वेदांता का Q1 शुद्ध लाभ 18% घटकर ₹5,473 करोड़, प्रॉपर्टी कारोबार के डीमर्जर को बोर्ड की हरी झंडी
सारांश
मुख्य बातें
वेदांता लिमिटेड का वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2026) में कंसोलिडेटेड शुद्ध लाभ तिमाही आधार पर 18 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹5,473 करोड़ पर आ गया। इससे पिछली तिमाही (जनवरी-मार्च 2026) में यह आँकड़ा ₹6,698 करोड़ था। हालाँकि, बढ़ती इनपुट लागत के बावजूद जिंक, कॉपर और सिल्वर कारोबार के मज़बूत प्रदर्शन ने कंपनी के समग्र नतीजों को थामे रखा।
राजस्व और लागत का हाल
एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, कंपनी का परिचालन राजस्व भी तिमाही आधार पर करीब 1 प्रतिशत घटकर ₹23,456 करोड़ रह गया, जो पूर्व तिमाही में ₹23,731 करोड़ था। कच्चे माल की लागत में 37 प्रतिशत की तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे कुल खर्च 33 प्रतिशत उछलकर ₹17,558 करोड़ पर पहुँच गया।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक धातु बाज़ारों में मिश्रित संकेत बने हुए हैं और कच्चे माल की आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बरकरार है।
सालाना आधार पर सुधार
तिमाही गिरावट के बावजूद सालाना तुलना में कंपनी की लाभप्रदता में उल्लेखनीय सुधार देखा गया। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही की तुलना में वेदांता का नेट प्रॉफिट मार्जिन 12 प्रतिशत से बढ़कर 22 प्रतिशत हो गया। भारत में जिंक और लेड कारोबार से राजस्व करीब 50 प्रतिशत बढ़ा, कॉपर कारोबार का राजस्व 34 प्रतिशत चढ़ा, और सिल्वर कारोबार से प्राप्त राजस्व दोगुने से भी अधिक हो गया।
समूह की अन्य कंपनियों का प्रदर्शन
वेदांता समूह की अन्य इकाइयों ने भी इस तिमाही में उत्साहजनक परिणाम दिए। हिंदुस्तान जिंक ने धातुओं की मज़बूत कीमतों के बल पर अपना तिमाही मुनाफा दोगुने से अधिक बताया। वहीं, डीमर्जर के बाद अस्तित्व में आई वेदांता एल्युमिनियम मेटल कंपनी ने एल्युमिनियम की ऊँची कीमतों की बदौलत तीन गुना से अधिक मुनाफा दर्ज किया।
बोर्ड के अहम फैसले
तिमाही नतीजों के साथ-साथ कंपनी के बोर्ड ने कई महत्त्वपूर्ण निर्णय लिए। बोर्ड ने अरुण मिश्रा को 1 अगस्त 2026 से एक वर्ष के लिए कार्यकारी निदेशक (एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर) एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के रूप में पुनर्नियुक्त करने को मंजूरी दी है — यह नियुक्ति शेयरधारकों की स्वीकृति के अधीन होगी। मिश्रा अभी तक हिंदुस्तान जिंक के प्रमुख थे और अब वहाँ से पद छोड़कर वेदांता की कमान सँभालेंगे।
इसके अलावा, बोर्ड ने कंपनी के रियल एस्टेट कारोबार को एक अलग इकाई — वेदांता प्रॉपर्टी प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड — में डीमर्ज करने के प्रस्ताव को भी हरी झंडी दे दी है।
प्रॉपर्टी डीमर्जर: निवेशकों को क्या मिलेगा
कंपनी के अनुसार, इस डीमर्जर का उद्देश्य गैर-प्रमुख परिसंपत्तियों से अधिकतम मूल्य अर्जित करना है। सभी नियामकीय और आवश्यक मंजूरियाँ मिलने के पश्चात, वेदांता लिमिटेड के प्रत्येक 20 शेयरों पर निवेशकों को वेदांता प्रॉपर्टी प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड का 1 शेयर आवंटित किया जाएगा। गौरतलब है कि यह कदम वेदांता की व्यापक पोर्टफोलियो पुनर्संरचना रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत कंपनी अपने मुख्य खनन और धातु कारोबार पर ध्यान केंद्रित करना चाहती है। आने वाली तिमाहियों में डीमर्जर की प्रगति और अरुण मिश्रा के नेतृत्व में कंपनी की दिशा पर निवेशकों की नज़र बनी रहेगी।