सिंटा चुनाव: पद्मिनी कोल्हापुरे को 604 वोट, चोरी के आरोपों पर पूनम ढिल्लों का सीधा जवाब
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री पद्मिनी कोल्हापुरे ने सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (सिंटा) की कार्यकारी समिति के चुनाव में 604 वोट हासिल कर शीर्ष स्थान प्राप्त किया, जबकि अभिनेत्री पूनम ढिल्लों 601 वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहीं। 21 अक्टूबर 2026 को घोषित इस परिणाम के बाद दोनों अभिनेत्रियों ने संगठन में चल रहे विवादों और भविष्य की योजनाओं पर खुलकर बात की।
जीत पर पद्मिनी कोल्हापुरे का बयान
जीत के बाद पद्मिनी कोल्हापुरे ने मतदाताओं का आभार जताते हुए कहा, 'ये मेरा सर्टिफिकेट है और मैं सारे वोटर्स का धन्यवाद अदा करना चाहती हूं, जिन्होंने मुझे वोट दिया और नंबर 1 स्थान पर पहुंचाया। हालांकि मैं यह साफ करना चाहती हूं कि यहां पर कोई भी नंबर 1 या आखिरी नहीं है।'
उन्होंने एकता पर जोर देते हुए कहा, 'जिन कठिनाइयों को पार करते हुए सभी सदस्यों ने हमारा साथ दिया, यह अपने आप में उनकी जीत है। मुझे नहीं लगता कि किसी को दुख होगा — हम साथ ही हैं।'
पूनम ढिल्लों का जीत पर जश्न और कमेटी का परिचय
पूनम ढिल्लों ने जीत की खुशी साझा करते हुए कहा कि कोई कुछ भी कहे, कमेटी बन गई। उन्होंने बताया, 'हमारी इस कमेटी में 15 हार्डवर्किंग सदस्य हैं। हालांकि कुछ ऐसे सदस्य रह गए जो बहुत अच्छा काम करते थे, लेकिन 15 लोगों की कमेटी बननी थी।'
चोरी और दस्तावेज़ हटाने के आरोपों पर सफाई
गौरतलब है कि सिंटा विवाद के दौरान अभिनेत्री उपासना सिंह और कुनिका सदानंद ने पूनम ढिल्लों व पद्मिनी कोल्हापुरे पर संगठन के जरूरी दस्तावेज़ और सामान कथित तौर पर गैरकानूनी तरीके से हटाने तथा चोरी के आरोप लगाए थे।
इन आरोपों का जवाब देते हुए पूनम ढिल्लों ने कहा, 'उन्हें समझना होगा कि हमने एफडी क्यों तोड़ी थी। उन्होंने हमारे सारे बैंक अकाउंट फ्रीज कर दिए थे और उनका होना बेहद जरूरी था — हमारी ऑर्गनाइजेशन, वेलफेयर समेत सभी के लिए।' उन्होंने स्पष्ट किया कि यह राशि किसी व्यक्तिगत काम के लिए नहीं, बल्कि संगठन के संचालन के लिए खर्च की गई थी और सभी खर्च लिखित में दर्ज हैं।
ढिल्लों ने कहा, 'असल में उनको ऐसा लगा था कि अगर वे हमारे फंड्स बंद कर देंगी, तो हम कुछ काम नहीं कर पाएंगे। न पूनम ढिल्लों ने, न पद्मिनी कोल्हापुरे ने, और न ही किसी सदस्य ने इसे अपने अकाउंट में डाला।'
तीन वर्षीय कार्यकाल विवाद पर पूनम ढिल्लों का जवाब
सिंटा में 3 वर्षों के कार्यकाल को लेकर उठे सवालों पर पूनम ढिल्लों ने कहा, 'हम अपनी मर्जी से कुछ नहीं करते। एजीएम होती है, फिर रेजोल्यूशन पास होते हैं। उसके बाद ही बदलाव होता है — वह कॉन्स्टिट्यूशन रजिस्ट्रार के पास जाता है, फिर स्टैम्प होता है, तभी कोई बदलाव लागू होता है।'
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि यह निर्णय एजीएम ने 2025 में लिया था और उस समय उपासना सिंह स्वयं सेक्रेटरी थीं और उन्होंने ही खड़े होकर इसका ऐलान किया था — जो मौजूदा आरोपों को लेकर एक महत्वपूर्ण संदर्भ है।
आगे क्या होगा
नई 15 सदस्यीय कार्यकारी समिति के गठन के साथ सिंटा में एक नए अध्याय की शुरुआत हो गई है। यह देखना होगा कि दोनों पक्षों के बीच का विवाद कानूनी मंच पर आगे बढ़ता है या आपसी सुलह की राह निकलती है। फिलहाल नई कमेटी ने संगठन के सदस्यों के कल्याण और सुचारू संचालन को प्राथमिकता देने का संकेत दिया है।