पीएलआई टेक्सटाइल स्कीम: 170 कंपनियों को मंजूरी, 225 उत्पाद अधिसूचित; एनटीटीएम को ₹256 करोड़ का बजट
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 4 अगस्त 2026 को लोकसभा में जानकारी दी कि पीएलआई टेक्सटाइल स्कीम के अंतर्गत अब तक कुल 170 कंपनियों के आवेदनों को मंजूरी प्रदान की जा चुकी है। कपड़ा राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा ने एक लिखित उत्तर में यह भी बताया कि इस योजना के तहत एमएमएफ अपैरल, एमएमएफ फैब्रिक्स और टेक्निकल टेक्सटाइल्स सेगमेंट में 225 उत्पादों को अधिसूचित किया गया है।
योजना की निगरानी और क्रियान्वयन
केंद्रीय मंत्री पवित्र मार्गेरिटा ने सदन को बताया कि पीएलआई स्कीम की नियमित निगरानी और समीक्षा कपड़ा मंत्रालय और डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (डीपीआईआईटी) — जो सभी पीएलआई योजनाओं का नोडल विभाग है — के स्तर पर की जाती है। उन्होंने कहा, 'जमीनी स्तर पर बारीकी से जांच-पड़ताल के लिए एक प्रोजेक्ट मैनेजमेंट एजेंसी (पीएमए) को भी लगाया गया है, और स्कीम से जुड़े डेटा और परफॉर्मेंस मेट्रिक्स के लिए एक सेंट्रलाइज्ड रिपॉजिटरी के तौर पर काम करने हेतु एक खास पीएलआई पोर्टल बनाया गया है।'
एनटीटीएम और ग्रेट स्कीम
नेशनल टेक्निकल टेक्सटाइल्स मिशन (एनटीटीएम) के अंतर्गत संचालित 'ग्रांट फॉर रिसर्च एंड एंटरप्रेन्योरशिप अक्रॉस एस्पायरिंग इनोवेटर्स इन टेक्निकल टेक्सटाइल्स (जीआरईएटी)' योजना का उद्देश्य टेक्निकल टेक्सटाइल्स क्षेत्र में स्टार्टअप इकोसिस्टम को सशक्त बनाना है। इस योजना के माध्यम से युवा इनोवेटर्स, वैज्ञानिकों, टेक्नोलॉजिस्ट्स और स्टार्टअप वेंचर्स को उनके विचारों को व्यावसायिक प्रौद्योगिकी और उत्पादों में परिणत करने में सहायता दी जाती है।
मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए एनटीटीएम को ₹256 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है, जिसमें जीआरईएटी स्कीम के तहत स्टार्टअप्स को अनुदान देने का प्रावधान भी शामिल है। अब तक एनटीटीएम के तहत कुल ₹15.40 करोड़ की लागत वाले 31 स्टार्टअप्स को मंजूरी दी जा चुकी है, जिसमें ₹13.65 करोड़ भारत सरकार का हिस्सा है।
हैंडलूम बुनकरों को लाभ
नेशनल हैंडलूम डेवलपमेंट प्रोग्राम (एनएचडीपी) के अंतर्गत छोटे क्लस्टर डेवलपमेंट कार्यक्रम के तहत, 2023-24 और 2024-25 के दौरान ₹78.31 लाख की राशि जारी की गई है। इससे तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले में 343 हैंडलूम बुनकरों को प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त हुआ है।
व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपने कपड़ा निर्यात को बढ़ावा देने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी हिस्सेदारी मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। गौरतलब है कि पीएलआई टेक्सटाइल योजना को विशेष रूप से मानव निर्मित रेशों (एमएमएफ) और तकनीकी कपड़ों के क्षेत्र में भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया था, जहाँ चीन और वियतनाम जैसे देश अभी भी बाज़ार पर हावी हैं। आने वाले समय में योजना के तहत स्वीकृत कंपनियों का उत्पादन प्रदर्शन और रोज़गार सृजन के आँकड़े ही इसकी वास्तविक सफलता का पैमाना होंगे।