29 जून 2026
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प्रशासनिक डेटा को राष्ट्रीय संपत्ति बनाएं: पीएम के प्रधान सचिव पी.के. मिश्रा का सांख्यिकी दिवस पर आह्वान

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प्रशासनिक डेटा को राष्ट्रीय संपत्ति बनाएं: पीएम के प्रधान सचिव पी.के. मिश्रा का सांख्यिकी दिवस पर आह्वान

सारांश

सांख्यिकी दिवस के 20वें समारोह में पीएम के प्रधान सचिव पी.के. मिश्रा ने कहा — मंत्रालयों में बिखरा सरकारी डेटा अब 'बाय-प्रोडक्ट' नहीं, रणनीतिक राष्ट्रीय संपत्ति बनना चाहिए। एआई शासन की नींव और नागरिक विश्वास — दोनों इसी पर टिके हैं।

मुख्य बातें

मिश्रा ने 29 जून 2026 को सांख्यिकी दिवस के 20वें समारोह में प्रशासनिक डेटा को राष्ट्रीय संपत्ति बनाने का आह्वान किया।
भारत के विभिन्न मंत्रालयों में बिखरे डेटा में आर्थिक गतिविधि, स्वास्थ्य, शिक्षा, वित्तीय समावेशन से जुड़ी जानकारियाँ हैं, लेकिन एकीकरण के अभाव में इनका पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा।
मिश्रा ने 'प्राइवेसी बाय डिजाइन' सिद्धांत और मौजूदा कानूनी ढाँचे के पूर्ण अनुपालन को अनिवार्य बताया।
उन्होंने एकीकृत डेटा को भारत की एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) महत्वाकांक्षाओं की मज़बूत नींव करार दिया।
डेटा साझाकरण के दौरान नागरिकों का विश्वास बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता बताई गई।

प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी.के. मिश्रा ने 29 जून 2026 को सांख्यिकी दिवस के 20वें समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में बिखरे प्रशासनिक डेटा को एक सुसंगठित रणनीतिक राष्ट्रीय संपत्ति में परिवर्तित करना अब अपरिहार्य हो गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी डेटा के समुचित एकीकरण से सुशासन, नीति निर्माण और सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार संभव है — बशर्ते नागरिकों की गोपनीयता और डेटा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

डेटा की वर्तमान स्थिति और चुनौतियाँ

मिश्रा ने रेखांकित किया कि भारत में तेज़ी से हो रहे डिजिटल परिवर्तन के चलते सरकारी योजनाओं, नियामक संस्थाओं और सार्वजनिक सेवाओं के माध्यम से प्रतिदिन विशाल मात्रा में प्रशासनिक डेटा उत्पन्न हो रहा है। उन्होंने कहा कि इन डेटा सेट्स में आर्थिक गतिविधियों, सामाजिक विकास, बुनियादी ढाँचे, वित्तीय समावेशन, स्वास्थ्य, शिक्षा और कल्याणकारी योजनाओं से जुड़ी बहुमूल्य जानकारियाँ समाहित हैं।

हालाँकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस डेटा की समृद्धता और व्यापकता के बावजूद अधिकांश जानकारी अब भी अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों तक सीमित है। उनके अनुसार, यही विखंडन नीति निर्माण और सुशासन में डेटा के पूर्ण उपयोग की सबसे बड़ी बाधा है।

डेटा को 'उप-उत्पाद' नहीं, 'राष्ट्रीय संसाधन' मानें

मिश्रा ने इस बात पर विशेष ज़ोर दिया कि प्रशासनिक डेटा को अब केवल विभागीय कामकाज का 'बाय-प्रोडक्ट' मानकर नहीं चला जा सकता। उन्होंने कहा, "प्रशासनिक डेटा को विभागीय प्रक्रियाओं का उप-उत्पाद बनने के बजाय एक रणनीतिक राष्ट्रीय संपत्ति के रूप में विकसित करना होगा।"

उनका तर्क था कि इस दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण डेटा की कमी को दूर किया जा सकेगा, बेहतर नीतियाँ बनाई जा सकेंगी और सरकारी योजनाओं का लाभ सही लाभार्थियों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुँचाया जा सकेगा।

गोपनीयता और नागरिक विश्वास सर्वोपरि

एकीकृत डेटा प्रणाली के लाभ गिनाते हुए मिश्रा ने यह भी स्पष्ट किया कि डेटा साझाकरण और अंतर-प्रणाली संयोजन की प्रक्रिया में नागरिकों का भरोसा किसी भी कीमत पर कमज़ोर नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि 'प्राइवेसी बाय डिजाइन' जैसे सिद्धांतों और मौजूदा कानूनी एवं नीतिगत ढाँचे का पूर्ण अनुपालन अनिवार्य है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत का डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम लागू होने की प्रक्रिया में है और डेटा शासन पर राष्ट्रीय बहस तेज़ हो रही है।

