सिंटा विवाद: वर्षा उसगांवकर का आरोप — कर्मचारी पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे के साथ मिले हुए हैं
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री वर्षा उसगांवकर ने 29 अक्टूबर 2026 को मुंबई में सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (सिंटा) के अपने कार्यालय दौरे के दौरान गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि सिंटा के कर्मचारी अभिनेत्रियों पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और संगठन के फंड की जानकारी माँगने पर जानबूझकर टालमटोल करते हैं। यह विवाद उस समय और गहरा हो गया है जब एक अदालत ने 20 अक्टूबर के चुनाव परिणामों पर किसी भी कार्रवाई से रोकते हुए सिंटा को अवमानना नोटिस जारी किया है।
वर्षा उसगांवकर के मुख्य आरोप
वर्षा उसगांवकर ने कहा, 'किसी भी संगठन के कर्मचारियों की वफादारी संगठन के प्रति होनी चाहिए, न कि कार्यकारी समिति के किसी सदस्य के प्रति, क्योंकि वे उनके निजी कर्मचारी नहीं हैं, वे संगठन के कर्मचारी हैं।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि विशेषकर संगठन के लेखाकार की वफादारी संदिग्ध पाई गई।
उनके अनुसार, सिंटा की सावधि जमा (फिक्स्ड डिपॉजिट) और निधियों के बारे में सवाल पूछने पर लेखाकार 'मुझे नहीं पता' या 'मैं उस दिन छुट्टी पर था' जैसे जवाब देते रहे। वर्षा ने कहा, 'फिक्स्ड डिपॉजिट का मामला मुझे लूट जैसा लगा। यह एक ट्रस्ट है, यह सदस्यों का पैसा है — उनकी अनुमति के बिना कोई इसे कैसे छू सकता है?'
सिंटा विवाद का पृष्ठभूमि और घटनाक्रम
गौरतलब है कि यह विवाद कुछ महीने पहले तब शुरू हुआ जब 21 सदस्यीय कार्यकारी समिति के 11 सदस्यों ने तानाशाही कामकाज का आरोप लगाते हुए सामूहिक इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद संगठन दो खेमों में बँट गया — एक तरफ पद्मिनी कोल्हापुरे और पूनम ढिल्लों का गुट, दूसरी तरफ उपासना सिंह और साहिला चड्ढा का गुट।
उपासना सिंह ने पहले आरोप लगाया था कि पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे ने एसोसिएशन की फिक्स्ड डिपॉजिट तोड़कर उस बैंक खाते से राशि निकाल ली, जिसे विवाद के दौरान फ्रीज रखा जाना चाहिए था। यह ऐसे समय में आया है जब संगठन के प्रबंधन पर पहले से ही सवाल उठ रहे हैं।
पूनम ढिल्लों का पक्ष
आरोपों का जवाब देते हुए पूनम ढिल्लों ने दावा किया है कि सिंटा के वित्तीय रिकॉर्ड कार्यकारी समिति के सभी सदस्यों के लिए उपलब्ध हैं और उन्होंने किसी भी अनियमितता से इनकार किया है।
उल्लेखनीय है कि 20 अक्टूबर को हुए सिंटा चुनाव में पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे ने सर्वाधिक वोट प्राप्त कर जीत दर्ज की थी, जिसे अब अदालती आदेश के कारण लागू नहीं किया जा सका है।
अदालत का हस्तक्षेप
इस विवाद में एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ आया है — अदालत ने सिंटा को अदालत की अवमानना के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अदालत का निर्देश है कि 20 अक्टूबर के चुनाव परिणामों पर कोई कार्रवाई न की जाए और उन्हें लागू न किया जाए।
यह आदेश सिंटा के आंतरिक संकट को अब एक खुली कानूनी लड़ाई में बदल देता है, जिसके नतीजे संगठन की भविष्य की कार्यप्रणाली और नेतृत्व पर गहरा असर डाल सकते हैं।
आगे क्या होगा
अदालती नोटिस के बाद सिंटा को अब न केवल आंतरिक दरार बल्कि कानूनी जवाबदेही का भी सामना करना है। वर्षा उसगांवकर जैसी वरिष्ठ अभिनेत्रियों के खुलकर सामने आने से यह मामला बॉलीवुड और टेलीविजन उद्योग में व्यापक बहस का विषय बन गया है। आने वाले हफ्तों में अदालती सुनवाई यह तय करेगी कि संगठन का नेतृत्व किसके हाथ में रहेगा।