गायक हरिहरन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेंट किया 'वंदे मातरम' का स्पेशल विनाइल एडिशन
सारांश
मुख्य बातें
पद्म श्री से सम्मानित गायक हरिहरन अपनी पत्नी ललिता हरिहरन के साथ राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से सौजन्य भेंट करने पहुँचे और उन्हें 'द एंथम – वंदे मातरम' का एक विशेष विनाइल एडिशन तथा एक खास टर्नटेबल भेंट किया। हरिहरन ने इस मुलाकात को अपने परिवार की चार पीढ़ियों के लिए एक अविस्मरणीय सम्मान बताया।
मुलाकात का विवरण
इस भेंट के दौरान गायक हरिहरन के साथ उनकी माँ अलमेलु मणि भी उपस्थित थीं। हरिहरन ने बताया कि राष्ट्रपति मुर्मू ने उनकी माँ के साथ जिस स्नेह और आदर से बातचीत की, वह क्षण उनके लिए अत्यंत भावुक करने वाला रहा। इस भेंट की कुछ तस्वीरें गायक ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा कीं।
हरिहरन ने क्या कहा
हरिहरन ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'हमारे दिलों में हमेशा के लिए बसा एक दिन।' उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रपति भवन में भारत की राष्ट्रपति से मिलना उनके और उनके पूरे परिवार के लिए बहुत बड़ा सौभाग्य था। उन्होंने यह भी कहा, 'संगीत राष्ट्र के लिए हमारी एक छोटी सी भेंट है और अपने प्रियजनों की मौजूदगी में राष्ट्रपति का आशीर्वाद मिलना इस सफर को सच में पूरा करता है।'
राष्ट्रपति मुर्मू की गर्मजोशी और शालीनता की प्रशंसा करते हुए हरिहरन ने कहा कि यह स्मृति उनका परिवार जीवनभर संजोकर रखेगा।
हरिहरन का संगीत सफर
हरिहरन भारत के सबसे बहुमुखी और प्रतिष्ठित प्लेबैक गायकों में गिने जाते हैं। उन्होंने 1980 के दशक में अपना करियर शुरू किया और हिंदी, तमिल, मलयालम, तेलुगु समेत अनेक भारतीय भाषाओं में अपनी आवाज़ का जादू बिखेरा। उनके मशहूर गानों में 'बॉम्बे' का 'तू ही रे', 'रोजा' का 'रोजा जानेमन' और 'खामोशी' का 'बांहों के दरमियान' शामिल हैं।
भारतीय संगीत में उनके असाधारण योगदान के लिए उन्हें 2004 में पद्म श्री से नवाज़ा गया था। गौरतलब है कि 'वंदे मातरम' जैसे राष्ट्रीय महत्व के संगीत को विनाइल फॉर्मेट में प्रस्तुत करना और राष्ट्रपति को भेंट करना, भारतीय शास्त्रीय एवं देशभक्ति संगीत को जीवित रखने की एक सांस्कृतिक पहल के रूप में देखा जा सकता है।
सांस्कृतिक महत्व
यह भेंट ऐसे समय में आई है जब देश में विनाइल रिकॉर्ड्स के प्रति रुचि फिर से बढ़ रही है और संगीत प्रेमी इस माध्यम को एक विशेष श्रेणी का दर्जा दे रहे हैं। हरिहरन द्वारा 'वंदे मातरम' के इस विशेष संस्करण को राष्ट्र के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठी शख्सियत को समर्पित करना संगीत और राष्ट्रभक्ति के संगम का प्रतीक है। यह भेंट कला और राष्ट्र के प्रति उनकी गहरी आस्था को दर्शाती है।