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जाह्नवी कपूर ने 'पेड्डी' में ऑब्जेक्टिफिकेशन पर तोड़ी चुप्पी, बोलीं- 'यही रोल मुझे चाहिए था'

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जाह्नवी कपूर ने 'पेड्डी' में ऑब्जेक्टिफिकेशन पर तोड़ी चुप्पी, बोलीं- 'यही रोल मुझे चाहिए था'

सारांश

जाह्नवी कपूर ने 'पेड्डी' में अपने किरदार के विवादित चित्रण की जिम्मेदारी खुद ली — कहा कि यह 'ऑब्जेक्टिफिकेशन' था और इसने यौन उत्पीड़न को बढ़ावा दिया। बॉलीवुड में इस बेबाकी को असामान्य माना जा रहा है।

मुख्य बातें

जाह्नवी कपूर ने 'कॉफी विद करण' में वरुण धवन के साथ 'पेड्डी' विवाद पर खुलकर बात की।
उन्होंने माना कि फिल्म में उनका चित्रण 'हद से ज्यादा ऑब्जेक्टिफिकेशन' था और इसने यौन उत्पीड़न को बढ़ावा दिया।
जाह्नवी ने कहा कि वह शूटिंग के दौरान और अधिक सतर्क और मुखर रह सकती थीं।
उन्होंने डायरेक्टर के दबाव और प्रोफेशनलिज्म की मजबूरी का भी जिक्र किया।
उनका बयान बॉलीवुड में महिला अभिनेत्रियों के ऑन-स्क्रीन चित्रण को लेकर चल रही बहस को नई दिशा दे रहा है।

अभिनेत्री जाह्नवी कपूर ने 29 अक्टूबर 2026 को स्पोर्ट्स ड्रामा फिल्म 'पेड्डी' में अपने किरदार के चित्रण को लेकर उठे विवाद पर पहली बार खुलकर बात की। लोकप्रिय टॉक शो 'कॉफी विद करण' में अभिनेता वरुण धवन के साथ शामिल होने के दौरान, उन्होंने फिल्म में अपने किरदार को 'ऑब्जेक्टिफाई' किए जाने की आलोचना को न केवल स्वीकार किया, बल्कि इसकी जिम्मेदारी भी अपने ऊपर ली।

आलोचना पर जाह्नवी का रुख

अधिकांश अभिनेत्रियाँ ऐसी आलोचनाओं से किनारा करती हैं, लेकिन जाह्नवी ने इस विवाद को एक सकारात्मक बदलाव के अवसर के रूप में देखा। उन्होंने कहा, 'मुझे खुशी है कि 'पेड्डी' में मेरे चित्रण को लेकर इतना बड़ा मुद्दा बना। शायद अगली बार जब कोई अभिनेत्री कहेगी कि वह असहज है, तो लोग उसे किसी एलियन की तरह नहीं देखेंगे।' उनका यह बयान सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बन गया।

शर्मिंदगी और आत्म-मंथन

जाह्नवी ने स्वीकार किया कि शुरू में वह इस मुद्दे पर बोलने से हिचकिचा रही थीं, क्योंकि 'पेड्डी' की टीम के कई लोगों ने इस प्रोजेक्ट पर कड़ी मेहनत की थी। उन्होंने कहा, 'मुझे सच में समझ नहीं आ रहा था कि क्या कहूं या कुछ कहना भी चाहिए या नहीं, लेकिन यह जरूरी था कि जो कुछ भी हुआ, उसमें अपनी जिम्मेदारी मैं खुद लूं।'

'धड़क' फेम अभिनेत्री ने कहा कि उनके मन पर यह बात भारी थी कि ऐसे चित्रण का समाज पर, खासकर महिलाओं पर, कितना नकारात्मक असर पड़ सकता है। उन्होंने माना कि वह इस मामले में थोड़ी और सतर्क रह सकती थीं।

ऑब्जेक्टिफिकेशन और यौन उत्पीड़न पर बेबाक राय

जाह्नवी ने अपने बयान में साफ शब्दों में कहा, 'क्या मैं कुछ और कर सकती थी? क्या मैं और ज्यादा सतर्क रह सकती थी? क्या मैं इस पर कड़ा विरोध जता सकती थी? बिल्कुल, हां। क्या यह समस्याजनक था? क्या यह हद से ज्यादा 'ऑब्जेक्टिफिकेशन' था? क्या इसने एक तरह से यौन उत्पीड़न को भी बढ़ावा दिया? हां।' यह स्वीकारोक्ति हिंदी सिनेमा की किसी अभिनेत्री के लिए असामान्य रूप से स्पष्ट मानी जा रही है।

