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अश्विन कौशल की माइक्रो-ड्रामा 'बेबी डॉल' में टैलेंट एजेंट की भूमिका, बोले- इंडस्ट्री बदल रही है

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अश्विन कौशल की माइक्रो-ड्रामा 'बेबी डॉल' में टैलेंट एजेंट की भूमिका, बोले- इंडस्ट्री बदल रही है

सारांश

चार दशक के अनुभवी अभिनेता अश्विन कौशल माइक्रो-ड्रामा सीरीज ‘बेबी डॉल’ में टैलेंट एजेंट के किरदार में हैं। राष्ट्र प्रेस से बातचीत में उन्होंने वर्टिकल-फॉर्मेट के दौर, बदलती तकनीक और कहानी कहने के नए अंदाज़ को अपनाने पर ज़ोर दिया, और कहा कि भावनाएं प्लेटफॉर्म के साथ नहीं बदलतीं।

मुख्य बातें

अभिनेता अश्विन कौशल माइक्रो-ड्रामा सीरीज ‘बेबी डॉल’ में अनुभवी टैलेंट एजेंट की भूमिका में हैं।
कौशल के अनुसार, किरदार उनकी असल ज़िंदगी की हंसमुख पर्सनैलिटी से प्रेरित है।
उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री बदल रही है और कलाकारों को नए फॉर्मेट व टेक्नोलॉजी अपनानी चाहिए।
कौशल ने फिल्म इंडस्ट्री में चार दशक पूरे किए हैं और कई टीवी सीरियल्स व वेब सीरीज में काम कर चुके हैं।
उनका मानना है कि प्लेटफॉर्म का आकार बदले, पर इंसानी भावनाएं नहीं बदलतीं।

अभिनेता अश्विन कौशल इन दिनों माइक्रो-ड्रामा सीरीज ‘बेबी डॉल’ को लेकर चर्चा में हैं, जिसमें वे एक अनुभवी टैलेंट एजेंट की भूमिका निभा रहे हैं। मुंबई में राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कौशल ने अपने किरदार, बदलते कंटेंट फॉर्मेट और चार दशक लंबे करियर को लेकर खुलकर बात की।

किरदार में अपनी ही झलक

कौशल ने बताया कि ‘बेबी डॉल’ में उनका किरदार उनकी असल जिंदगी के व्यक्तित्व से प्रेरित है। उन्होंने कहा, ‘इस किरदार को मेरी अपनी असल जिंदगी की पर्सनैलिटी के कुछ पहलुओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है। मैं हमेशा से ही एक मजेदार और हंसमुख इंसान के तौर पर जाना जाता रहा हूं और मेरी यही खूबी इस रोल में भी साफ झलकती है। मेरे पूरे करियर में, मेरा ‘सेंस ऑफ ह्यूमर’ सबसे बड़ी ताकत रहा है।’

कहानी का संदेश

अभिनेता के अनुसार, सीरीज ज़िंदगी के कुछ ज़रूरी सबकों पर रोशनी डालती है। उन्होंने कहा, ‘यह कहानी जिंदगी की कुछ जरूरी सीख पर प्रकाश डालती है। यह बताती है कि हमें हमेशा सावधान रहना चाहिए और अपनी भावनाओं को अच्छे-बुरे के फैसले पर हावी नहीं होने देना चाहिए।’

वर्टिकल फॉर्मेट और बदलती इंडस्ट्री

वर्टिकल-फॉर्मेट सीरीज में काम करने के अनुभव पर कौशल ने कहा, ‘हर तरह के काम की अपनी कुछ चुनौतियां होती हैं। हमें समय के साथ-साथ चलना चाहिए। हमारी इंडस्ट्री भी बदल रही है, तो हमें उसी हिसाब से खुद को भी ढालना चाहिए। बदलाव तो जिंदगी का एक स्वाभाविक हिस्सा है।’ उन्होंने जोड़ा कि चाहे नया फॉर्मेट हो, नई टेक्नोलॉजी हो या कहानी कहने का अलग अंदाज, कलाकारों को इसे खुले दिल से अपनाना चाहिए। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब OTT और शॉर्ट-वर्टिकल वीडियो प्लेटफॉर्म भारतीय मनोरंजन उद्योग के दर्शक-व्यवहार को तेज़ी से बदल रहे हैं।

