अश्विन कौशल की माइक्रो-ड्रामा 'बेबी डॉल' में टैलेंट एजेंट की भूमिका, बोले- इंडस्ट्री बदल रही है
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता अश्विन कौशल इन दिनों माइक्रो-ड्रामा सीरीज ‘बेबी डॉल’ को लेकर चर्चा में हैं, जिसमें वे एक अनुभवी टैलेंट एजेंट की भूमिका निभा रहे हैं। मुंबई में राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कौशल ने अपने किरदार, बदलते कंटेंट फॉर्मेट और चार दशक लंबे करियर को लेकर खुलकर बात की।
किरदार में अपनी ही झलक
कौशल ने बताया कि ‘बेबी डॉल’ में उनका किरदार उनकी असल जिंदगी के व्यक्तित्व से प्रेरित है। उन्होंने कहा, ‘इस किरदार को मेरी अपनी असल जिंदगी की पर्सनैलिटी के कुछ पहलुओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है। मैं हमेशा से ही एक मजेदार और हंसमुख इंसान के तौर पर जाना जाता रहा हूं और मेरी यही खूबी इस रोल में भी साफ झलकती है। मेरे पूरे करियर में, मेरा ‘सेंस ऑफ ह्यूमर’ सबसे बड़ी ताकत रहा है।’
कहानी का संदेश
अभिनेता के अनुसार, सीरीज ज़िंदगी के कुछ ज़रूरी सबकों पर रोशनी डालती है। उन्होंने कहा, ‘यह कहानी जिंदगी की कुछ जरूरी सीख पर प्रकाश डालती है। यह बताती है कि हमें हमेशा सावधान रहना चाहिए और अपनी भावनाओं को अच्छे-बुरे के फैसले पर हावी नहीं होने देना चाहिए।’
वर्टिकल फॉर्मेट और बदलती इंडस्ट्री
वर्टिकल-फॉर्मेट सीरीज में काम करने के अनुभव पर कौशल ने कहा, ‘हर तरह के काम की अपनी कुछ चुनौतियां होती हैं। हमें समय के साथ-साथ चलना चाहिए। हमारी इंडस्ट्री भी बदल रही है, तो हमें उसी हिसाब से खुद को भी ढालना चाहिए। बदलाव तो जिंदगी का एक स्वाभाविक हिस्सा है।’ उन्होंने जोड़ा कि चाहे नया फॉर्मेट हो, नई टेक्नोलॉजी हो या कहानी कहने का अलग अंदाज, कलाकारों को इसे खुले दिल से अपनाना चाहिए। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब OTT और शॉर्ट-वर्टिकल वीडियो प्लेटफॉर्म भारतीय मनोरंजन उद्योग के दर्शक-व्यवहार को तेज़ी से बदल रहे हैं।
भावनाएं नहीं बदलतीं
कौशल ने माना कि स्क्रीन का आकार भले बदल जाए, इंसानी भावनाएं वही रहती हैं। उन्होंने कहा, ‘सिनेमा में भावनाओं की कभी कोई कमी नहीं रही है। कैमरा या प्लेटफॉर्म का साइज चाहे छोटा हो या बड़ा, भावनाएं नहीं बदलतीं। इतिहास के बड़े-बड़े महाकाव्यों (जैसे रामायण-महाभारत) के जमाने से लेकर आज तक इंसानी भावनाएं वैसी की वैसी ही हैं। आंसू, खुशी, प्यार और दर्द, ये सब हमेशा हर इंसान के लिए एक जैसे ही रहते हैं।’
चार दशक का सफर
लंबे करियर में कई लोकप्रिय टीवी सीरियल्स और वेब सीरीज का हिस्सा रह चुके कौशल ने इंडस्ट्री में टिके रहने का मूलमंत्र साझा किया। उन्होंने कहा, ‘मैं भगवान का शुक्रगुजार हूं कि मैंने फिल्म इंडस्ट्री में चार दशक बिताए हैं। यह अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। फिल्म इंडस्ट्री एक विशाल समुद्र की तरह है। यह लगातार खुद को नया बनाती रहती है। इसमें सिर्फ वही लोग टिक पाते हैं, जिनमें लगन, ईमानदारी और दृढ़ता होती है।’ माइक्रो-ड्रामा फॉर्मेट के बढ़ते चलन के बीच कौशल जैसे अनुभवी कलाकारों की वापसी इस सेगमेंट को नई गंभीरता दे सकती है।