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गौहर जान: भारत की पहली रिकॉर्डिंग स्टार, जिनके लिए रियासती दरबार ने चलाई स्पेशल ट्रेन

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गौहर जान: भारत की पहली रिकॉर्डिंग स्टार, जिनके लिए रियासती दरबार ने चलाई स्पेशल ट्रेन

सारांश

गौहर जान महज़ एक गायिका नहीं थीं — वे एक युग थीं। 1902 में पहली रिकॉर्डिंग से लेकर रियासती दरबारों के लिए स्पेशल ट्रेन की माँग तक, उनका जीवन भारतीय संगीत और सेलिब्रिटी संस्कृति की पहली मिसाल है।

मुख्य बातें

गौहर जान का जन्म 26 जून 1873 को आजमगढ़, उत्तर प्रदेश में हुआ; असली नाम एंजेलिना योवर्ड था।
वर्ष 1902 में ग्रामोफोन पर आवाज़ रिकॉर्ड करने वाली भारत की पहली कलाकार बनीं।
1902 से 1920 के बीच 600 से अधिक गीत रिकॉर्ड किए, 10 से अधिक भाषाओं में गाया।
इतिहासकार विक्रम संपत की पुस्तक के अनुसार, एक रियासती कार्यक्रम के लिए कथित तौर पर स्पेशल ट्रेन की माँग स्वीकार की गई।
दिसंबर 1911 में दिल्ली दरबार में सम्राट जॉर्ज पंचम के समक्ष प्रस्तुति दी।
17 जनवरी 1930 को मैसूर में निधन; अंतिम वर्ष महाराजा कृष्णराज वाडियार चतुर्थ के दरबार में बिताए।

भारतीय शास्त्रीय संगीत की दुनिया में गौहर जान का नाम एक ऐसे युग का प्रतीक है, जब एक गायिका की आवाज़ ने पहली बार ग्रामोफोन की सुइयों पर अपनी छाप छोड़ी। उन्हें व्यापक रूप से भारत की पहली रिकॉर्डिंग स्टार और देश की पहली सेलिब्रिटी गायिका माना जाता है। उनकी ख्याति इतनी थी कि कथित तौर पर एक रियासती कार्यक्रम में शिरकत के लिए उनकी स्पेशल ट्रेन की माँग स्वीकार कर ली गई थी।

जन्म और प्रारंभिक जीवन

गौहर जान का जन्म 26 जून 1873 को उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में हुआ था। उनका असली नाम एंजेलिना योवर्ड था। उनके पिता रॉबर्ट विलियम योवर्ड पेशे से इंजीनियर थे, जबकि माँ विक्टोरिया हेमिंग्स संगीत और नृत्य में दक्ष थीं। माता-पिता के अलग होने के बाद माँ ने इस्लाम धर्म अपनाया और अपना नाम मलका जान रख लिया। एंजेलिना का नाम भी बदलकर गौहर जान हो गया। माँ-बेटी बाद में कोलकाता आ गईं, जहाँ से गौहर के संगीत जीवन की असली इबारत लिखी गई।

संगीत साधना और दरबारी पहचान

कोलकाता में गौहर जान ने उस दौर के कई प्रतिष्ठित उस्तादों से हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत, ठुमरी, दादरा, कजरी और कथक की बारीकियाँ सीखीं। सन् 1888 में उन्होंने दरभंगा राज के दरबार में प्रस्तुति दी, जिसके बाद वे दरबारी संगीतकार के रूप में पहचानी जाने लगीं। धीरे-धीरे उनका नाम देश के कई राजघरानों तक पहुँच गया और उनकी माँग बढ़ती चली गई।

ग्रामोफोन युग की पहली आवाज़

बीसवीं सदी की शुरुआत में जब ग्रामोफोन तकनीक भारत पहुँची, तब गौहर जान ने इतिहास रच दिया। वर्ष 1902 में उनकी आवाज़ पहली बार रिकॉर्ड की गई। उस समय रिकॉर्ड की अवधि केवल तीन मिनट के आसपास होती थी, इसलिए उन्होंने लंबे शास्त्रीय गायन को सीमित समय में ढालने की अनूठी कला विकसित की। हर रिकॉर्डिंग के अंत में वे 'माय नेम इज़ गौहर जान' कहती थीं, जो उनकी विशिष्ट पहचान बन गई। 1902 से 1920 के बीच उन्होंने 600 से अधिक गीत रिकॉर्ड किए और दस से अधिक भाषाओं में अपनी आवाज़ दी। यह उपलब्धि उस दौर में किसी भी कलाकार के लिए अभूतपूर्व थी।

