'इंडियाज बेस्ट डांसर' पर बॉलीवुड डांस का सफर: 'आलम आरा' से माधुरी दीक्षित तक
सारांश
मुख्य बातें
'इंडियाज बेस्ट डांसर' का सेट 2 जून को भारतीय सिनेमा के नृत्य-इतिहास की एक अनूठी पाठशाला बन गया, जब जज जावेद जाफरी, टेरेंस लुईस और होस्ट हर्ष लिंबाचिया ने मिलकर बॉलीवुड डांस की विकास-यात्रा पर विस्तृत चर्चा की। बातचीत में 1931 में आई भारतीय सिनेमा की पहली टॉकी फिल्म 'आलम आरा' से लेकर आज के आधुनिक नृत्य तक का सफर समेटा गया।
मुख्य घटनाक्रम
होस्ट हर्ष लिंबाचिया ने शो के दौरान यह सवाल उठाया कि बॉलीवुड में पहली बार नृत्य की झलक किस फिल्म में देखने को मिली थी। इसका जवाब देते हुए उन्होंने खुद कहा, 'शुरुआती दौर में फिल्म 'आलम आरा' में डांस और प्रदर्शन की शुरुआती झलक सामने आई थी। उस समय के कलाकारों ने शायद कभी कल्पना भी नहीं की होगी कि आने वाले समय में भारतीय सिनेमा में डांस इतनी बड़ी पहचान बन जाएगा।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि 'आलम आरा' में पृथ्वीराज कपूर थे और उसी परिवार की परपोती करिश्मा कपूर आगे चलकर बॉलीवुड डांस की पहचान बनीं।
पृथ्वीराज कपूर और कपूर खानदान का योगदान
जज जावेद जाफरी ने इस अवसर पर दिग्गज अभिनेता पृथ्वीराज कपूर को याद करते हुए कहा, 'पृथ्वीराज कपूर की स्क्रीन प्रेजेंस बेहद मजबूत थी और उनका व्यक्तित्व बहुत प्रभावशाली था।' जाफरी ने आगे कहा कि उनके बाद राज कपूर, शम्मी कपूर और शशि कपूर जैसे महान कलाकार आए और कपूर परिवार ने भारतीय सिनेमा को एक अलग तरह की ऊर्जा दी, जो आज भी याद की जाती है।
प्रशिक्षित अभिनेत्रियों ने बदला बॉलीवुड डांस का स्तर
जज टेरेंस लुईस ने बॉलीवुड नृत्य के बदलते स्वरूप पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, 'हिंदी सिनेमा में डांस का स्तर धीरे-धीरे बदला और इसमें कई प्रशिक्षित कलाकारों का बड़ा योगदान रहा।' उन्होंने वैजयंतीमाला, हेमा मालिनी और श्रीदेवी का विशेष उल्लेख किया, जिन्होंने शास्त्रीय नृत्य की ट्रेनिंग के साथ फिल्म उद्योग में कदम रखा और अपनी तकनीक व अनुशासन से बॉलीवुड डांस को नई ऊँचाई दी।
माधुरी दीक्षित और करिश्मा कपूर का युग
टेरेंस लुईस ने आगे कहा, 'जब माधुरी दीक्षित का दौर आया, तो बॉलीवुड डांस में एक नई ऊर्जा देखने को मिली। उनके एक्सप्रेशन और डांस स्टाइल ने दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि माधुरी के बाद करिश्मा कपूर ने भी नृत्य में एक अलग फिल्मी अंदाज़ शामिल किया। लुईस के अनुसार, हर पीढ़ी ने बॉलीवुड डांस को कुछ नया दिया और उसे आगे बढ़ाया।
बॉलीवुड डांस की विरासत
यह चर्चा ऐसे समय में हुई जब भारतीय फिल्म उद्योग अपनी सांस्कृतिक जड़ों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने की कोशिश कर रहा है। गौरतलब है कि 'आलम आरा' को भारतीय बोलती फिल्मों की आधारशिला माना जाता है और उसमें नृत्य के शुरुआती तत्वों का समावेश भारतीय सिनेमा की दिशा तय करने में अहम रहा। 'इंडियाज बेस्ट डांसर' जैसे मंचों पर इस विरासत की चर्चा यह दर्शाती है कि नई पीढ़ी के कलाकार अपनी परंपरा से जुड़े हुए हैं।