टेक्सटाइल PLI स्कीम: तीसरे राउंड में 22 नई कंपनियाँ शामिल, ₹2,339 करोड़ निवेश और 36,000 नौकरियों का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने बुधवार, 10 जून 2026 को टेक्सटाइल क्षेत्र के लिए प्रोडक्शन-लिंक्ड इन्सेंटिव (PLI) स्कीम के तीसरे राउंड के तहत 22 नए आवेदनों को मंजूरी दी, जिससे ₹2,339.14 करोड़ के निवेश का मार्ग प्रशस्त होगा और 36,000 से अधिक रोज़गार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है। इस मंजूरी के साथ टेक्सटाइल PLI में शामिल कंपनियों की कुल संख्या 96 हो गई है।
नई मंजूरी में क्या शामिल है
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, इस राउंड में स्वीकृत 22 परियोजनाओं से नोटिफाइड टेक्सटाइल उत्पादों के ज़रिये ₹15,561.34 करोड़ का टर्नओवर अनुमानित है और टेक्सटाइल वैल्यू चेन में 36,217 रोज़गार के अवसर पैदा होने का अनुमान है। मंजूरी पाने वाली कंपनियाँ मुख्यतः मैन-मेड फाइबर (MMF) कपड़े, MMF फैब्रिक और टेक्निकल टेक्सटाइल जैसे उच्च-मूल्य वाले क्षेत्रों में काम करती हैं।
समग्र PLI स्कीम की स्थिति
तीनों राउंड मिलाकर अब तक 96 कंपनियों ने संयुक्त रूप से ₹12,822.67 करोड़ का निवेश किया है। इन सभी परियोजनाओं से ₹58,294.18 करोड़ का संयुक्त टर्नओवर होने की संभावना व्यक्त की गई है। यह आँकड़े दर्शाते हैं कि स्कीम के प्रति उद्योग जगत की रुचि क्रमशः बढ़ रही है।
सरकार का लक्ष्य और रणनीति
अधिकारियों ने कहा कि टेक्सटाइल PLI स्कीम का उद्देश्य घरेलू विनिर्माण क्षमता को मज़बूत करना, वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना और बड़े पैमाने पर निजी निवेश आकर्षित करना है। सरकार का मानना है कि MMF और टेक्निकल टेक्सटाइल जैसे उच्च-मूल्य वाले क्षेत्रों में विस्तार से भारत को वैश्विक टेक्सटाइल आपूर्ति श्रृंखला में एक प्रमुख विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने में सहायता मिलेगी।
आत्मनिर्भर भारत से जुड़ाव
यह पहल सरकार के 'आत्मनिर्भर भारत' विज़न के अनुरूप है, जिसके तहत घरेलू उत्पादन क्षमताओं को बढ़ाकर आयात निर्भरता कम करने और निर्यात को प्रोत्साहित करने पर ज़ोर दिया जा रहा है। गौरतलब है कि भारत वैश्विक टेक्सटाइल निर्यात में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, जबकि बांग्लादेश और वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धी देश इस क्षेत्र में तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं।
आगे की राह
अधिकारियों के अनुसार, प्रस्तावित निवेश और उत्पादन क्षमता से एक सक्षम और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी टेक्सटाइल इकोसिस्टम विकसित होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि PLI स्कीम के तहत मंजूरी के इस नए दौर से उन क्षेत्रों में निवेश प्रवाह तेज़ होगा जहाँ निर्यात की व्यापक संभावनाएँ हैं और मूल्य-संवर्धन अधिक होता है।