स्पेशल ट्रेन की माँग — शाही रुतबे की मिसाल

गौहर जान की लोकप्रियता और उनकी शाही जीवनशैली के किस्से आज भी चर्चा में रहते हैं। इतिहासकार विक्रम संपत की पुस्तक 'माई नेम इज़ गौहर जान' और उस पर आधारित लेखों के अनुसार, एक रियासती कार्यक्रम में भाग लेने के लिए उन्होंने अपने बड़े दल, नौकरों और सामान सहित यात्रा करने हेतु स्पेशल ट्रेन की माँग रखी थी। कहा जाता है कि उनके प्रभाव और प्रतिष्ठा को देखते हुए यह माँग स्वीकार कर ली गई। यह प्रसंग उस युग में उनके असाधारण रुतबे का प्रमाण है।

दिल्ली दरबार से मैसूर तक का सफर

गौहर जान की तस्वीरें उस ज़माने में पोस्टकार्डों पर छपती थीं और जनसाधारण उनके बारे में जानने को उत्सुक रहता था। दिसंबर 1911 में उन्हें दिल्ली दरबार में ब्रिटेन के सम्राट जॉर्ज पंचम के सम्मान में आयोजित समारोह में प्रस्तुति देने के लिए आमंत्रित किया गया, जो उस समय किसी भी कलाकार के लिए सर्वोच्च सम्मान माना जाता था।

जीवन के अंतिम वर्षों में गौहर जान मैसूर चली गईं, जहाँ महाराजा कृष्णराज वाडियार चतुर्थ ने उन्हें दरबारी संगीतकार के रूप में आमंत्रित किया था। बढ़ती उम्र और खराब स्वास्थ्य के बीच 17 जनवरी 1930 को मैसूर में उनका निधन हो गया। उनकी विरासत आज भी भारतीय संगीत की नींव में जीवित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि औपनिवेशिक भारत में एक महिला कलाकार के असाधारण आत्मविश्वास की गाथा है। जब ग्रामोफोन तकनीक पश्चिम से भारत पहुँची, तब उन्होंने उसे अपनी शर्तों पर अपनाया — 600 रिकॉर्डिंग और 'माय नेम इज़ गौहर जान' की घोषणा के साथ। स्पेशल ट्रेन का किस्सा महज़ विलासिता का नहीं, बल्कि उस दौर में एक कलाकार की सौदेबाज़ी की ताकत का प्रमाण है। दुर्भाग्यवश, उनका अंत उनके वैभव जैसा नहीं था — मैसूर में एकाकी और बीमार; यह विरोधाभास आज भी भारत में कलाकारों की सामाजिक सुरक्षा पर सवाल उठाता है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गौहर जान कौन थीं और उन्हें भारत की पहली रिकॉर्डिंग स्टार क्यों कहा जाता है?
गौहर जान वर्ष 1902 में ग्रामोफोन पर अपनी आवाज़ रिकॉर्ड करवाने वाली भारत की पहली कलाकार थीं, इसीलिए उन्हें देश की पहली रिकॉर्डिंग स्टार माना जाता है। उन्होंने 1902 से 1920 के बीच 600 से अधिक गीत दस से अधिक भाषाओं में रिकॉर्ड किए।
गौहर जान के लिए स्पेशल ट्रेन की माँग का किस्सा क्या है?
इतिहासकार विक्रम संपत की पुस्तक 'माई नेम इज़ गौहर जान' के अनुसार, एक रियासती कार्यक्रम में अपने पूरे दल, नौकरों और सामान के साथ जाने के लिए गौहर जान ने कथित तौर पर स्पेशल ट्रेन की माँग रखी थी, जो उनकी प्रतिष्ठा को देखते हुए स्वीकार कर ली गई।
गौहर जान का असली नाम क्या था और उनका जन्म कहाँ हुआ?
गौहर जान का असली नाम एंजेलिना योवर्ड था और उनका जन्म 26 जून 1873 को उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में हुआ था। माँ के इस्लाम धर्म अपनाने के बाद उनका नाम बदलकर गौहर जान रखा गया।
गौहर जान ने दिल्ली दरबार में कब प्रस्तुति दी थी?
दिसंबर 1911 में दिल्ली दरबार में ब्रिटेन के सम्राट जॉर्ज पंचम के सम्मान में आयोजित समारोह में गौहर जान को प्रस्तुति देने के लिए आमंत्रित किया गया था, जो उस युग के किसी भी कलाकार के लिए सर्वोच्च सम्मान माना जाता था।
गौहर जान का निधन कब और कहाँ हुआ?
17 जनवरी 1930 को मैसूर में गौहर जान का निधन हुआ। जीवन के अंतिम वर्षों में वे महाराजा कृष्णराज वाडियार चतुर्थ के निमंत्रण पर मैसूर दरबार में दरबारी संगीतकार के रूप में रह रही थीं।
राष्ट्र प्रेस
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