डायरेक्टर और प्रोफेशनलिज्म का दबाव

जाह्नवी ने यह भी समझाया कि शूटिंग के दौरान विरोध करना उनके लिए इतना आसान नहीं था। उन्होंने कहा, 'हां, डायरेक्टर जो कहते हैं, आपको प्रोफेशनल बने रहना होता है और उनकी बात माननी पड़ती है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी पर दोष नहीं डालना चाहतीं, लेकिन जैसे-जैसे उन्हें परिस्थितियों का अहसास होता गया, वह चीजों को कम से कम समस्याजनक बनाने की कोशिश करती रहीं।

आगे क्या बदल सकता है

जाह्नवी के इस बयान को बॉलीवुड में महिला अभिनेत्रियों के अधिकारों और उनके चित्रण से जुड़ी बहस को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब हिंदी फिल्म उद्योग में #MeToo और महिलाओं के ऑन-स्क्रीन चित्रण को लेकर बहस लगातार गहरी हो रही है। गौरतलब है कि अगर बड़े नाम इस तरह खुलकर बोलेंगे, तो नई अभिनेत्रियों के लिए अपनी असहजता जाहिर करने की राह आसान हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह यह है कि यह 'बोलने की हिम्मत' फिल्म रिलीज के बाद आई — शूटिंग के दौरान नहीं। असली सवाल यह है कि जब सेट पर ऐसे फैसले लिए जाते हैं, तब अभिनेत्रियों के पास असहमति जताने के लिए कितनी संरचनागत सुरक्षा है। जाह्नवी की बेबाकी सराहनीय है, पर यह इंडस्ट्री में बदलाव का संकेत तभी बनेगी जब निर्माता और निर्देशक भी अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करें।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जाह्नवी कपूर ने 'पेड्डी' विवाद पर क्या कहा?
जाह्नवी कपूर ने माना कि 'पेड्डी' में उनका चित्रण समस्याजनक था, यह 'हद से ज्यादा ऑब्जेक्टिफिकेशन' था और इसने यौन उत्पीड़न को बढ़ावा दिया। उन्होंने कहा कि वह शूटिंग के दौरान और अधिक मुखर रह सकती थीं।
'पेड्डी' में जाह्नवी कपूर के किरदार का विवाद क्या है?
'पेड्डी' एक स्पोर्ट्स ड्रामा फिल्म है जिसमें जाह्नवी कपूर के किरदार को दिखाए जाने के तरीके को लेकर आलोचना हुई। आलोचकों का कहना था कि उनके किरदार को 'ऑब्जेक्टिफाई' किया गया, जो महिलाओं के प्रति समाज में गलत संदेश भेजता है।
जाह्नवी कपूर ने डायरेक्टर के दबाव के बारे में क्या कहा?
जाह्नवी ने कहा कि सेट पर डायरेक्टर की बात मानना प्रोफेशनलिज्म का हिस्सा होता है। उन्होंने किसी पर सीधा दोष नहीं डाला, लेकिन माना कि जैसे-जैसे उन्हें स्थिति का अहसास हुआ, उन्होंने चीजों को कम समस्याजनक बनाने की कोशिश की।
जाह्नवी कपूर ने 'पेड्डी' विवाद पर खुशी क्यों जताई?
जाह्नवी का कहना था कि इस विवाद से शायद अब उन अभिनेत्रियों के प्रति ज्यादा संवेदनशीलता आएगी जो अपने चित्रण को लेकर असहज महसूस करती हैं। उनके अनुसार, यह बहस जरूरी थी ताकि भविष्य में ऐसी आवाजें अनसुनी न रहें।
क्या जाह्नवी कपूर ने इस विवाद की जिम्मेदारी ली?
हाँ, जाह्नवी ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह इस मामले में अपनी जिम्मेदारी खुद लेना चाहती हैं। उन्होंने माना कि वह थोड़ी और सतर्क और मुखर रह सकती थीं, और इस पूरे मामले को लेकर उन्हें शर्मिंदगी भी महसूस हुई।
राष्ट्र प्रेस
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