सिंटा पुनर्मतदान: उपासना सिंह को 360 वोट, साहिला चड्ढा दूसरे स्थान पर; 15 सदस्यों के नतीजे घोषित
सारांश
मुख्य बातें
सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (सिंटा) के बहुप्रतीक्षित पुनर्मतदान की मतगणना 12 सितंबर 2026 (शनिवार) को मुंबई में संपन्न हुई, जिसमें उपासना सिंह ने 360 वोट हासिल कर शीर्ष स्थान प्राप्त किया। साहिला चड्ढा 357 वोट के साथ दूसरे और वर्षा उसगांवकर शर्मा 306 वोट के साथ छठे स्थान पर रहीं। यह चुनाव फिल्म-टेलीविजन उद्योग की इस महत्वपूर्ण अभिनेता संस्था के भीतर हफ्तों से चले आ रहे विवाद के बाद कराया गया।
मतगणना के पूर्ण आँकड़े
मतगणना में 15 प्रत्याशियों के वोट प्रकट हुए। क्रमवार परिणाम इस प्रकार रहे: उपासना सिंह – 360, साहिला चड्ढा – 357, विकास वर्मा – 349, दीपक पराशर – 348, कुनीका सदानंद – 312, वर्षा उसगांवकर शर्मा – 306, नगमा मोरारजी – 290, निमई बाली – 266, अर्जुन (फिरोज खान) – 250, आसमानी ताही – 237, शहजाद खान – 234, मनीष कुमार चतुर्वेदी – 219, सपन कुमार भट्टाचार्य – 197, रंजीत कुमार सिंह – 184 और रमाकांत बोरुडे – 176 वोट।
विजेताओं की प्रतिक्रिया
जीत के बाद दीपक पराशर ने कहा, 'मैंने इसकी उम्मीद नहीं की थी, मैं हैरान हूँ। मैं बहुत अच्छे वोटों से जीता हूँ। अब मैं सिर्फ अपने सिंटा सदस्यों के लिए काम करना चाहता हूँ। मैं चाहूँगा कि वे वापस आएँ और मेरे साथ काम करें।'
कुनीका सदानंद ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा, 'मैं उन सभी का बहुत आभारी हूँ जिन्होंने मुझे वोट दिया और हमारी टीम को जिताया। अब हमारी लड़ाई शुरू हुई है — हमें काम करके दिखाना है कि हम सच में सक्षम हैं।' उन्होंने विशेष रूप से उन 571 मतदाताओं का आभार व्यक्त किया, जो मतदान केंद्र तक पहुँचे और 'सिंटा को जिंदा रखने का साहस दिखाया।'
पुनर्मतदान का पृष्ठभूमि और कारण
यह पुनर्चुनाव तब अनिवार्य हुआ जब फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज द्वारा आदेशित नए चुनावों पर रोक लगाने से न्यायालय ने इनकार कर दिया। गौरतलब है कि इससे पहले सिंटा की 21 सदस्यीय कार्यकारी समिति के 11 सदस्यों ने एसोसिएशन के भीतर 'तानाशाही रवैये' का आरोप लगाते हुए सामूहिक इस्तीफा दे दिया था। यह ऐसे समय में आया जब बॉलीवुड और टेलीविजन उद्योग के भीतर कलाकार संगठनों की भूमिका और शासन पर व्यापक बहस चल रही है।
गोपनीयता विवाद और पदाधिकारियों की चिंताएँ
चुनाव-प्रक्रिया के दौरान अभिनेत्रियों तथा सिंटा पदाधिकारियों पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे ने सदस्यों की निजता के कथित उल्लंघन पर चिंता जताई थी। उन्होंने एसोसिएशन के डेटा तक पहुँच को लेकर उपासना सिंह से सवाल भी उठाए थे। इन आरोपों पर विवाद अभी भी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है।
आगे क्या
नवनिर्वाचित कार्यकारी समिति के सामने सबसे बड़ी चुनौती टूटे हुए भरोसे को बहाल करना और उन 11 पूर्व सदस्यों को फिर से जोड़ना होगी जिन्होंने इस्तीफा दिया था। साथ ही, गोपनीयता विवाद का कोई स्वीकार्य समाधान निकालना भी ज़रूरी होगा, ताकि सिंटा की विश्वसनीयता उद्योग में बनी रहे।