आनंद बक्शी की पुण्यतिथि पर सुभाष घई ने व्हिसलिंग वुड्स में शुरू किया कविता लेखन कोर्स, इरशाद कामिल रहे मुख्य अतिथि
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई में मशहूर फिल्म निर्देशक सुभाष घई ने दिवंगत गीतकार आनंद बक्शी की पुण्यतिथि के अवसर पर अपने फिल्म संस्थान व्हिसलिंग वुड्स इंटरनेशनल में कला और कविता लेखन कोर्स का विधिवत शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम में 200 छात्रों ने हिस्सा लिया और प्रसिद्ध गीतकार इरशाद कामिल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का मुख्य घटनाक्रम
सुभाष घई ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर इस आयोजन की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, 'मंगलवार को आनंद बक्शी जी की पुण्यतिथि के अवसर पर व्हिसलिंग वुड्स में कला और कविता लेखन के कोर्स का शुभारंभ किया गया।' उन्होंने बताया कि इरशाद कामिल ने छात्रों को कविता लिखने की कला और उसके हुनर की बारीकियाँ समझाईं। कार्यक्रम में छात्रों ने स्वयं लिखी कविताएँ भी प्रस्तुत कीं, जिन्हें सुनकर पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा।
कोर्स की विशेषता और उद्देश्य
यह कविता लेखन पाठ्यक्रम सलीम आरिफ द्वारा तैयार किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों की रचनात्मक समझ को हर क्षेत्र में विकसित करना है। सुभाष घई ने इरशाद कामिल, सलीम आरिफ, राकेश बक्शी और असलम हसन का विशेष धन्यवाद किया, जिन्होंने छात्रों को एआई के इस दौर में भी रचनात्मक और कलात्मक कौशल विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
व्हिसलिंग वुड्स इंटरनेशनल के बारे में
व्हिसलिंग वुड्स इंटरनेशनल की स्थापना मुक्ता आर्ट्स और फिल्म सिटी मुंबई के सहयोग से की गई थी। यहाँ अभिनय, निर्देशन, छायांकन, संपादन, संगीत, गेम डिजाइन और फैशन सहित कई विषयों की पेशेवर शिक्षा दी जाती है। गौरतलब है कि संस्थान के छात्रों ने एक शॉर्ट फिल्म 'रॉकेटशिप' भी रिलीज़ की थी, जो पूरी तरह छात्रों का अपना प्रोजेक्ट था।
ईशा कोप्पिकर का छात्र प्रोजेक्ट को समर्थन
बॉलीवुड अभिनेत्री ईशा कोप्पिकर ने इस छात्र प्रोजेक्ट को अपना समर्थन दिया और फिल्म में 'अदिति' नामक एक माँ की मुख्य भूमिका निभाई। उन्होंने बिना किसी गॉडफादर के शून्य से अपना करियर बना रहे इन छात्रों की मेहनत की सराहना की और इस फिल्म का हिस्सा बनना स्वीकार किया। सुभाष घई की इस पहल को सोशल मीडिया पर प्रशंसकों से भरपूर सराहना मिल रही है।
आगे की राह
सुभाष घई की यह पहल दर्शाती है कि फिल्म उद्योग के अनुभवी दिग्गज अब नई पीढ़ी को पारंपरिक रचनात्मक कौशल से जोड़ने के लिए सक्रिय रूप से प्रयासरत हैं। आनंद बक्शी जैसे महान गीतकार की स्मृति में शुरू किया गया यह कोर्स आने वाले समय में हिंदी सिनेमा को नए और प्रतिभाशाली गीतकार देने की दिशा में एक सार्थक कदम साबित हो सकता है।