एआई महत्वाकांक्षाओं से जुड़ाव

मिश्रा ने भरोसेमंद और परस्पर जुड़े डेटा तंत्र को भारत की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) महत्वाकांक्षाओं से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि विश्वसनीय एवं एकीकृत डेटा भविष्य में शासन और सार्वजनिक प्रशासन में एआई के जिम्मेदार और प्रभावी उपयोग की मज़बूत नींव साबित होगा। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने हाल के वर्षों में एआई-आधारित शासन पहलों में उल्लेखनीय निवेश किया है, और डेटा की गुणवत्ता इन प्रयासों की सफलता की कुंजी मानी जाती है।

आगे की राह

सांख्यिकी दिवस के इस मंच से दिया गया मिश्रा का संदेश स्पष्ट है — डेटा एकीकरण की दिशा में ठोस नीतिगत कदम उठाने का समय आ गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसके लिए मंत्रालयों के बीच डेटा-साझाकरण प्रोटोकॉल, केंद्रीय डेटा रजिस्ट्री और स्वतंत्र निगरानी तंत्र की आवश्यकता होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि डेटा एकीकरण की यह महत्वाकांक्षा किस संस्थागत ढाँचे पर टिकेगी। भारत में मंत्रालयों के बीच डेटा-साझाकरण की बाधाएँ तकनीकी कम और राजनीतिक-नौकरशाही अधिक हैं — हर विभाग अपना डेटा 'संप्रभुता' मानता है। 'प्राइवेसी बाय डिजाइन' का उल्लेख स्वागतयोग्य है, किंतु जब तक डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम के नियम अधिसूचित नहीं होते और स्वतंत्र डेटा संरक्षण बोर्ड कार्यशील नहीं होता, यह सिद्धांत कागज़ी ही रहेगा। एआई शासन की नींव के रूप में डेटा की बात करना सही दिशा है — पर बिना जवाबदेही तंत्र के, यह विज़न भी पिछले कई डिजिटल इंडिया घोषणाओं की तरह क्रियान्वयन की खाई में खो सकता है।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पी.के. मिश्रा ने प्रशासनिक डेटा को राष्ट्रीय संपत्ति बनाने की बात क्यों कही?
उन्होंने कहा कि भारत के मंत्रालयों और विभागों में बिखरे डेटा का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा, जिससे नीति निर्माण और सुशासन प्रभावित हो रहे हैं। डेटा के एकीकरण से सरकारी योजनाओं की प्रभावशीलता और सेवा वितरण में बड़ा सुधार संभव है।
सांख्यिकी दिवस का 20वाँ समारोह कब और कहाँ हुआ?
सांख्यिकी दिवस का 20वाँ समारोह 29 जून 2026 को नई दिल्ली में आयोजित हुआ, जिसे प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी.के. मिश्रा ने संबोधित किया।
डेटा एकीकरण में नागरिकों की गोपनीयता कैसे सुरक्षित रहेगी?
मिश्रा ने कहा कि 'प्राइवेसी बाय डिजाइन' सिद्धांत और मौजूदा कानूनी एवं नीतिगत ढाँचे का पूर्ण पालन अनिवार्य होगा। डेटा साझाकरण की प्रक्रिया में नागरिकों का भरोसा किसी भी कीमत पर कमज़ोर नहीं होने दिया जाएगा।
प्रशासनिक डेटा एकीकरण का एआई से क्या संबंध है?
पी.के. मिश्रा के अनुसार, विश्वसनीय और परस्पर जुड़ा डेटा तंत्र भविष्य में शासन व सार्वजनिक प्रशासन में एआई के जिम्मेदार उपयोग की मज़बूत नींव बनेगा। बिना गुणवत्तापूर्ण एकीकृत डेटा के एआई-आधारित शासन पहलें प्रभावी नहीं हो सकतीं।
अभी भारत में प्रशासनिक डेटा की सबसे बड़ी समस्या क्या है?
मिश्रा ने बताया कि मूल्यवान प्रशासनिक डेटा अभी भी अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों तक सीमित है और उसे केवल विभागीय कामकाज का 'बाय-प्रोडक्ट' माना जाता है। इस विखंडन के कारण नीति निर्माण और सुशासन में इसका पूरा उपयोग नहीं हो पाता।
राष्ट्र प्रेस
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