करूर भगदड़ मामले में सीबीआई ने थलापति विजय को समन, 15 मार्च को होगी पूछताछ
सारांश
Key Takeaways
- सीबीआई ने थलापति विजय को पूछताछ के लिए तलब किया।
- वी. सेंथिल बालाजी को भी समन जारी किया गया है।
- यह मामला 27 सितंबर 2025 को हुई भगदड़ से जुड़ा है।
- सुप्रीम कोर्ट ने जांच सीबीआई को सौंपी थी।
- नए तथ्यों के आधार पर पूछताछ की जा रही है।
मुंबई, 10 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। तमिलनाडु के करूर भगदड़ मामले की जांच अब एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुँच गई है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने साउथ के मशहूर अभिनेता और राजनीतिक पार्टी तमिलगा वेट्री कजगम (टीवीके) के प्रमुख थलापति विजय को एक बार फिर पूछताछ के लिए तलब किया है। सीबीआई ने उन्हें 15 मार्च को अपने मुख्यालय में पेश होने के लिए कहा है।
इसके साथ ही करूर के विधायक वी. सेंथिल बालाजी को भी समन जारी किया गया है और उन्हें 17 मार्च को पूछताछ के लिए बुलाया गया है।
सीबीआई का मानना है कि इस मामले की कई महत्वपूर्ण कड़ियों को समझने के लिए दोनों से पूछताछ आवश्यक है।
गौरतलब है कि इससे पहले भी विजय से इस मामले में पूछताछ हो चुकी है। जनवरी में वह दो बार सीबीआई के सामने पेश हुए थे और अधिकारियों ने उनसे कई घंटों तक पूछताछ की थी। उस समय रैली के आयोजन, भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और कार्यक्रम की तैयारियों से जुड़े कई सवाल पूछे गए थे। नए तथ्यों के सामने आने के बाद एजेंसी ने उन्हें दोबारा तलब किया है, ताकि इन जानकारियों को स्पष्ट किया जा सके।
सीबीआई सूत्रों के अनुसार, विधायक वी. सेंथिल बालाजी से भी कार्यक्रम के आयोजन और प्रशासनिक तैयारियों को लेकर पूछताछ की जाएगी। एजेंसी यह जानना चाहती है कि कार्यक्रम के आयोजन में स्थानीय स्तर पर किन-किन लोगों की भूमिका थी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर किस प्रकार के निर्णय लिए गए थे। इसी वजह से उन्हें 17 मार्च को दिल्ली मुख्यालय में पेश होने के लिए कहा गया है।
यह पूरा मामला 27 सितंबर 2025 को तमिलनाडु के करूर में हुई एक दर्दनाक घटना से जुड़ा है। उस दिन विजय की एक बड़ी राजनीतिक रैली आयोजित की गई थी, जिसमें उन्हें देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग पहुंचे थे। स्थिति धीरे-धीरे नियंत्रण से बाहर हो गई और अचानक भगदड़ मच गई। इस हादसे में कई लोगों की जानें चली गईं, और कई लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए।
आदिकाल में इस मामले की जांच राज्य सरकार द्वारा गठित एक विशेष जांच दल (एसआईटी) कर रहा था। हालांकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए बाद में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को जांच सौंप दी।