टेक्समैको रेल, टोआक्स और ट्रिनिटीरेल की त्रिपक्षीय साझेदारी; 3-5 वर्षों में 100 रेलवे रेक्स में निवेश का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
टेक्समैको रेल एंड इंजीनियरिंग लिमिटेड (कोलकाता), वैश्विक रेल लीजिंग कंपनी टोआक्स ग्रुप और अमेरिकी कंपनी ट्रिनिटीरेल ग्लोबल इंक. ने 29 जुलाई 2026 को एक रणनीतिक त्रिपक्षीय साझेदारी की घोषणा की, जिसका लक्ष्य भारत के तेज़ी से विस्तार हो रहे रेल माल ढुलाई बाज़ार में एक आधुनिक और एकीकृत वैगन लीजिंग प्लेटफ़ॉर्म खड़ा करना है। इस गठजोड़ के तहत अगले 3 से 5 वर्षों में 100 नई रेलवे रेक्स में निवेश की योजना भी घोषित की गई है।
साझेदारी की संरचना
समझौते के अनुसार, ट्रिनिटीरेल ग्लोबल संयुक्त उद्यम कंपनी टोआक्स टेक्समैको रेलकार लीजिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीटीआरएल) में प्रस्तावित 32 प्रतिशत हिस्सेदारी अर्जित करेगी। वर्तमान में इस संयुक्त उद्यम में टोआक्स ग्रुप और टेक्समैको रेल की 34-34 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इस प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए वैगन निर्माण, लीजिंग, फाइनेंसिंग, इंजीनियरिंग, रखरखाव और लाइफ-साइकिल मैनेजमेंट जैसी सेवाएँ एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराई जाएंगी।
टोआक्स ग्रुप का नज़रिया
टोआक्स ग्रुप के जनरल पार्टनर और सीईओ फैब्रिस वालेव्स्की ने कहा कि उनकी कंपनी पिछले 30 वर्षों से भारत में कंटेनर लीजिंग कारोबार से जुड़ी है और यह बाज़ार निरंतर गति पकड़ रहा है। उन्होंने बताया कि लगभग 15 वर्ष पहले कंपनी ने फ्रेट वैगन लीजिंग के क्षेत्र में भी कदम रखा, जो अब तेज़ी से विस्तार कर रहा है।
वालेव्स्की ने कहा कि भारत बहुत जल्द दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा रेल बाज़ार बन सकता है। उन्होंने डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के निर्माण को भारत के 'सबसे दूरदर्शी फैसलों में से एक' बताया और कहा कि यात्री व मालगाड़ियों के लिए अलग-अलग कॉरिडोर विकसित करने से माल परिवहन की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
फ्रेट हिस्सेदारी और सरकारी लक्ष्य
वालेव्स्की के अनुसार, वर्तमान में भारत में माल ढुलाई में रेलवे की हिस्सेदारी लगभग 28 प्रतिशत है और सरकार इसे बढ़ाकर 45 प्रतिशत तक ले जाना चाहती है। उनका मत है कि इस दिशा में उठाया गया हर कदम परिवहन लागत घटाएगा और भारतीय उद्योग को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा।
ट्रिनिटीरेल का दृष्टिकोण और निजी भागीदारी
ट्रिनिटीरेल के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (रिस्क एंड इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो) पैट्रिक हर्स्ट ने कहा कि किसी भी औद्योगिक अर्थव्यवस्था की सफलता का आधार एक मज़बूत और कुशल फ्रेट रेल नेटवर्क होता है और भारत ने इस दिशा में ठोस आधार तैयार कर लिया है। उन्होंने रेल वैगन लीजिंग क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया।
हर्स्ट ने उत्तर अमेरिका का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ माल ढुलाई रेलवे पूरी तरह निजी क्षेत्र द्वारा संचालित है, जिससे परिचालन क्षमता और निवेश दोनों बेहतर हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह पहल 'मेक इन इंडिया' और भारतीय रेल लीजिंग प्रणाली के विकास के अनुरूप है।
टेक्समैको का संदेश
टेक्समैको रेल एंड इंजीनियरिंग लिमिटेड के चेयरमैन सरोज कुमार पोद्दार ने कहा कि यह साझेदारी विनिर्माण, लीजिंग और इंजीनियरिंग — तीनों क्षेत्रों की विशेषज्ञता को एक मंच पर लाकर भारत को आधुनिक रेल मोबिलिटी समाधान उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि यह संयुक्त उद्यम आधुनिक वैगन डिज़ाइन, बेहतर रखरखाव व्यवस्था और वित्तीय समाधान विकसित करने में भी सहायक होगा और सरकार के माल परिवहन में रेलवे की हिस्सेदारी बढ़ाने के लक्ष्य को गति देगा।
यह साझेदारी ऐसे समय में आई है जब भारतीय रेलवे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के विस्तार और निजी वैगन लीजिंग को प्रोत्साहन देने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रही है। आने वाले वर्षों में इस गठजोड़ की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि नीतिगत ढाँचा निजी निवेश को कितनी तेज़ी से समर्थन दे पाता है।