भावनाएं नहीं बदलतीं

कौशल ने माना कि स्क्रीन का आकार भले बदल जाए, इंसानी भावनाएं वही रहती हैं। उन्होंने कहा, ‘सिनेमा में भावनाओं की कभी कोई कमी नहीं रही है। कैमरा या प्लेटफॉर्म का साइज चाहे छोटा हो या बड़ा, भावनाएं नहीं बदलतीं। इतिहास के बड़े-बड़े महाकाव्यों (जैसे रामायण-महाभारत) के जमाने से लेकर आज तक इंसानी भावनाएं वैसी की वैसी ही हैं। आंसू, खुशी, प्यार और दर्द, ये सब हमेशा हर इंसान के लिए एक जैसे ही रहते हैं।’

चार दशक का सफर

लंबे करियर में कई लोकप्रिय टीवी सीरियल्स और वेब सीरीज का हिस्सा रह चुके कौशल ने इंडस्ट्री में टिके रहने का मूलमंत्र साझा किया। उन्होंने कहा, ‘मैं भगवान का शुक्रगुजार हूं कि मैंने फिल्म इंडस्ट्री में चार दशक बिताए हैं। यह अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। फिल्म इंडस्ट्री एक विशाल समुद्र की तरह है। यह लगातार खुद को नया बनाती रहती है। इसमें सिर्फ वही लोग टिक पाते हैं, जिनमें लगन, ईमानदारी और दृढ़ता होती है।’ माइक्रो-ड्रामा फॉर्मेट के बढ़ते चलन के बीच कौशल जैसे अनुभवी कलाकारों की वापसी इस सेगमेंट को नई गंभीरता दे सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारतीय मनोरंजन उद्योग का तेज़ी से बढ़ता सेगमेंट हैं — और कौशल जैसे चार दशक के अनुभवी कलाकार का इस फॉर्मेट को अपनाना संकेत है कि मुख्यधारा का टैलेंट अब छोटे पर्दे और मोबाइल-फर्स्ट कंटेंट से कतरा नहीं रहा। हालांकि असली सवाल यह है कि क्या यह फॉर्मेट कलाकारों को टिकाऊ काम और उचित पारिश्रमिक दे पाएगा, या यह सिर्फ़ एल्गोरिदम-संचालित शॉर्ट-शेल्फ-लाइफ कंटेंट बनकर रह जाएगा। कौशल की ‘लगन, ईमानदारी और दृढ़ता’ वाली टिप्पणी इसी अनिश्चितता की ओर इशारा करती है।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

‘बेबी डॉल’ सीरीज में अश्विन कौशल की क्या भूमिका है?
अश्विन कौशल माइक्रो-ड्रामा सीरीज ‘बेबी डॉल’ में एक अनुभवी टैलेंट एजेंट का किरदार निभा रहे हैं। उनके अनुसार, यह किरदार उनकी अपनी हंसमुख पर्सनैलिटी से प्रेरित है और इसमें उनके ‘सेंस ऑफ ह्यूमर’ की झलक मिलती है।
अश्विन कौशल वर्टिकल-फॉर्मेट सीरीज पर क्या सोचते हैं?
कौशल का मानना है कि हर फॉर्मेट की अपनी चुनौतियां होती हैं और कलाकारों को बदलाव के साथ खुद को ढालना चाहिए। उन्होंने नई टेक्नोलॉजी और कहानी कहने के नए अंदाज़ को खुले दिल से अपनाने की बात कही।
अश्विन कौशल का करियर कितना लंबा रहा है?
अश्विन कौशल फिल्म इंडस्ट्री में चार दशक पूरे कर चुके हैं। इस दौरान उन्होंने कई लोकप्रिय टीवी सीरियल्स और वेब सीरीज में काम किया है।
माइक्रो-ड्रामा ‘बेबी डॉल’ का मुख्य संदेश क्या है?
कौशल के अनुसार, यह कहानी जिंदगी की ज़रूरी सीख पर रोशनी डालती है। यह बताती है कि व्यक्ति को सतर्क रहना चाहिए और भावनाओं को सही-गलत के फैसले पर हावी नहीं होने देना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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