सिंटा पुनर्मतदान परिणाम: उपासना सिंह को 360, साहिला चड्ढा को 357 वोट मिले; वर्षा उसगांवकर भी आगे
सारांश
मुख्य बातें
सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (सिंटा) के बहुप्रतीक्षित पुनर्मतदान की मतगणना शनिवार, 13 सितंबर 2026 को मुंबई में सम्पन्न हुई, जिसमें उपासना सिंह ने 360 वोट प्राप्त कर शीर्ष स्थान हासिल किया। साहिला चड्ढा 357 वोट लेकर दूसरे और वर्षा उसगांवकर शर्मा 306 वोट के साथ छठे स्थान पर रहीं। यह पुनर्चुनाव एसोसिएशन के भीतर गहरे विवाद और कानूनी हस्तक्षेप के बाद कराया गया।
मतगणना के पूरे आँकड़े
21 सदस्यीय कार्यकारी समिति के लिए हुए इस चुनाव में सभी उम्मीदवारों को मिले वोट इस प्रकार रहे: उपासना सिंह — 360, साहिला चड्ढा — 357, विकास वर्मा — 349, दीपक पराशर — 348, कुनीका सदानंद — 312, वर्षा उसगांवकर शर्मा — 306, नगमा मोरारजी — 290, निमई बाली — 266, अर्जुन (फिरोज खान) — 250, आसमानी ताही — 237, शहजाद खान — 234, मनीष कुमार चतुर्वेदी — 219, सपन कुमार भट्टाचार्य — 197, रंजीत कुमार सिंह — 184 और रमाकांत बोरुडे — 176 वोट।
विजेताओं की प्रतिक्रिया
दीपक पराशर ने अपनी जीत पर हैरानी और खुशी जाहिर करते हुए कहा, 'मैंने इसकी उम्मीद नहीं की थी, मैं हैरान हूँ। मैं बहुत अच्छे वोटों से जीता हूँ। अब मैं सिर्फ अपने सिंटा सदस्यों के लिए काम करना चाहता हूँ। मैं चाहूँगा कि वे वापस आएँ और मेरे साथ काम करें।'
कुनीका सदानंद ने मतदाताओं का आभार जताते हुए कहा, 'मैं उन सभी का बहुत आभारी हूँ जिन्होंने मुझे वोट दिया और हमारी टीम को जिताया। अब हमारी लड़ाई शुरू हुई है — हमें काम करके दिखाना है कि हम सच में सक्षम हैं।' उन्होंने विशेष रूप से 571 मतदाताओं का उल्लेख किया जो सिंटा को जीवित रखने का साहस दिखाने वोट देने आए।
पुनर्मतदान की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि यह पुनर्चुनाव फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज द्वारा नए चुनाव कराने के आदेश पर अदालत के रोक लगाने से इनकार के बाद अनिवार्य हो गया था। इससे पहले, 21 सदस्यीय कार्यकारी समिति के 11 सदस्यों ने एसोसिएशन के भीतर 'तानाशाही रवैये' का आरोप लगाते हुए सामूहिक इस्तीफा दे दिया था, जिससे सिंटा अस्थिरता के गहरे दौर में चली गई थी।
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय मनोरंजन उद्योग में कलाकारों के अधिकार और संस्थागत पारदर्शिता को लेकर व्यापक बहस चल रही है।
विवाद और आरोप
इस बीच, वरिष्ठ अभिनेत्री और सिंटा पदाधिकारी पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे ने सदस्यों की निजता के कथित उल्लंघन पर चिंता जताई थी। उन्होंने एसोसिएशन के डेटा तक उपासना सिंह की पहुँच को लेकर सवाल उठाए थे — एक ऐसा आरोप जो चुनाव के दौरान विवाद का केंद्र बना रहा।
आगे की राह
नवनिर्वाचित कार्यकारी समिति के सामने सबसे बड़ी चुनौती एसोसिएशन के भीतर टूटे विश्वास को बहाल करना और उन सदस्यों को वापस लाना होगा जिन्होंने इस्तीफा दिया था। कुनीका सदानंद के शब्दों में, 'लड़ाई अभी शुरू हुई है।' सिंटा के भविष्य का दारोमदार इस बात पर है कि नई समिति अपने वादों को जमीन पर कितनी जल्दी उतार पाती है।