ट्रंप ने कनाडा पर 50% टैरिफ तीन दिन टाला, कीस्टोन एक्सएल पाइपलाइन पुनर्जीवित करने के संकेत
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 19 अगस्त 2026 को कनाडा से आयात होने वाले करीब $20 अरब के सामान पर प्रस्तावित 50 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ को तीन दिनों के लिए स्थगित कर दिया। ट्रंप ने कहा कि दोनों देशों के बीच एक व्यापार समझौता सैद्धांतिक रूप से तय हो गया है और अब केवल दस्तावेज़ीकरण को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है।
टैरिफ स्थगन की वजह
ट्रंप ने मंगलवार देर रात सोशल मीडिया पर घोषणा करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच समझौते की दिशा में 'महत्वपूर्ण प्रगति' हुई है। प्रस्तावित शुल्क बुधवार से लागू होने वाले थे और इनके दायरे में शराब, हॉकी उपकरण, लकड़ी सहित कई अन्य उत्पाद आते। इस घोषणा से तत्काल टकराव टल गया है।
हालांकि, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने सतर्क रुख अपनाते हुए कहा कि बातचीत में प्रगति हुई है, लेकिन 'कुछ मुद्दों पर अभी काम किया जाना बाकी है।' यह बयान ट्रंप के दावे से कुछ अलग सुर में था, जिससे समझौते की अंतिम रूपरेखा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
कीस्टोन एक्सएल पाइपलाइन: 'कब्र से वापसी'
ट्रंप ने इसी घोषणा में विवादित कीस्टोन एक्सएल तेल पाइपलाइन परियोजना को पुनर्जीवित करने के संकेत भी दिए। उन्होंने कहा कि यह परियोजना 'कब्र से बाहर आ सकती है,' हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि पाइपलाइन की बहाली और व्यापार समझौते के बीच क्या औपचारिक संबंध होगा।
गौरतलब है कि कीस्टोन एक्सएल परियोजना का उद्देश्य कनाडा के अल्बर्टा प्रांत से कच्चे तेल को अमेरिकी रिफाइनरियों तक पहुँचाना था। तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडेन ने 2021 में पर्यावरणीय आधार पर इसका परमिट रद्द कर दिया था। ट्रंप शुरू से इस परियोजना के मुखर समर्थक रहे हैं।
व्यापार विवाद की पृष्ठभूमि
अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापार तनाव पिछले कई महीनों से जारी है। प्रस्तावित 50% टैरिफ की आशंका से कनाडाई कारोबार जगत में गहरी चिंता फैली थी, क्योंकि दोनों देशों के बीच दशकों पुरानी आपूर्ति श्रृंखलाएँ और द्विपक्षीय व्यापार इससे प्रभावित होते। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार नीति पर अनिश्चितता का माहौल पहले से बना हुआ है।
आगे क्या होगा
दोनों देशों के अधिकारी अब एक व्यापक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। तीन दिन की यह मोहलत एक अस्थायी राहत है — यदि इस अवधि में दस्तावेज़ीकरण पूरा नहीं हुआ, तो टैरिफ फिर से लागू होने का जोखिम बना रहेगा। कीस्टोन एक्सएल पर ट्रंप के संकेत को लेकर ऊर्जा क्षेत्र के विश्लेषक नज़र बनाए हुए हैं।