अंशुमन झा की 'लकड़बग्घा 2: द मंकी बिजनेस' कान्स में होगी प्रदर्शित, याकी मंकी की संरक्षण कहानी

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अंशुमन झा की 'लकड़बग्घा 2: द मंकी बिजनेस' कान्स में होगी प्रदर्शित, याकी मंकी की संरक्षण कहानी

सारांश

अंशुमन झा की नई फिल्म 'लकड़बग्घा 2: द मंकी बिजनेस' कान्स के प्रतिष्ठित मंच पर दुनिया के सामने आ रही है। दुर्लभ याकी मंकी की विलुप्त होती प्रजाति की कहानी के माध्यम से, यह फिल्म पर्यावरण संरक्षण और मानवीय मूल्यों का एक शक्तिशाली संदेश देती है।

मुख्य बातें

अंशुमन झा की फिल्म 'लकड़बग्घा 2: द मंकी बिजनेस' कान्स फिल्म फेस्टिवल के मार्चे डू फिल्म में प्रदर्शित होगी।
याकी मंकी की आबादी 1990 में 50,000 से घटकर वर्तमान में 5,000 से कम रह गई है।
फिल्म वनों की कटाई और अवैध वन्यजीव व्यापार के विरुद्ध एक संदेश देती है।
निर्देशक का कहना है कि फिल्म सभी जानवरों की सामूहिक आवाज है, न कि किसी एक प्रजाति की।
फिल्म की पृष्ठभूमि इंडोनेशिया में तैयार की गई है।

मुंबई, 12 मई। भारतीय सिनेमा में सामाजिक संदेश के साथ फिल्मों की परंपरा मजबूत होती जा रही है। अब अभिनेता-निर्देशक अंशुमन झा की फिल्म 'लकड़बग्घा 2: द मंकी बिजनेस' को कान्स फिल्म फेस्टिवल के 'मार्चे डू फिल्म' में एक्सक्लूसिव मार्केट स्क्रीनिंग के लिए चुना गया है। यह चयन वर्ल्ड प्रीमियर से पहले अंतरराष्ट्रीय वितरण की तैयारी का हिस्सा है।

पर्यावरण और संरक्षण का संदेश

फिल्म जंगली जानवरों की विलुप्त होती प्रजातियों और पर्यावरणीय संकट पर केंद्रित है। विशेष रूप से, यह 'याकी मंकी' नामक दुर्लभ बंदर की घटती आबादी की कहानी बयां करती है। 1990 में इन बंदरों की संख्या लगभग 50,000 थी, किंतु वनों की कटाई और अवैध वन्यजीव व्यापार के कारण यह संख्या घटकर 5,000 से भी कम रह गई है। फिल्म की पृष्ठभूमि इंडोनेशिया में तैयार की गई है।

निर्देशक का दृष्टिकोण

अंशुमन झा ने कहा कि पहली फिल्म कुत्तों के प्रति प्रेम के इर्द-गिर्द थी, लेकिन इस बार विचार का दायरा व्यापक किया गया है। उन्होंने कहा, ''लकड़बग्घा 2 सिर्फ किसी एक जानवर की कहानी नहीं है, यह सभी जानवरों की सामूहिक आवाज है। आज जानवर इसलिए विलुप्त हो रहे हैं, क्योंकि मानवीय मूल्य धीरे-धीरे समाप्त हो रहे हैं।''

झा ने आगे कहा कि फिल्म में हर संघर्ष के पीछे एक भावनात्मक आधार है। उन्होंने जोड़ा, ''यह फिल्म दर्शकों से सवाल पूछती है कि मनुष्य किस बात के लिए खड़ा है और क्या वह सही चीजों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।''

कान्स का अंतरराष्ट्रीय मंच

कान्स के इस प्रतिष्ठित मंच के बारे में झा ने कहा कि यह पहल फिल्म को उन दर्शकों तक पहुँचाने में सहायक होगी जो केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि हृदय और बुद्धि को छूने वाले सिनेमा की तलाश करते हैं। फिल्म में कार्रवाई के दृश्य यथार्थवादी अनुभव प्रदान करने के लिए सावधानीपूर्वक निर्मित किए गए हैं।

भारतीय सिनेमा की बदलती परंपरा

यह चयन भारतीय फिल्मों के अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बढ़ते प्रदर्शन का संकेत है। सामाजिक और पर्यावरणीय विषयों पर केंद्रित सिनेमा वैश्विक दर्शकों को आकर्षित कर रहा है, और कान्स जैसे महत्वपूर्ण उत्सवों में भारतीय फिल्मों की उपस्थिति बढ़ रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और कान्स का यह चयन इसी प्रवृत्ति को दर्शाता है। अंशुमन झा की 'लकड़बग्घा 2' केवल एक मनोरंजन फिल्म नहीं है — यह पर्यावरणीय संकट और वन्यजीव संरक्षण पर एक सीधा सवाल उठाती है। जब याकी मंकी जैसी प्रजातियों की संख्या 50,000 से 5,000 तक गिर गई है, तब यह फिल्म दर्शकों को अपनी जिम्मेदारी याद दिलाती है। कान्स जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय फिल्मों की बढ़ती उपस्थिति न केवल सांस्कृतिक गौरव की बात है, बल्कि यह दर्शाती है कि भारतीय सिनेमा वैश्विक समस्याओं को स्थानीय संवेदनशीलता के साथ कैसे प्रस्तुत कर सकता है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'लकड़बग्घा 2: द मंकी बिजनेस' फिल्म क्या है?
यह अभिनेता-निर्देशक अंशुमन झा द्वारा निर्देशित एक भारतीय फिल्म है जो दुर्लभ याकी मंकी प्रजाति की विलुप्त होती आबादी और पर्यावरणीय संकट पर केंद्रित है। फिल्म की पृष्ठभूमि इंडोनेशिया में तैयार की गई है।
याकी मंकी क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
याकी मंकी इंडोनेशिया की एक दुर्लभ बंदर प्रजाति है। 1990 में इनकी संख्या लगभग 50,000 थी, लेकिन वनों की कटाई और अवैध वन्यजीव व्यापार के कारण यह संख्या घटकर 5,000 से भी कम रह गई है। यह विलुप्ति का खतरा पर्यावरणीय संकट का एक महत्वपूर्ण संकेतक है।
फिल्म को कान्स में क्यों चुना गया?
फिल्म को कान्स फिल्म फेस्टिवल के 'मार्चे डू फिल्म' में एक्सक्लूसिव मार्केट स्क्रीनिंग के लिए चुना गया है ताकि अंतरराष्ट्रीय वितरण के लिए इसे वैश्विक दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया जा सके।
पहली फिल्म 'लकड़बग्घा' से यह कहानी कैसे अलग है?
पहली फिल्म कुत्तों के प्रति प्रेम पर केंद्रित थी, जबकि 'लकड़बग्घा 2' सभी जानवरों की सामूहिक आवाज है। निर्देशक के अनुसार, यह फिल्म सभी प्रजातियों की विलुप्ति और मानवीय मूल्यों के ह्रास के बीच संबंध को दर्शाती है।
राष्ट्र प्रेस
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