प्रशासनिक डेटा को राष्ट्रीय संपत्ति बनाएं: पीएम के प्रधान सचिव पी.के. मिश्रा का सांख्यिकी दिवस पर आह्वान
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी.के. मिश्रा ने 29 जून 2026 को सांख्यिकी दिवस के 20वें समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में बिखरे प्रशासनिक डेटा को एक सुसंगठित रणनीतिक राष्ट्रीय संपत्ति में परिवर्तित करना अब अपरिहार्य हो गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी डेटा के समुचित एकीकरण से सुशासन, नीति निर्माण और सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार संभव है — बशर्ते नागरिकों की गोपनीयता और डेटा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
डेटा की वर्तमान स्थिति और चुनौतियाँ
मिश्रा ने रेखांकित किया कि भारत में तेज़ी से हो रहे डिजिटल परिवर्तन के चलते सरकारी योजनाओं, नियामक संस्थाओं और सार्वजनिक सेवाओं के माध्यम से प्रतिदिन विशाल मात्रा में प्रशासनिक डेटा उत्पन्न हो रहा है। उन्होंने कहा कि इन डेटा सेट्स में आर्थिक गतिविधियों, सामाजिक विकास, बुनियादी ढाँचे, वित्तीय समावेशन, स्वास्थ्य, शिक्षा और कल्याणकारी योजनाओं से जुड़ी बहुमूल्य जानकारियाँ समाहित हैं।
हालाँकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस डेटा की समृद्धता और व्यापकता के बावजूद अधिकांश जानकारी अब भी अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों तक सीमित है। उनके अनुसार, यही विखंडन नीति निर्माण और सुशासन में डेटा के पूर्ण उपयोग की सबसे बड़ी बाधा है।
डेटा को 'उप-उत्पाद' नहीं, 'राष्ट्रीय संसाधन' मानें
मिश्रा ने इस बात पर विशेष ज़ोर दिया कि प्रशासनिक डेटा को अब केवल विभागीय कामकाज का 'बाय-प्रोडक्ट' मानकर नहीं चला जा सकता। उन्होंने कहा, "प्रशासनिक डेटा को विभागीय प्रक्रियाओं का उप-उत्पाद बनने के बजाय एक रणनीतिक राष्ट्रीय संपत्ति के रूप में विकसित करना होगा।"
उनका तर्क था कि इस दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण डेटा की कमी को दूर किया जा सकेगा, बेहतर नीतियाँ बनाई जा सकेंगी और सरकारी योजनाओं का लाभ सही लाभार्थियों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुँचाया जा सकेगा।
गोपनीयता और नागरिक विश्वास सर्वोपरि
एकीकृत डेटा प्रणाली के लाभ गिनाते हुए मिश्रा ने यह भी स्पष्ट किया कि डेटा साझाकरण और अंतर-प्रणाली संयोजन की प्रक्रिया में नागरिकों का भरोसा किसी भी कीमत पर कमज़ोर नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि 'प्राइवेसी बाय डिजाइन' जैसे सिद्धांतों और मौजूदा कानूनी एवं नीतिगत ढाँचे का पूर्ण अनुपालन अनिवार्य है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत का डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम लागू होने की प्रक्रिया में है और डेटा शासन पर राष्ट्रीय बहस तेज़ हो रही है।
एआई महत्वाकांक्षाओं से जुड़ाव
मिश्रा ने भरोसेमंद और परस्पर जुड़े डेटा तंत्र को भारत की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) महत्वाकांक्षाओं से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि विश्वसनीय एवं एकीकृत डेटा भविष्य में शासन और सार्वजनिक प्रशासन में एआई के जिम्मेदार और प्रभावी उपयोग की मज़बूत नींव साबित होगा। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने हाल के वर्षों में एआई-आधारित शासन पहलों में उल्लेखनीय निवेश किया है, और डेटा की गुणवत्ता इन प्रयासों की सफलता की कुंजी मानी जाती है।
आगे की राह
सांख्यिकी दिवस के इस मंच से दिया गया मिश्रा का संदेश स्पष्ट है — डेटा एकीकरण की दिशा में ठोस नीतिगत कदम उठाने का समय आ गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसके लिए मंत्रालयों के बीच डेटा-साझाकरण प्रोटोकॉल, केंद्रीय डेटा रजिस्ट्री और स्वतंत्र निगरानी तंत्र की आवश्यकता होगी।