यूपीआई पर मामूली शुल्क से डिजिटल भुगतान होगा आत्मनिर्भर: नीति आयोग के अशोक कुमार लाहिड़ी
सारांश
मुख्य बातें
नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने 16 सितंबर को नई दिल्ली में कहा कि कुछ यूपीआई (UPI) लेनदेन पर न्यूनतम शुल्क लागू करने से भारत की डिजिटल भुगतान व्यवस्था को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाने में सहायता मिल सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह शुल्क उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार न डाले, इसके लिए इसे यथासंभव न्यूनतम स्तर पर रखा जाना चाहिए।
यूजर-पे सिद्धांत पर लाहिड़ी का तर्क
लाहिड़ी ने यूपीआई के लिए 'यूजर-पे सिद्धांत' अपनाने की वकालत की। उनका कहना था कि व्यवसायों को डिजिटल भुगतान से प्रत्यक्ष लाभ मिलता है — चेक जमा करने, नकदी प्रबंधन और उससे जुड़ी प्रशासनिक लागतों से उन्हें राहत मिलती है। उन्होंने कहा, 'इसे जितना संभव हो उतना कम रखें, लेकिन कृपया इसे लागू करें ताकि यूपीआई एक आत्मनिर्भर व्यवसाय बन सके।'
यह टिप्पणी उस सवाल के जवाब में आई जिसमें पूछा गया था कि ₹2,000 से अधिक के यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगाने से क्या डिजिटल लेनदेन की रफ्तार प्रभावित हो सकती है।
बिलडेस्क के सह-संस्थापक की राय: उपभोक्ता और छोटे व्यापारी बाहर
इस चर्चा में बिलडेस्क के निदेशक एवं सह-संस्थापक श्रीनिवासु एमएन ने कहा कि यूपीआई आज रोज़मर्रा के भुगतान के लिए करोड़ों भारतीयों की जीवनरेखा बन चुका है। उन्होंने बताया कि यह मुकाम बैंकों, वित्तीय संस्थानों और संपूर्ण भुगतान इकोसिस्टम के बड़े निवेश की बदौलत हासिल हुआ है।
श्रीनिवासु ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित शुल्क सामान्य उपभोक्ताओं या छोटे मूल्य के व्यापारी लेनदेन पर लागू नहीं होगा। यह केवल ₹2,000 से अधिक के सीमित लेनदेन पर लागू होगा। इसके अतिरिक्त, बिजली-पानी के बिल, सरकारी कर, बीमा प्रीमियम और ईंधन भुगतान जैसी नियमित सेवाओं पर रियायती शुल्क का प्रावधान रखने का सुझाव दिया गया।
एमडीआर फंड से छोटे व्यापारियों को प्रोत्साहन
श्रीनिवासु ने यह भी सुझाव दिया कि मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) से प्राप्त राशि का एक हिस्सा एक विशेष कोष में डाला जाए। इस कोष का उपयोग विशेष रूप से छोटे व्यापारियों के बीच यूपीआई लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए किया जा सके। यह प्रस्ताव डिजिटल भुगतान की पहुँच को निचले स्तर तक ले जाने की दिशा में एक नीतिगत सुझाव के रूप में देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि भारत में यूपीआई उपयोगकर्ताओं की संख्या 50 करोड़ को पार कर चुकी है। श्रीनिवासु के अनुसार, जैसे-जैसे यूपीआई का विस्तार होगा, धोखाधड़ी रोकथाम, साइबर सुरक्षा और उपभोक्ता जागरूकता में और अधिक निवेश अनिवार्य होगा।
भारत की वैश्विक डिजिटल भुगतान में अग्रणी भूमिका
श्रीनिवासु ने रेखांकित किया कि भारत आज खुदरा डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में विश्व में अग्रणी स्थान पर है और दुनिया के कुल खुदरा डिजिटल लेनदेन में आधे से अधिक हिस्सेदारी भारत की है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यूपीआई अभी लगभग 50 करोड़ उपयोगकर्ताओं तक पहुँचा है, जिससे इसके आगे और विस्तार की पर्याप्त संभावनाएँ बनी हुई हैं।
निर्यात बाज़ारों की पहचान निजी क्षेत्र करे: लाहिड़ी
लाहिड़ी ने वैश्विक बाज़ारों में बढ़ती अनिश्चितता के संदर्भ में कहा कि भारतीय कंपनियों को नए निर्यात गंतव्यों की पहचान स्वयं करनी चाहिए। उनका मानना था कि सरकार की बजाय निजी क्षेत्र इस बात का बेहतर आकलन कर सकता है कि किन देशों और क्षेत्रों में भारतीय उत्पादों की माँग अधिक हो सकती है। उन्होंने अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, पूर्वी एशिया और ऑस्ट्रेलिया में मौजूद अवसरों का उल्लेख किया, यह स्वीकार करते हुए कि किसी एक विशेष बाज़ार को चिह्नित करना सरल नहीं है।
यह ऐसे समय में आया है जब यूपीआई की वित्तीय स्थिरता को लेकर नीति-निर्माताओं और उद्योग जगत में बहस तेज हो रही है। आने वाले समय में सरकार और नियामकों का रुख इस विषय पर निर्णायक भूमिका निभाएगा।