तिमोर-लेस्ते का भारत को एलएनजी और तेल क्षेत्र में निवेश का न्योता, ग्रेटर सनराइज में 5 ट्रिलियन क्यूबिक फीट गैस भंडार
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण-पूर्व एशियाई देश तिमोर-लेस्ते ने भारतीय कंपनियों को तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी), तेल रिफाइनिंग और शिक्षा क्षेत्र में निवेश के लिए आमंत्रित किया है। वॉशिंगटन में तिमोर-लेस्ते के राजदूत और पूर्व उप प्रधानमंत्री जोस लुइस गुटेरेस ने एक विशेष इंटरव्यू में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ग्रेटर सनराइज गैस क्षेत्र में अनुमानित 5 ट्रिलियन क्यूबिक फीट गैस भंडार है, जिससे करीब 30 वर्षों तक उत्पादन संभव है।
ऊर्जा क्षेत्र में निवेश के अवसर
राजदूत गुटेरेस ने बताया कि तिमोर-लेस्ते को एलएनजी संयंत्रों, रिफाइनरियों और ग्रेटर सनराइज गैस क्षेत्र से जुड़ी पाइपलाइन के विकास के लिए निवेश की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया, "हर क्षेत्र में अवसर हैं। ऊर्जा ऐसा क्षेत्र है, जहाँ हम अमेरिका, भारत और अन्य देशों के साथ साझेदारी को प्रोत्साहित करते हैं।" उन्होंने यह भी जोड़ा, "हम कारोबार के लिए पूरी तरह खुले हैं।"
राजनयिक संबंधों को नई गति
अगस्त 2024 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू तिमोर-लेस्ते की यात्रा करने वाली पहली भारतीय राष्ट्राध्यक्ष बनीं। गुटेरेस ने इस यात्रा को "परिवार की यात्रा जैसा" बताते हुए कहा कि इससे दोनों देशों के संबंधों का नया अध्याय शुरू हुआ है। उन्होंने यह उम्मीद भी जताई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भविष्य में तिमोर-लेस्ते की यात्रा करेंगे। गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध जनवरी 2003 में स्थापित हुए थे।
दूतावास खुलने से बढ़ेगा आर्थिक सहयोग
गुटेरेस ने कहा कि नई दिल्ली में तिमोर-लेस्ते के दूतावास और दिली में भारत के राजनयिक मिशन के खुलने से आर्थिक सहयोग को और बल मिलेगा। यह ऐसे समय में आया है जब तिमोर-लेस्ते अक्टूबर 2025 में आसियान का 11वाँ सदस्य बना है — एक ऐसी प्रक्रिया जो वर्ष 2011 में आवेदन से शुरू हुई थी और 2022 में पर्यवेक्षक दर्जे के बाद पूरी हुई।
शिक्षा और कॉफी में भी सहयोग की संभावना
राजदूत ने शिक्षा को सहयोग के एक उभरते क्षेत्र के रूप में रेखांकित किया। उनके अनुसार, एक भारतीय निवेशक ने तिमोर-लेस्ते के एक कैथोलिक विश्वविद्यालय के साथ मिलकर चिकित्सा शिक्षा को मजबूत करने की साझेदारी की है और भारतीय छात्र दिली में चिकित्सा की पढ़ाई कर रहे हैं। इसके अलावा, तिमोर-लेस्ते की जैविक कॉफी — जो अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान और जर्मनी को निर्यात होती है — को भी भारत के साथ व्यापार का संभावित माध्यम बताया गया। राष्ट्रपति जोस रामोस-होर्ता ने भारत यात्रा के दौरान इस कॉफी को विशेष रूप से बढ़ावा दिया था।
हिंद-प्रशांत में भारत की भूमिका पर जोर
गुटेरेस ने भारत को क्षेत्र का अभिन्न हिस्सा बताते हुए कहा, "आप इस क्षेत्र का हिस्सा हैं, आप विदेशी नहीं हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका, आसियान देशों के साथ मिलकर आर्थिक विकास के लिए आवश्यक शांतिपूर्ण और स्थिर माहौल बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। दोनों देशों के बीच अगस्त 2024 की राष्ट्रपति यात्रा के दौरान डिजिटल प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, कृषि और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा हुई थी, और यह निवेश न्योता उसी दिशा में अगला कदम माना जा रहा है।