2 अक्टूबर 2026
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सिंटा विवाद: उपासना सिंह के पूनम ढिल्लों-पद्मिनी पर गंभीर आरोप, नगमा बोलीं- 'कठपुतली न समझें'

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सिंटा विवाद: उपासना सिंह के पूनम ढिल्लों-पद्मिनी पर गंभीर आरोप, नगमा बोलीं- 'कठपुतली न समझें'

सारांश

सिंटा का आंतरिक संकट अब सार्वजनिक आरोप-प्रत्यारोप में बदल गया है। उपासना सिंह के 'कठपुतली' और अपमान के आरोपों के बाद नगमा का पलटवार — यह सिर्फ संगठन की लड़ाई नहीं, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री में वरिष्ठ कलाकारों के सम्मान और प्रतिनिधित्व पर बड़े सवाल खड़े करती है।

मुख्य बातें

अभिनेत्री उपासना सिंह ने 2 अक्टूबर 2026 को पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे पर वरिष्ठ कलाकारों से दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए।
मुकेश ऋषि को कथित तौर पर आधे घंटे की देरी के कारण एजीएम में मतदान से वंचित किया गया।
एसोसिएशन के तत्कालीन ट्रेजरर दीपक पाराशर को हेमा मालिनी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में कथित रूप से प्रवेश नहीं दिया गया।
नई एग्जीक्यूटिव कमेटी सदस्य नगमा ने 'कठपुतली' टिप्पणी को अपमानजनक बताते हुए कहा कि वे किसी के इशारे पर काम नहीं करतीं।
इससे पहले आठ एग्जीक्यूटिव कमेटी सदस्य इस्तीफा दे चुके हैं, जिनमें मुकेश ऋषि , दीपक पाराशर और विकास वर्मा शामिल थे।
पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे ने सभी आरोपों को खारिज किया है।

सिने एंड टेलीविजन आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (सिंटा) का आंतरिक विवाद 2 अक्टूबर 2026 को और गहरा गया, जब अभिनेत्री एवं सिंटा की पूर्व पदाधिकारी उपासना सिंह ने वरिष्ठ कलाकारों के साथ कथित बदसलूकी को लेकर एक के बाद एक गंभीर आरोप सार्वजनिक किए। साथ ही, संगठन की नई एग्जीक्यूटिव कमेटी की सदस्य नगमा ने 'कठपुतली' वाली टिप्पणी पर कड़ा एतराज जताया।

मुकेश ऋषि और दीपक पाराशर के साथ बदसलूकी के आरोप

उपासना सिंह के अनुसार, सिंटा की बैठकों के दौरान कई वरिष्ठ कलाकारों को अपमानित महसूस करना पड़ा। उन्होंने बताया कि वरिष्ठ अभिनेता मुकेश ऋषि मुंबई के ट्रैफिक के कारण करीब आधे घंटे देरी से पहुँचे, तो उन्हें बताया गया कि अब वह मतदान नहीं कर सकते। उन्होंने कहा, 'इससे वह इतने नाराज हुए कि एजीएम के दौरान माइक पर अपना गुस्सा जाहिर किया।' मुकेश ऋषि ने सार्वजनिक रूप से कहा था, 'मेरे साथ इतनी बदसलूकी हुई है, आप लोग मेरे साथ ऐसा कैसे कर सकते हैं?'

उपासना ने वरिष्ठ अभिनेता दीपक पाराशर का किस्सा भी साझा किया। उन्होंने कहा कि हेमा मालिनी से जुड़ी एक सिंटा प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पाराशर, जो उस समय एसोसिएशन के ट्रेजरर थे, दरवाजा खटखटाते रहे लेकिन कथित तौर पर उन्हें अंदर नहीं आने दिया गया। 'वह इस घटना से काफी आहत हुए और उन्होंने मुझसे कहा कि वहाँ जाना बेहद अपमानजनक महसूस हो रहा है।'

दीपक पाराशर की सेवा और उनके साथ व्यवहार

उपासना सिंह ने दीपक पाराशर की सेवाभावना का ज़िक्र करते हुए कहा कि वह सिंटा की बैठकों के दौरान बाकी सदस्यों के लिए खाना तक बनाते थे। 'करीब ढाई साल तक वह सुबह पाँच बजे उठकर एग्जीक्यूटिव कमेटी की मीटिंग के लिए खाना बनाते और सभी को खिलाते थे।' उपासना के अनुसार, ऐसे वरिष्ठ कलाकार के साथ सम्मान से पेश आना संगठन की न्यूनतम जिम्मेदारी है, भले ही किसी मुद्दे पर मतभेद क्यों न हो।

पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे पर आरोप

उपासना सिंह ने पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे पर भी आरोप लगाए। उनके अनुसार, दोनों खुद को स्टार मानते हुए दूसरे सदस्यों से दूरी बनाकर रखती थीं और बाकी लोगों के साथ एक ही लिफ्ट में भी नहीं जाती थीं। उन्होंने यह भी कहा कि संगठन के कर्मचारी विकास वर्मा को कथित तौर पर इसलिए नीचा दिखाया गया क्योंकि उन्हें अंग्रेजी नहीं आती। 'विकास हमेशा दूसरे कलाकारों की मदद के लिए मौजूद रहते हैं और जरूरतमंदों के लिए काम भी करते हैं। कई बार वह अपमानित होकर रोते हुए बाहर आए।'

