पर उन्होंने स्पष्ट किया कि 2020 के बाद निर्मित वाहनों पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता और बेहतर वाहन स्क्रैपेज नीति की जरूरत है।
भू-राजनीतिक चुनौतियाँ और आगे की राह
पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई पर मुकुंदन ने कहा कि सरकार और उद्योग जगत ने मिलकर अधिकांश क्षेत्रों में बढ़ती लागत का बोझ उपभोक्ताओं तक पहुँचने से रोका है। उन्होंने जल प्रबंधन के क्षेत्र में इज़राइल से सीख लेने और 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' जैसे अभियानों को आगे बढ़ाने की वकालत की। मुकुंदन के अनुसार, भारत के पास मजबूत जनसांख्यिकीय लाभ, बढ़ता घरेलू बाजार और तेजी से विकसित होता तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र है — यदि बुनियादी ढाँचे, डिजिटलाइजेशन और नवाचार पर ध्यान जारी रहा, तो भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में और मजबूत स्थान हासिल कर सकता है।