उल्लेखनीय है कि पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे ने इन आरोपों को खारिज किया है और संगठन के कामकाज व वित्तीय मामलों को लेकर अपना पक्ष रखा है।

नगमा की कड़ी प्रतिक्रिया

सिंटा की नई एग्जीक्यूटिव कमेटी की सदस्य नगमा ने 'कठपुतली' वाली कथित टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'नई एग्जीक्यूटिव कमेटी के सदस्य किसी के इशारे पर काम नहीं कर रहे और सभी की अपनी सोच है। मैंने सलमान खान, शाहरुख खान, संजय दत्त, अक्षय कुमार और जैकी श्रॉफ जैसे बड़े कलाकारों के साथ काम किया है और इंडस्ट्री को काफी करीब से देखा है। किसी को 'कठपुतली' कहना बेहद अपमानजनक है। हमारे पास अपना दिमाग है।'

नगमा ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके सिंटा में आने का उद्देश्य किसी व्यक्तिगत लड़ाई का हिस्सा बनना नहीं, बल्कि जरूरतमंद कलाकारों के लिए संगठन को बेहतर तरीके से चलाने में योगदान देना है। 'संगठन में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन लड़ाई निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए और निजी आरोपों से बचना चाहिए।'

विवाद की पृष्ठभूमि और आगे की राह

गौरतलब है कि सिंटा का यह विवाद तब और उग्र हो गया था जब आठ एग्जीक्यूटिव कमेटी सदस्यों ने एक साथ इस्तीफा दिया था, जिनमें मुकेश ऋषि, विकास वर्मा और दीपक पाराशर भी शामिल थे। इस्तीफों के पीछे फैसले लेने के तरीके और सदस्यों से सलाह-मशविरा न किए जाने के आरोप सामने आए थे। यह ऐसे समय में आया है जब फिल्म उद्योग में कलाकारों के अधिकारों और संघ-संगठनों की भूमिका पर व्यापक बहस चल रही है। अब सभी पक्षों की नजर इस पर है कि सिंटा का नया नेतृत्व इन आरोपों का जवाब देते हुए संगठन को किस दिशा में ले जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो सीमांत और जरूरतमंद कलाकारों के हितों की वाहक मानी जाती हैं, आंतरिक लोकतंत्र और पारदर्शिता सुनिश्चित करने में सक्षम हैं — या फिर ये भी सत्ता-केंद्रित गुटबाजी का शिकार हो जाती हैं।
RashtraPress
2 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिंटा विवाद क्या है और यह क्यों बढ़ रहा है?
सिने एंड टेलीविजन आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (सिंटा) में आंतरिक मतभेद उस समय सार्वजनिक हो गए जब आठ एग्जीक्यूटिव कमेटी सदस्यों ने इस्तीफा दिया। इसके बाद पूर्व पदाधिकारियों और नई कमेटी के बीच बदसलूकी, 'कठपुतली' जैसी टिप्पणियों और फैसले लेने की प्रक्रिया को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हो गया।
उपासना सिंह ने पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे पर क्या आरोप लगाए हैं?
उपासना सिंह के अनुसार, पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे अन्य सदस्यों से दूरी बनाए रखती थीं और उनके साथ लिफ्ट तक साझा नहीं करती थीं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कर्मचारी विकास वर्मा को अंग्रेजी न जानने के कारण कथित तौर पर बार-बार अपमानित किया गया। दोनों अभिनेत्रियों ने इन आरोपों को खारिज किया है।
नगमा ने 'कठपुतली' टिप्पणी पर क्या कहा?
नगमा ने स्पष्ट किया कि नई एग्जीक्यूटिव कमेटी के सदस्य किसी के इशारे पर नहीं चलते और सभी की स्वतंत्र सोच है। उन्होंने कहा कि किसी को 'कठपुतली' कहना अपमानजनक है और उनका सिंटा में आने का उद्देश्य जरूरतमंद कलाकारों की मदद करना है, न कि किसी व्यक्तिगत लड़ाई में शामिल होना।
मुकेश ऋषि और दीपक पाराशर ने सिंटा से इस्तीफा क्यों दिया?
उपासना सिंह के अनुसार, मुकेश ऋषि को ट्रैफिक के कारण आधे घंटे की देरी पर मतदान से वंचित किया गया, जिससे वह नाराज हुए। दीपक पाराशर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कथित तौर पर प्रवेश नहीं दिया गया। दोनों उन आठ कमेटी सदस्यों में शामिल थे जिन्होंने फैसले लेने की प्रक्रिया और परामर्श की कमी का हवाला देते हुए इस्तीफा दिया।
क्या पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे ने आरोपों का जवाब दिया है?
हाँ, पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे ने उन पर लगे सभी आरोपों को खारिज किया है। दोनों ने संगठन के कामकाज और वित्तीय मामलों को लेकर अपना पक्ष सामने रखा है, हालाँकि विस्तृत खंडन अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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